रविवार, 10 मई 2015

गुरुदेव के भजन-244 (Gurudev Ke Bhajan244)




तू आए न आये तेरी ख़ुशी हम आस लगाये बैठे है 
तेरी याद बसी मेरे मन में हम नैन बिछाए बैठे है 

करते हम निशदिन याद तुझे जाने कब करोगे पार मुझे 
हे सतगुरु मोरे दया करो जग के ठुकराये बैठे है 

तुम दुनिया के रखवाले हो मेरी बिगड़ी बनाने वाले हो 
कब लोगे आकर सुध मेरी सुख चैन गंवाए बैठे है 

मेरे सतगुरु क्यों अनजान बने मेरे गम की है पहचान तुम्हें 
मेरी किश्ती को तू किनारे लगा मंझधार के साये बैठे है 


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