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Thursday, 21 September 2017

माता की भेंट ---03

मेरी मात आ जाओ तुझे दिल ढूँढ रहा है 
मुझे दर्श दिखा जाओ तुझे दिल ढूँढ़ रहा है 

तुम आओ तो ऐ माँ मेरी किस्मत बदल जाए 
बिगड़ी हुई तकदीर माँ फिर से सँवर जाए 
कबसे खड़ा हूँ मैं तेरी उम्मीद लगाए --------- तुझे दिल ढूँढ़ रहा है 

इस दुनिया ने ऐ माँ मेरा सुख चैन है छीना 
मुश्किल हुआ है आज तो बिन दर्श के जीना 
आवाज़ दे मुझको माँ अपने पास बुला ले------ तुझे दिल ढूँढ़ रहा है 

रो रो के मईया आँखे भी देती हैं दुहाई 
सुनलो मेरी विपदा मईया जी करलो सुनाई 
अब जाऊँ कहाँ तुम बिन नहीं और ठिका है ----- तुझे दिल ढूँढ़ रहा है 
@मीना गुलियानी 

माता की भेंट ----02

तर्ज़ ----रहा गर्दिशों में हरदम 

मेरी मात आओ तुम बिन, मेरा नहीं सहारा 
दर्शन दिखाओ मुझको , दिल ने तुझे पुकारा 

आके हाल मेरा देखो , दुनिया के दुःख हैं झेले 
तेरे बिना जहाँ में , रोते हैं हम अकेले 
माँ मुझे न तुम भुलाना , मुझे आसरा तुम्हारा 

क्यों बेटे पर तुम्हारी, नज़रे कर्म नहीं है 
सारी ये दुनिया माता , वैरी मेरी बनी है 
मेरी लाज को बचाओ, मैं बच्चा हूँ तुम्हारा 

मेरे आँसुओ का तुम पर ,कोई असर नहीं है 
कैसे सुनाऊँ तुमको, विपदा जो आ पड़ी है 
मँझदार में फंसा हूँ ,सूझे नहीं किनारा
 @मीना गुलियानी 

Wednesday, 20 September 2017

माता की भेंट -01

तर्ज़ ---मैं  कता प्रीतां नाल

मैं करा प्रीतां नाल ---------------------------- दर्शन मइया दा
वा वा दर्शन मइया दा-----------------सोहणा दर्शन मइया दा

गुफा मइया दी सोहणी लगदी पर्वत दे विचकार
मइया शेरां वाली दा , है सुन्दर दरबार   - ------दर्शन मइया दा

आये भगत प्यारे मइया दे बोलण जय जयकारे
जेहड़ा उसदा नाम ध्यावे , पल विच उसनू तारे --दर्शन मइया दा

मइया जी दे द्वारे सोहणी जगदी ऐ जोत न्यारी
माता जी दी शेर सवारी, लगदी ऐ प्यारी प्यारी ---दर्शन मइया दा

माँ अम्बा जगदम्बा जी दा सुन्दर भवन रंगीला
प्रेम दे वाजे वजदे दर ते , नाम दी हो रही लीला ---दर्शन मइया दा

दुर्गा शक्ति जी दे अग्गे हाल फोलिये दिल दे
शेरां वाली दे दरबारों , मंगे मनोरथ मिलदे -----  दर्शन मइया दा
@मीना गुलियानी




Tuesday, 19 September 2017

अरमाँ पूरे नहीं होते

           कभी ख़ुशी पाने की आशा
           कभी है गम की निराशा
           कुछ खोके पाने की आशा
           यही है जीवन की परिभाषा

इंसानियत आदमी को इंसान बना देती है
लगन हर मुश्किल को आसान बना देती है
सब लोग यूँ ही मंदिरों में नहीं जाते हैं
आस्था पत्थरों को भी भगवान बना देती है

कभी मेहनत करने पर भी सपने पूरे नहीं होते
इससे निराश न होना कभी हम अधूरे नहीं होते
जुटाओ हिम्मत बढ़ो आगे छू लोगे आसमाँ भी
बिना लहरों  से टकराए अरमाँ पूरे नहीं होते
@मीना गुलियानी


Sunday, 17 September 2017

चैन न दिल को आए

तुम बिन न लागे जिया
अब तक काहे न आए

काहे बसे परदेस बलमवा
बिसरे तुम मोरा अँगनवा
कासे कहूँ अब कैसे रहूँ मैं
बिरहा तेरी जो सताए

ऐसे बेदर्दी से नाता जोड़ा
जिसने मेरे दिल को तोडा
बिसर गया मोको हरजाई
जाके देस पराए

छाये हैं चहुँ ओर अँधेरे
कैसे होंगे अब ये सवेरे
प्रीत मेरी ठुकराके तूने
दर्द भी मोरे बढ़ाए

अब छाये बादल मतवाले
 दिल को बोलो  कैसे संभाले
प्रीत अधूरी गीत अधूरे
चैन न दिल को आए
@मीना गुलियानी

Wednesday, 13 September 2017

स्मृति पलकों में बन्द रहती है

तुम्हारी स्मृति पलकों में बन्द रहती है
मुझसे वो बातें चन्द करती ही रहती है

कभी पलकों में ये मुस्कुराती है
कभी कभी अश्क भी बहाती है
जाने क्यों फिर भी तंग रहती है
दिल में इक जंग जैसे रहती है

तुमको ये हाले दिल बता देगी
पूछोगे गर तो ये पता देगी
मुझसे शायद नाराज़ रहती है
तभी ये कुछ उदास रहती है

कभी तो हौले से गुनगुनाती है
कभी थपकी देके भी सुलाती है
दिल के हर राज़ बयां करती है
मन में शायद सबसे डरती है

कभी ये लोरियाँ सुनाती है
कभी रूठूँ तो ये मनाती है
कभी आसमाँ से उतरती है
कभी ज़मीं पे पग धरती है
@मीना गुलियानी 

Tuesday, 12 September 2017

चिरनिद्रा में सो लेने दो

तुम आज मुझे सो लेने दो
चुप चाप मुझे रो लेने दो
बरसों से सुख से सो न सका
चिरनिद्रा में सो लेने दो

क्या सोचा था और क्या पाया
दिल जाने कहाँ मुझको लाया
लहरों ने थपेड़े मुझको दिए
अब चाके गरेबाँ सीने दो

क्या क्या न सितम मुझपे टूटे
इक साथ तेरा तब पाया था
तूने भी भटकने को छोड़ा
अब मुझको सुकूँ से जीने दो

होठों तक आते आते भी
क्यों नाम तेरा न ले पाता
दिल रोता है पीड़ा से मगर
चुप चाप ये आँसू पीने दो
@मीना गुलियानी