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Saturday, 9 December 2017

जो पिया का संदेशा लाए

मुंडेर पे काला कौआ बैठा काँव काँव चिल्लाए
सुनके उसकी काँव काँव को दिल मेरा हुलसाए

शायद आज कोई संदेशा पिया के गाँव से आए
दिल में  फिर से हूक उठी सौ सौ तूफ़ान उठाए

करने फिर सिंगार को बैठी दिल में प्रेम जगाए
पिया बिना कछु सूझे नाहीं मन मोरा बौराए

माथे  कुमकुम टीका बिछिया पायल भी इतराए
कर  सौलह सिंगार सजी मैं पिया की आस लगाए

बार बार उठ द्वार पे जाऊँ नैनन टकटकी लगाए
करूँ मनुहार पवन की जो पिया का संदेशा लाए
@मीना गुलियानी 

Thursday, 7 December 2017

दीप जला जाना

इस दिल ने उठाये लाखों सितम
तुम और सितम अब मत ढाना

तड़पा है किसी की याद में ये
तुम इसको याद नहीं आना

चाहे सुबह ढले चाहे शाम ढले
नाम जुबां पे हमारा मत लाना

खुश रहना  हर हाल में तुम
अश्कों को न अपने ढलकाना

दिल तुमको दुआएँ देता है
ख़ुशी  के दीप जला जाना
@मीना गुलियानी


तुम बिन रहा नहीं जाता

आज फिर दिल ने तुमको पुकारा
तुमने पलटकर न देखा दुबारा

 क्यों इतनी कड़वाहट रिश्तों में घुली
खुदा जाने क्यों ये सज़ा मुझे मिली

वो पल हसीन थे जब हम मिले थे
दिल में उमंगों के फूल खिले थे

अब वो सारे गुल मुरझाने लगे हैं
तेरी विरह में आँसू बहाने लगे हैं

कलियों का तड़पना देखा नहीं जाता
आ जाओ तुम बिन रहा नहीं जाता
@मीना गुलियानी 

Wednesday, 6 December 2017

समीकरण में उलझा रहता है

जिंदगी की समस्या क्या कभी खत्म होगी
समुद्र की लहरों सी मचलती रहती हैं
इनका क्षेत्र कितना विस्तृत है
अनवरत सी चलती रहती हैं
कभी कभी तो ज्वारभाटा
और कभी ज्वालामुखी बन
नागिन सी फुँफकारती हैं
कभी गर्मी की तपिश तो
कभी सर्दी का तीक्ष्ण रूप लेती हैं
जीवन अस्त व्यस्त कर  देती है
कोई बेघर, बेचारा, भूख का मारा
सड़कों के फुटपाथ पर ठिठुरता है
अलाव जलाकर सर्दी कम करता है
बिना वस्त्रों के रात गुज़ारता है
तो कभी भूखे पेट सोता है
उनकी हालत बहुत खस्ता होती है
जिसे देखो समस्याग्रस्त नज़र आता है
क्या समस्या से बचने का कोई रास्ता है
मेरा मन इसी समीकरण में उलझा रहता है
@मीना गुलियानी

Tuesday, 5 December 2017

टूट के बिखर जाएँ हम

तुम्हीं बताओ कैसे जिया जाएगा सनम
इक तरफ जहाँ है और इक तरफ सनम
ऐसे तो घबरा के टूट ही जायेंगे हम
दिल मेरा कहाँ है और तू कहाँ सनम

बीच भंवर में डूबती ही जा रही थी नाव
आये तुम तो डूबते हुए को लिया थाम
लड़खड़ा रहे हैं कदम गिर न जायें हम
आओ तुम्हें पुकारते हैं थाम लो सनम

राहते जा बनके आ गए जिंदगी में तुम
मुस्कुरा दी जिंदगी भी मिल गए जो तुम
अब तो ज़िद अपनी छोड़ो तुमको है कसम
ऐसा न हो कि टूट के बिखर जाएँ हम
@मीना गुलियानी

Monday, 4 December 2017

तेरे आने से बढ़ जाती है

तारों की छाँव में हर एक रात गुज़र जाती है
 दिल को समझाने तेरी याद चली आती है

हम ख्यालों में तुमको ही बुला लेते हैं
जब शबे ग़म की तन्हाई तड़पाती है

जाने क्यों कौंधती है बिजली घटाओं में
हिचकियाँ देके मुझे पवन चली जाती है

जब घटा झूमके आँगन में बरस जाती है
दिल की धड़कन तेरे आने से बढ़ जाती है
@मीना गुलियानी


Sunday, 3 December 2017

दिल ही में सिमट जाएंगी

आईना देखके जब याद मेरी आएगी
साथ गुज़री मुलाक़ात याद दिलाएगी

जब यादें भावनाओं का ज्वार उठायेंगी
तुम्हीं बताओ वो शाम कैसे गुज़र पायेगी

आँखों आँखों में ही कह देंगे सारी बातें
 रात तारों की छाँव में ही कट जायेगी

सारी कटुता भूलकर दूरी मिट जायेगी
सब ख़्वाहिशें दिल ही में सिमट जाएंगी
@मीना गुलियानी