राह से भटके हुए ये राही लेकर आस ये आये दर्श बाबा दीजिये
तुम्हरे बिन न कोई सहाई है जग के ठुकराये दर्श बाबा दीजिये
रहती सदा से प्यासी अखियाँ तेरे दीदार की
रहमों कर्म से अपनी भरगया
दर्श को पाके दो झोली गुनहगार की
तुम्हरे दर पे सदा लगाएं खाली लौट न जाएं दर्श बाबा दीजिये
है लेके बाबा आंसू की भेंट तेरे द्वार पे
देखे सभी है बाबा अपने पराये संसार के
अब तो ठोकर सही न जाये रो रो हाल सुनाये दर्श बाबा दीजिये
सुनते है आये चरणों में जो भी तेरे आ गया
दर्श को पाके तेरा सोये नसीबों को जगा गया
दास है बैठे आस लगाये निकले यही सदाएं दर्श बाबा दीजिये
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