ओ मूर्ख बन्दे सोच ज़रा आखिर तो कहाँ पे जाना है
छल कपट द्वेष को त्याग ज़रा
क्यों सोया है अब जाग ज़रा
तेरा सोये जीवन बीत गया
पीछे तूने पछताना है
बाबा नाम सिमर क्यों सोया है
अनमोल जीवन क्यों खोया है
ये जीवन बहता पानी है
आखिर इसने बह जाना है
करले तू भला हो तेरा भला
है भलाई का ये ही बदला
कर नेकी तो जीवन संवरे
क्यों हीरा जन्म गवाना है
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