Search This Blog

Monday, 16 July 2018

आके ख़्वाबों में मिलें

कभी ऐसी भी हवा तो चले
कौन कैसा है पता तो चले

तुम उठके अभी से कहाँ को चले
अभी तो मिटाने हैं शिकवे गिले

कितनी मुद्दत बाद हमें तुम मिले
मिटाने हैं सदियों के ये फ़ासले

अभी तो शुरू किये बातों के मसले
पूरे कहाँ होंगे अभी ये सिलसिले

उम्मीदों को अपनी जगाए  रखना
कहना उनसे आके ख़्वाबों में मिलें
@मीना गुलियानी 

Sunday, 15 July 2018

खुशबु को पाकर महकने लगे

बहुत दूर है तुम्हारे घर से
हमारे घर का ये किनारा
पर हम हवा से पूछ लेते हैं
क्या हाल है अब तुम्हारा

यूँ तो आती जाती बदली
तुम्हारी राह पे जब कौंधती है
हम चौंक उठते हैं देखकर
छुपा है इसमें तुम्हारा इशारा

फूल पत्ते सब मुस्कुराने लगे
नग्में  सब प्यार के गाने लगे
दिल को ये दिन सुहाने लगे
जुगनू भी अब जगमगाने लगे

पत्ते  चिनारों से गिरने लगे
ओस के कण बिखरने लगे
फूलों से दामन हम भरने लगे
खुशबु को पाकर महकने लगे
@मीना गुलियानी




Friday, 13 July 2018

बरसात चली आई

तुम मिले ,बिछुड़े , पर जब फिर से मिले
मेरी जिंदगी में ख़ुशी की इक किरण आई

अब यह क्या हुआ अचानक ख़ुशी हमारी
किसी से देखे न बनी देखते ही जुदाई आई

 कोई बात नहीं क्या हुआ जो तुम पास नहीं
दिल के कोने में तेरी याद चुपके से चली आई

है मन भी कुछ उदास इसे भी है प्यार की प्यास
पलकें भी हैं भीगीं अन्जाने ही बरसात चली आई
@मीना गुलियानी 

Thursday, 12 July 2018

पायल अपनी छनकाई है

आज धरती दुल्हन सी नज़र आई है
ओढ़ तारों की चुनर खुद ही शरमाई है

चाँद भी देख रहा तिरछी नज़र से उसको
गगन भी डोल उठा दे हिण्डोला उसको
बादल ने रिमझिम बारिश भी बरसाई है

देखो कैसा बदला समां हर नज़ारा है जवां
पत्ता पत्ता बूटा बूटा बोले नज़रों की जुबां
फूल से भँवरे ने भी प्रीत कैसी लगाई है

कोई अजनबी न रहा सब हो गए अपने
अरमां जगने लगे सच हो गए सपने
जुगनू चमकने लगे बजी कहीं शहनाई है

अंबर खुश है बहुत धरती का बदला समां
दोनों हिलमिल से गए चाँद हो गया बेजुबां
आज धरती ने पायल अपनी छनकाई है
@मीना गुलियानी 

Tuesday, 10 July 2018

दिल पे इख़्तेयार

आओ कहीं छिप जाएँ खो जाएँ फिर इक बार
धीरे धीरे चुपके से फिर आएगा खुमार

मुझको अभी भी याद है जब तुमसे हम मिले
कितनी सुहानी शाम थी कैसे थे सिलसिले
कैसे भुलाएं मस्त पवन वो शाम की फुहार

थामे हमारे हाथों को जब साथ तुम चले
ऐसा लगा कि जल उठे बुझते हुए दिए
तबसे तुम्हारी याद में दिल मेरा बेकरार

बरखा की रुत सुहानी लो मदमाती आ गई
दिल पे मेरे वो बिजलियाँ आके गिरा गई
ऐसे में भला रहता है कब दिल पे इख़्तेयार
@मीना गुलियानी 

Monday, 9 July 2018

अचानक बुझती है

इक सेज़ पे मातम छाया है
इक सेज़ सजी फूलों वाली
इक चमन का मालिक हँसता है
इक बाग़ का रोता है माली

इक द्वार पे बजती शहनाई
इक द्वार से अर्थी जाती है
इक मांग तो लो सिन्दूर भरा
इक मांग उजड़ती जाती है

इक महफ़िल लो आबाद हुई
इक बज़्मे मुहब्बत लुटती है
देकर के उजाला औरों को
इक शमा अचानक बुझती है
@मीना गुलियानी 

Sunday, 8 July 2018

मूक पुकार न की

नीरव निशीथ में चन्द्र किरण
ज्योत्स्ना हास से धवलित हो

सच कहना तव उर सपनों में
मिलने की मृदु मनुहार न थी

क्या कभी तुम्हारे प्राणों ने
प्रियतम की मूक पुकार न की
@मीना गुलियानी