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गुरुवार, 7 अप्रैल 2016

माता की भेंट - तर्ज- हम छोड़ चले है महफ़िल को


मेरी नाव तुम्हारे हाथ में है जगदम्बे पार लगा देना 
पापी मन के अंधियारे में इक प्रेम  का दीप जला देना 

                       जीवन तो दिया कुछ करने को पर भूल गया भव झंझट में 
                        मै एक अभागा राही हूँ, हे माँ मुझे राह दिखा देना 

तुम भक्तन की हितकारी हो ,करती सबका कल्याण तुम्हीं 
मुझ दीन की हालत देख ज़रा , मेरे बिगड़े काम बना देना 

                      अगर भूल जाऊँ मै तुमको पर ,मुझको भूल न जाना तुम 
                      आकर तुम किसी बहाने से, मेरी भूलें तुम बिसरा देना 

तुम जगतारण जगमाता हो,मै तेरा ही इक बालक हूँ 
इस दास के हृदय आँगन में,एक दया का दीप जला देना 
@मीना  गुलियानी   


करलें बसेरा हम तुम


नदिया के पार चलो करलें बसेरा हम तुम 
ढूँढे हमें सारा जहाँ कहीं खो जाएँ हम तुम 

                   ठण्डा ठण्डा पानी यहाँ भँवरे गुनगुनाते है 
                   फूल गुलिस्ताँ में तो सब खुशबु  लुटाते है 
                   चलो यहीं खो जाएँ होश हो जाने दो गुम 

मस्त मस्त  मौसम है हवा मतवाली है 
दिल मेरा झूम रहा झूमे डाली डाली है 
कितना सुकूँ है यहाँ चलते रहें हम तुम 

                    न रुको तुम भी कहीं न रुकें हम भी कहीं 
                    बढ़ते रहें आगे न दिखे हद है कहीं 
                    दोनों थामे हाथों को वादियों में हो जाएँ गुम 
@मीना गुलियानी 

तर्ज --ऐ मेरे दिल नादान (माता की भेंट)

मुझे आस तेरी मैया ना निराश मुझे करना 
सब कष्ट हरो मेरे आंचल की छाँव करना 

मेरे मन के द्वारे में आ करलो बसेरा माँ 
तेरी जोत जले मन में हो दूर अँधेरा माँ 
मै आया शरण तेरी मुझे दर्श दिखा देना 

मेरी आस का बंधन माँ टूट न जाए 
क्या साँस का भरोसा पल आये न आये 
मेरे नैन प्यासे है मेरी प्यास बुझ देना 

सब देख लिया जग को माँ कोई नहीं अपना 
सब झूठे नाते है जग सार इक सपना 
मै भटका मुसाफिर हूँ तू राह दिखा देना 
@मीना गुलियानी 

बुधवार, 6 अप्रैल 2016

तर्ज - बार बार तोहे क्या समझाए पायल की झंकार (माता की भेंट)

जय जगदम्बे मात भवानी दया रूप साकार 
सुनो मेरी विनती आया हूँ तेरे द्वार 

आज फंसी मंझधार बीच मेरी नैया 
तुम बिन मेरा कोई नहीं है खिवैया  
नैया मेरी जगदम्बे माँ ,करदे भव से पार--------------  

महिषासुर के मान मिटा देने वाली 
रावण जैसे दुष्ट खपा देने वाली 
पाप मिटा देती चामुण्डा , ले कर में तलवार -------------

 तेरे नाम की महिमा अजब निराली है 
अपने भक्तों की करती रखवाली है 
अपने भक्तो की खातिर, तूने रूप लिए भू धार -------------

जगमग करती जोत  तुम्हारी है माता 
विद्या और बुद्धि बल की तू दाता 
गाता हूँ मै गीत तुम्हारे ,मैया करो उद्धार -----------------
@ मीना गुलियानी ----

करती है बेकरार


ये रुत जाने आई कैसी करती है मुझको बेकरार 
मै भी न जानू मेरा आँचल लहराए क्यों बार बार 

                   वादी में झूमूँ मै तो घड़ी घड़ी 
                   मस्ती में डोलूं इत उत घड़ी  घड़ी 
                   दिल खोया जाए किसको बुलाये 
                   करता है किसका इंतज़ार 

देखो मस्ती सी छाई है प्यार की 
खिल गई है कली भी कचनार की 
झूले पड़ गए सावन बुलाये 
पड़ने लगी है फिर फुहार 

                   चंदा भी देखो है गीत गाने लगा 
                   चाँदनी के संग में गुनगुनाने लगा 
                   तारों की डोली लेकर आए 
                   किसके लिए ये सब कहार
 @मीना गुलियानी 

मेरी आगामी पुस्तक --"102 कविताएँ "


मेरी आगामी पुस्तक --"102 कविताएँ "




आप सभी पाठकगणों को यह बताते हुए मुझे अत्यन्त हर्ष हो रहा है कि मेरी छठी पुस्तक  "102 कविताएँ "

कश्यप प्रकाशन  के माध्यम से शीघ्र ही  प्रकाशित होने जा रही है ।   मुझे पूर्ण आशा है कि आपका स्नेहभरा

सहयोग तथा सराहना इस पुस्तक को भी प्राप्त होगी  जिसकी मुझे आप सबसे अपेक्षा है  ।


मेरी पांचवीं पुस्तक का लिंक है :-

http://www.amazon.in/Bikhare-Panne-Meena-Gulyani/dp/1515087972/ref=sr_1_6?ie=UTF8&qid=1459948695&sr=8-6&keywords=gulyani


धन्यवाद

मीना गुलियानी 

कैसे बतलाएँ हम

अपना जीवन तो मैने तुझे सौंप दिया है
मिले प्यार तेरा - पाऊँ तेरा मै संग 
तुझसे कुछ और मैने तो माँगा नहीं 
तेरा साथ कभी भी  न छोड़ेंगे हम 

मेरे जीवन की तुझसे कहानी जुडी 
मेरे गीतों की माला है ये लड़ी 
तेरे सजदे में सर है झुकाए हुए 
कुछ तो करदो करम ---------------

तू ही सपना मेरा जिंदगानी है तू 
मेरी सौगात की हर निशानी है तू 
तुझे आँखों में सबसे छुपाए हुए 
यूँ ही फिरते है हम ------------------

तुम मिले जबसे हर सपना सुहाना लगे 
जीवन खुशियों भरा इक तराना लगे 
तेरी मुस्कान पर है फ़िदा आज भी 
कैसे बतलाएँ हम ----------------------
@मीना गुलियानी 

मंगलवार, 5 अप्रैल 2016

मुश्किल है



दुनिया है दीवार तुमको पाना मुश्किल है
आऊं कैसे पास तेरे आना मुश्किल है

                   कैसे कहदूँ क्यों मै तुमसे दूर हूँ
                   तुझसे मिलने के लिए मजबूर हूँ
                   तू है मेरे सामने पर पाना मुश्किल है

कैसी  देखो छाई है गम की घटा
प्यार से अपने तू इसको दे हटा
अपनी मजबूरी को भी बताना मुश्किल है

                   आ जाओ इक बार तो दीदार हो
                   मिल जाओ तो जीना न दुश्वार हो
                   पैगामे उल्फ़त तुझे पहुँचाना मुश्किल है 
@मीना गुलियानी

करता है आज नमन


तुमको इस देश का बच्चा बच्चा करता है आज नमन
                        तुम हो इस देश का गौरव कैसे भूलें तुमको हम
तुम हो रणबाँकुरे न झुकेगा सर ये तुम्हारा
                       तुमने ही आगे  बढ़कर हर दुश्मन को ललकारा
है बाजुओं में ताकत तुममें वीर शिवा सी
                       लो जब हुँकार तो थर थर कांपे छाती दुश्मनों की
न  कर सके बाल भी बांका रण में कोई तुम्हारा
                      तुम आन बान हो वतन की रहे ऊँचा तिरंगा हमारा
है देश को गर्व तुम्हीं पर तुम  विजयी पताका फहराओ
                       न लज्जाना दूध माता का न पीठ पे गोली खाओ
है नाज़ हमें तुम पर है तुम हो इस देश के वासी
                       कितने क्रांतिवीरों ने न झुकने पर पाई है यहाँ फांसी
है मातृभूमि की सौगन्ध तुम्हें तुम इसका कर्ज चुकाना
                       तुम बनकर प्रहरी इसके दुश्मन के हर वार से बचाना
@मीना गुलियानी

रोता है ज़ार ज़ार क्यों



ऐ दिल सम्भल जा अब न सता रोता है ज़ार ज़ार क्यों
जब ये  चमन उजड़ गया लौटेगी अब बहार क्यों

                   पत्ते चिनारों के झड़ गए बागबां सारे उजड़ गए
                  छाई है हरसू वीरानियाँ वक्त का इंतज़ार क्यों

छा गई है यूँ खामोशियाँ चुप हो गईं है सरगोशियाँ
गुलशन उजड़ गया मेरा माली का इंतज़ार क्यों

                      हर शाख अब बेनूर है डाली पे अब न सरुर है
                      फ़िज़ा की रुत बदल गई मौसम का ऐतबार क्यों 
@मीना गुलियानी 

धड़कन सुनाई न जाए


मुहब्ब्त की धड़कन सुनाई न  जाए
ये वो शह है जो कि दिखाई न जाए

जहाँ सो गया आज इसकी  ख़ुशी में
सम्भला न वो मय पिया जो  किसी ने
ये वो शह है जो कि अाजमाई न जाए
जुबां पे कोई बात लाई न जाए

न  टला है किसी का   कोई भी वादा
पूरा करें हर आशिक अपना  इरादा
ये खंजर से काबू में लाई  न जाए
मिटा दे जो  हस्ती वही उसको पाये 
@मीना गुलियानी 

सोमवार, 4 अप्रैल 2016

हमको जफ़ा न आई


तुमने वफ़ा न की थी हमको जफ़ा न आई 
दिल है तुम्हारा पत्थर उससे ही मात खाई 

                 इस दिल ने हमको भी तो लाके कहाँ पे छोड़ा 
                 किससे करें शिकायत जब आग खुद लगाई 

बर्बादियों का मंज़र जाके किसे दिखाएँ 
खुद ही बने थे दुश्मन कैसी ये बेवफाई 

                   किससे करें गिला हम जाने ये क्या हुआ है 
                   अब रोशनी भी गुम है कैसी ये रात आई 

पूछो जमाने भर से क्या हाल है हमारा 
अब तो खुद ही जाने दुनिया न समझ पाई 
@मीना गुलियानी 

सपना मेरा टूट गया



प्यारा सा सपना मेरा टूट गया
साथी सफर का पीछे छूट गया

                     ऐसा भी क्या हमने तुम्हारा बिगाड़ा
                     जाते हुए जो तुमने हमें न पुकारा
                     हमने इंतज़ार किया दिल बेकरार किया
                     खुशियों भरा ये दामन हुआ बेसहारा
                      साथी हमारा हमसे रूठ गया

ओ बेवफा ये कैसी प्रीत निभाई
खुशियाँ भी छीनी तूने निंदिया उड़ाई
हमें मंझधार छोड़ा दिल का करार तोडा
हमको फ़िज़ा ये तेरी रास न आई
तेरी ज़फ़ा ने हमको लूट लिया
@मीना गुलियानी 

रविवार, 3 अप्रैल 2016

रे मन थोड़ा धीर धरो


गोरी का पिया से मिलन होगा
रे मन थोड़ा धीर धरो
चंदा उतरा तेरे आँगन होगा
रे मन थोड़ा धीर धरो

गोरी घूँघट में शर्माती आई पिया के पास
लज्जा से शर्माकर उसने कहदी जी की बात
चंदा तारों का संगम होगा रे मन थोड़ा धीर धरो

पायल उसकी छम छम बोले नथनी हाल डोले
पिया से गोरी शरमा जाए घूँघट वो न खोले
आज मनवा बड़ा चंचल होगा रे मन थोड़ा धीर धरो

गोरी का मुख्य इतना सुंदर जैसे कोई मोर
पिया एकटक ताकें जैसे चंदा और चकोर
सजना का उसे दर्शन होगा रे मन थोड़ा धीर धरो
@मीना गुलियानी 

सच्चे वादे है प्यार के


प्रीत की ये डोर सैंया जाओ न विसार के
बांधे जो धागे सच्चे वादे है प्यार के

                दिल में हमारे पिया तू ही बसा है
                इतना बताओ मुझे क्या मेरी ख़ता है
                ऐसे क्यों रूठे पिया हमें यूं विसार के

रोकूँ में रास्ता तेरा थामूं तेरी बैंया
प्यार के अपने पिया दे दो ना छैंया
दिल में बसाना हमें भूलें विसार के
@मीना गुलियानी 

नई क्रान्ति के सैनानी


तुम नई क्रान्ति के सैनानी
तुम स्वर्ग धरा पर ला सकते
यदि तुममे संबल साहस है
तुम दुनिया नई बना सकते

                       तुम इन हाथो की मेहनत से
                       मिट्टी को सोना कर  सकते
                       धरती में छिपे  खज़ाने से
                       भारत का आँचल भर सकते

आज क्रान्ति के बीज बरसते
डोल रहे पेड़ों के पात
आज बन्धनों में जकड़ा है
मानवता का जर्जर गात

                         नव संसृति संवाहक बनकर
                        किरण बाण से दो तुम चीर
                        आज पुरातन गौरव का फिर
                         लहराए सागर गम्भीर

अम्बर के चाँद सितारों में
संदेश नया  सा आता है
सुषमा सीमित है कहीं नही
तुमको आकाश बुलाता है
@मीना गुलियानी


जाके किसे सुंनाएँ

ये तराने प्यार के हम जाके किसे सुंनाएँ
दिल में भरें है अरमां कहदो कि न रुलाएं

                   इन आँसुओं के मेरे सैलाब न रुके है
                   गम से भरा जहाँ है देखो जिधर भी जाएँ

दिल के गमों का लेकिन कोई नहीं ठिकाना
इन बादलों से कहदो , कहीं और बरस जाएँ

        तकलीफ क्यों तुम्हें दें  हमको  नहीं गंवारा
ये मेरा नसीब जाने, कहाँ आशियाँ बनाएं
@मीना गुलियानी 

शनिवार, 2 अप्रैल 2016

चुपके चुपके चोरी चोरी


छेड़ दिया मेरी मन वीणा का तार फिर से
आज किसी ने चुपके चुपके चोरी चोरी

                  न जाने किस दिशा से आकर
                  मन पंछी को फिर भरमाकर
                  सौंप दिया अपने जीवन का भार
                  किसी ने चुपके चुपके चोरी चोरी

भँवरे ने गए फिर  गाए गाने
अपने मन की प्यास बुझाने
खींच लिया अंजान पुष्प का सार
किसी ने चुपके चुपके चोरी चोरी

                 यौवन तो  होता है दीवाना
                 दिल दे बैठा बन मस्ताना
                 घाव बताओ वार किया कब
                 किसी ने चुपके चुपके चोरी चोरी
@मीना गुलियानी 

शुक्रवार, 1 अप्रैल 2016

दीप जलते रहेंगे


तेरी यादो  के दीप  जलते रहेंगे
कभी न बुझे ये कभी न बुझेंगे 
तेरे प्यार की इब्तदा जब से की है 
तू ही है खुदा बंदगी मेरी तू है 
इरादों से अपने गुज़रते रहेंगे 

                   तेरा प्यार दिल से कभी कम न होगा 
                   ये बढ़ता रहेगा कभी न मिटेगा 
                   निभाएंगे हम भी इसे जिंदगी भर 
                   ये देखेगी दुनिया हमें यूं उम्र भर 
                   मुहब्ब्त  की राहों से गुज़रते रहेंगे 

ये  दूरी कभी भी न  तुझसे गंवारा 
तू ही मेरी मंजिल तू ही है किनारा 
ये किश्ती मेरी अब तो तेरे हवाले 
देखूँ मै भी तो जीवन के उजाले 
दिए उम्मीदों के जलते रहेंगे 
@मीना गुलियानी 

इंतकाम लिया



मेरे नसीब ने जब मेरा इम्तेहान लिया
तेरी यादों ने आके मेरा हाथ थाम लिया

                       फ़िज़ा भी आँसुओ  में डूब गई जब
                       सुकूँ मिला जो  तुम्हारा नाम लिया

मै तो इक हर्फ भी न कह पाया तुमसे
मेरी बेबसी ने फिर से तेरा सलाम लिया

                       मेरी हर ख़ुशी ने तेरे गम की आबरू रखी
                      पर तेरे गम ने मेरी ख़ुशी से इंतकाम लिया
@मीना गुलियानी