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Wednesday, 23 May 2018

मैं पूरी करना चाहती हूँ

मैं एक मीठी नींद में खोना चाहती हूँ
उम्र के इस पड़ाव पर आकर भी
चाहती हूँ की कोई मेरा सिर सहलाये
माँ की तरह दिलासा दे, बहलाये
मेरा बचपन तो पीछे छूट गया
पर वो दिन अभी भी याद आते हैं
वो रूठना,मनाना ,हँसना ,खिलखिलाना
मैंने उम्र के हर पड़ाव पर संघर्ष झेला है
चाहती हूँ अब तो कुछ सुकून पा सकूँ
सूरज से उम्मीद की रश्मियों को लेकर
संभालकर रखा है जिसे अब बच्चों पर
उंढ़ेलना चाहती हूँ ताकि  उस उजाले को
 देखकर वो मुझे याद करें मुस्कुराएं
चाहती हूँ कि वो अपनी उम्मीदों के पंख
फैलाकर उन्मुक्त आकाश को छू लें
मुक्त स्वच्छन्द हवा में साँस लें
हर फ़िक्र दिल से निकालें, मुझे सौंप दें
मैं उनके हर संताप को हर लेना चाहती हूँ
बस यही ख़्वाहिश मैं पूरी करना चाहती हूँ
@मीना गुलियानी

Monday, 21 May 2018

तेरा जादू सा चल गया

वक्त हाथों से फिसल गया
दिल का ग़म भी पिघल गया

उसने चालें तो वैसे खूब चलीं
पर इस बार मैं संभल गया

अक्स आईने में मैंने जब देखा
खुद मेरा ही दिल मचल गया

जिंदगी गुज़री है यूँ अपनी
वक्त मुझे जैसे छल गया

आया ज़हन में जो तेरा ख्याल
बर्फ़ सा मैं वहीँ पे जम गया

आने लगा ऐतबार फिर तुझपे
मुझपे तेरा जादू सा चल गया
@मीना गुलियानी 

Sunday, 20 May 2018

प्रभु दर्शन हो जायेँगे

तुम अपने अंतर्मन की खिड़की खुली रखना
ताकि किसी दुखी मन की पुकार सुन पाओ
जब कभी घुमड़ते हुए सवालात के बादल
तुम्हारे हृदय पटल पर छा जाएँ मन भटकाएं
 मन का दीप जला लेना अन्धकार मिटा लेना
आसमान के तारे भी तुम्हें राह दिखायेंगे
तुम्हारे अंतर्मन में छिपे डर को दूर भगायेंगे
चाहे बिजली कड़के चाहे घनघोर बादल गरजें
पर तुम कभी अपने पथ से विचलित मत होना
तुम्हारे लिए सब बंद दरवाज़े स्वत; खुल जायेंगे
फिर जब नेत्र मूँद लोगे तुम प्रभु दर्शन हो जायेँगे
@मीना गुलियानी

Saturday, 19 May 2018

जहाँ तू मेरे साथ हो

मत जाओ दूर इतना कि हम  तुझे ढूँढ़ते ही रहें
मत पास आओ इतना मिटे दिल की प्यास वो

सजा दो चाँदनी को भी तुम अपने ऐसे लिबास में
लगता रहे मुझे कि तेरा खिलता  नूर मेरे पास हो

क्यों बेकरार करती है मुझे ये दिलकशी तेरी
घटती ही नहीं कभी मेरी आँखों की प्यास वो

हो जाए कभी ऐसा है तमन्ना सदा से ही  मेरी
ज़मीं वो फूलों से भर जाए जहाँ तू मेरे साथ हो
@मीना गुलियानी 

Friday, 18 May 2018

यही बात इससे मैंने सीखी है

ये जिंदगी बहुत अलबेली है
मेरी वो मस्त सहेली है
जब मैं हँस दूँ वो हँसती है
मैं रोऊँ वो  संग में रोती है
मेरा वो  ख़्याल रखती है
अपनी पलकों पे बिठाती है
मेरे संग वो मुस्कुराती है
खुशियों की बौछार करती है
कितने ही मनुहार करती है
खुद ही रूठके मान जाती है
कितना प्यार वो जताती है
बात बात पर झगड़ती है
इतराती धौंस जमाती है
पहले पहेली जैसे लगती थी
अब सहेली जैसी लगती है
ममता की छाँव और प्यार है 
माँ के आँचल सी उसकी गोद है
मेरे थकने पे लोरी गाती है
मुझे अपनी बाहों में सुलाती है
इसका प्यार दुनिया से अनोखा है
कहीं भी फरेब न कोई धोखा है
खुश रहना जो चाहो तो इसे
अपना बना लो या इसके बन जाओ
यही बात इससे मैंने सीखी है
@मीना गुलियानी

Thursday, 17 May 2018

मुझे महसूस करो

मैं तो सिर्फ एक एहसास हूँ
तुम मुझे छू नहीं सकते
तुम मुझे महसूस करो
मैं तुमसे दूर नहीं हूँ
तुम्हारे आसपास ही हूँ
सुबह की धूप में हूँ
सुरमई शाम में हूँ
बारिश की बूंदों में हूँ
तुम्हारी नींद में हूँ
तुम्हारी जागृति में हूँ
तुम्हारे ख्वाबों में हूँ
हवा के झोंकों में हूँ
फूलों की खुशबु में हूँ
तुम सिर्फ अपनी आँखें बंद
करके अन्तर्मन  में देखो
तुम्हारी ही आत्मा हूँ
तुम्हारे ही भीतर  हूँ
तुम्हारे अचेतन मन में
सदा से समाई हूँ पर
दिखाई नहीं देती
मुझे पहचानो और सिर्फ
 मुझे महसूस करो
@मीना गुलियानी 

Wednesday, 16 May 2018

तसव्वुर इतना प्यारा हो गया

ज़ख़्म पुराना ताज़ा हो गया
बगावत का इरादा हो गया

नज़रों को यूँ चुराया न करो
अब ये दिल तुम्हारा हो गया

करो रोशन तुम इस जहाँ को
खुद के भीतर उजाला हो गया

सबसे दूर होते जा रहे हो तुम
तसव्वुर इतना प्यारा हो गया
@मीना गुलियानी