Meena's Diary
रविवार, 29 मार्च 2020
कितना मजबूर है
दर्द किसी का न पहचाने इतना वो मगरूर है
ख़ामख़ाह मसरूफ़ दिखाए कितना मजबूर है
@मीना गुलियानी
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