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शनिवार, 30 जनवरी 2016

तमन्ना



इक यही तमन्ना है और कोई चाह नहीं 
लुट जाएं तेरे प्यार में और कोई राह नहीँ 
सहते जाएँ सितम जमाने के 
मुस्कुराते रहें 
मिले कितने ही गम 
गुनगुनाते रहें 
प्यार की हसीन वादी में 
चाहत के फूल खिलाते रहें 
गम न कर कोई गर जलाए आशियाँ 
उजड़ा आशियाँ फिर बसाते रहें 
झड़ गए पत्ते शाख से तो क्या हुआ 
प्यार के सुमन फिर खिलाते रहें 
कोई न रह जाए गम अछूता 
सबको गले से हम लगाते रहें 

मेरे हमसफ़र


जी चाहता है ये दिल तेरे नाम कर दूँ
अपनी सारी खुशियाँ तेरे नाम कर दूँ

                  अपनी जिंदगी तेरे हवाले करके
                   गम की बस्ती से बहुत दूर हटके
                  जीवन से सभी काँटों को दूर करके
                 तेरी झोली प्यार के फूलों से भरके
                  तमाम खुशियाँ तेरे नाम कर दूँ

भूल जाए तू सारे दुनिया के सितम
इस तरह से एक हो जाएँ हम
जैसे चँदा मिले सितारों से
जैसे सागर मिले किनारों से
अपनी जीवन नैया मांझी के नाम करदूँ

               डूबता है लो अब दिल का सफीना
              तू ही एक नज़र आता है नगीना
              ले चल तू मुझे बनाकर हमसफ़र
              तो कट जायेगी तेरी ये लम्बी डगर
              मै तेरी राहों को आसान कर दूँ 

शुक्रवार, 29 जनवरी 2016

दहेज व्यंग्य चित्र - मुक्तक


१.              किसी गाँव में बारात आई 
                 दुल्हे के पिता ने माँगा दहेज में 
                 कार, फ्रिज और टी.वी. 
                 तुरन्त ला हाज़िर किए 
                  उनके समधी ने बच्चों के वही खिलौने 
                 और दे दिए कन्या के पिता ने 
                 दहेज में वरपक्ष को 



२.              विदा होते समय वर बोला 
                 दुल्हन की डोली तभी उठेगी 
                 जब कन्या के पिता 
                 दहेज में पैट्रोल की या गैस से चलने वाली 
                कोई वस्तु उन्हें देंगे 
                दूरदर्शी पिता ने जेब से 
               सिगरेट लाइटर निकाला 
               और वर को दे दिया 

चुप्पी



यह कैसी है रात्रिबेला की निस्तब्धता 
तुम्हारा बिना आहट किये चले आना 
होठों पर चुप के ताले लगा देना 
ताकि वातावरण भी शान्त रहे 
तुम्हारी बातों में कोई खलल न पड़े 
तुम यूँ ही चुपचाप मेरे पास  बैठे रहो 
मै भी ऐसे हो तुम्हें देखती रहूँ 
नज़रों से बातें हों अठखेलियाँ हों 
पर मुँह से कुछ न बोलें 
ताकि अपना प्यारा दिवास्वप्न 
छिन्न भिन्न न करदें ज़माने वाले 
कहते है दीवारों के भी कान होते है 
कहीं कोई अफ़साना न बन जाए 
इसलिए चुप्पी साध ली है हमने 

भई रे बावरिया


तेरे ही कारण मै तो भई रे बावरिया
साजन तूने  लीनी न मोरी खबरिया

                  तेरे ही कारण मैने दुनिया बिसरा दी
                   सुध बुध खोके जिंदगानी लुटा दी
                   अंग अंग झूमे बरसूँ बनके बदरिया

प्रेम में तेरे सारा जग ठुकरा दूँ
तुझको न भूलूँ सबको बिसरा दूँ
चाहत में भूल गई अपनी डगरिया

                  धरती भी डोले और अंबर भी डोले
                  पायल मोरी बाजे मन खाए हिचकोले
                  रंग में तेरे मै तो रंग गई साँवरिया


गुरुवार, 28 जनवरी 2016

कुछ बोल ना



कब तक चुप बैठोगे अब कुछ बोल ना
धीरे धीरे से तू भेद जिया के खोल ना

                  दो चार कदम तुम संग चलो
                  तेरे साथ चलूँगी मै भी
                   ये फासले दिलों के
                   तय करना तुम और मै भी
                   आगे बढो बढ़ते चलो यूँ डोल ना

तुम जीत गए हो हमसे
हम हार गए  दिल तुमसे
क्या जान लगा दी तुमने
पहुँचे करीब मंजिल के
मंजिल तक आके बीच मुझे न छोड़ना 

जी लेने दे



यादों का सहारा है झूठा
                  दरिया का किनारा भी टूटा
न डूबने से बचा ऐे साहिल मेरे
                  मरकर ही मुझे चैन आने दे
इस विष को मुझे पी लेने दे
                  सब खुशियाँ लुट चुकी है मेरी
अब साँसों को भी सी लेने दे
                  जो दिल तेरे सजदे में झुका
उसका चाक दामन सी लेने दे
                  भुला लेने दे दुनिया के दर्दो - अलम
इस दुनिया से दूर मुझे जी लेने दे

आराध्य देव

जब भी मेरा दिल उदास होता है 
लगता है तू मेरे आस पास होता है 

कोई वादा नहीँ किया तुमने 
फिर भी क्यों इंतज़ार रहता है 
बेवजह ही करार मिलने पर 
दिल बड़ा बेकरार रहता है 

तुम किसी के ख्वाबों की 
इक तस्वीर लगते हो 
करूँ कैसे बयाँ तब्बसुम को 
कितने तुम हसीन लगते हो 

तुम तो जन्नत का  करिश्मा हो 
तेरे जलवों से ही बहार आये 
देखे जो सुन्दर रूप तुम्हारा 
कामदेव भी शर्मा जाए 

तुम ही मेरी कल्पना हो 
तुम ही सर्वस्व हो मेरे 
कैसे भुला दूँ मै तुम्हें 
तुम्हीं आराध्य देव हो मेरे 

बुधवार, 27 जनवरी 2016

अट्टालिकाओं का प्रतिशोध



शिखरों को चूमती हुई अट्टालिकाएँ 
                     आज अट्टाहस कर उठी 
न जाने कितनी मर्मान्तक यंत्रणाएँ  सहकर 
                     आज उद्दीप्त हो उठीं 
उन धवल वस्त्रधारी के प्रति 
                    कितनी क्रूर हो उठी 
जो वहीँ रहते थे मन में मैली परत थी 
                   आज असहिष्णु हो उठीं 
न जाने कितने मजदूरों का शोषण हुआ 
                  प्रतिशोध लेने अग्रसर हो उठीं 
सहे  जिन्होंने वज्रप्रहार भी, भूख ,लताड़ भी 
                 अब बर्बरता की सीमा लांघ उठी
आज तक की दबी हुई वो चिन्गारी 
                फिर से प्रज्वलित हो उठी  

मंगलवार, 26 जनवरी 2016

आशंका निर्मूल हुई




आशंकाओ से घिरा मेरा मन 
खोया हुआ था कहीं पर 
तुमने उसे जगा दिया 
एक मधुर स्पर्श से ही 
तन मन मेरा हिला दिया 
प्राणो में जीवन संचार हुआ 
आशा का आधार मिला 
तुम्हारा एक सहारा पाकर 
आशंकाएँ निर्मूल हुईं 
भय का बंधन टूटा 
और सुखमय संसार हुआ  

उदास न हो



मेरे हमनशीं , मेरे हमसफ़र
उदास न हो
कठिन सही तेरी जिंदगी का सफर
मगर उदास न हो

हज़ार मुश्किलें आयेंगी तेरी राहों में
है भरोसा तू हौसले से हटा देगा उन्हें
मुझे पायेगा अपने साथ तू  ख्यालों में
जो न हो यकीं वफ़ा पर तो आजमाना मुझे
मगर उदास न हो

सहर के बाद धूप भी तो निखरेगी
तेरे जज्बातों की माला भी तो बिखरेगी
उड़ायेगी उसकी सुगन्धि पवन फूलों से
छंट जायेगी तेरी दुःख  बदली
मगर उदास न हो

जानती हूँ तेरा लक्ष्य बहुत ऊँचा है
तेरे प्यार के चमन को वफ़ा से सींचा है
जो हो जाए तू कुर्बान वतन की राहों में
हज़ार सजदे करूंगी मै तेरी राहों में
मगर उदास न हो



प्यार की दास्तां



ज़मी और आसमां से भी पहले 
तेरा मेरा प्यार यूँ ही जवां था 

कहाँ से भटकते कदम कहाँ तक आ गए 
सारे जहान पर हम खुमार बनके छा गए 
प्यार में सारी मुश्किलें मेरी आसां हो गई 
खुदा भी हम पर कुछ मेहरबाँ था 

खाई जो कसमें वफ़ा की हमने निभा दी 
तेरे प्यार में ये जिंदगानी लुटा दी 
दिल की तड़प को हमने भुलाया 
हर एक अरमां जो नौजवां था 

सोमवार, 25 जनवरी 2016

कैसे करूँ जुदा




कैसे करूँ जुदा दिल से तेरे ख्याल को


यह बन चुका है मेरे जीने का आखिरी सहारा
जब छोड़ दिया था सबने मुझे बेसहारा
तेरे हाथों ने ही थामकर दिया था सहारा
अब चमका है मेरी किस्मत का सितारा


नज़र तेरी मेरे दिल की बात कहती है
तेरी तस्वीर मेरे साथ साथ रहती है
बहुत ही मुश्किल है तुमको यूँ भुला देना
तू कभी भी मुझे बेवफा नहीं कहना


करेगी क्या अगर दुनिया हमें सताएगी
मौत भी तुम्हारे बिन मेरे निशां न पाएगी
खो जाऊँगा मै तेरे सघन केशपाश में
भुला दूंगा तमाम दर्दो -गम दुनिया के मै 

रविवार, 24 जनवरी 2016

उनकी याद



तेरी  याद में सारी दुनिया भुला दी
 तेरे प्यार में जिंदगानी लुटा दी

                   क्या गज़ब है ग़मे मोहब्बत का हासिल होना
                  दिल पे चोट खाके भी लबों का हँसते रहना

हज़ार पर्दे पहरे  भी छुपा न पाएंगे उनको
मै तो रखता हूँ हमेशा दिल में बसाए उनको

                  उनके दीदार की बस एक झलक काफी है जीने के लिए
                 शमा का परवाना  बना रहना  काफी है मरने के लिए

शनिवार, 23 जनवरी 2016

न इतना सताओ


न मुझे इतना सताओ ज़माने वालो
कि खो दूँ होश मै अपने सताने वालो

                तुम्हें क्या खबर कि न उनसे मिलने से
                कहर  की रात  कल मेरे साथ गुजरी है
                तमाम खुशियों का गला घोंटकर जिऊँ कैसे
               तुम्हीं बताओ मुझे मुझ पे कहर ढाने वालो

उजड़ जाएगा मेरे प्यार का मुस्कुराता जहाँ
जो ये मालूम होता तो न बनाता मै आशियाँ
तिनका तिनका बिखर गया मिल गया धूल में
न जुल्म इतना ढाओ मुझे जिन्दा जलाने वालो

                  धरती आसमा सब जल रहे है मेरी आहों से
                  कर ली है सबने तोबा डरकर मेरी पनाहों से
                   पर नोच डाले है बेदर्द बनके तुमने परवाज़ के
                  न समझना रूह बख्शेगी मेरी कहर बरसाने वालो

ऐ दो जहाँ के वाली



कोई फरियाद कर रहा है,  ऐ दो जहाँ के वाली
सुनते है कि ,तेरे  दर से जाता न कोई खाली 

                 बिगड़ी बनाई तुमने इज्जत सभी को बक्शी
                 न मिटा पाएगी तेरे रहम को जहाँ की हस्ती
                 हे दाता सब दुखियों के मेरे भी बनो वाली

रो रोके कर रहा हूँ कबसे फरियाद तेरे आगे
देखना है तेरी चौखट पे कब मेरा नसीब जागे
हे दाता कर्म करना सुन दो  जहाँ के वाली

                  जब सबने था सताया तेरा हाथ सर पे पाया
                  मिला दिल को मेरे सुकून जो तेरे दर पे आया
                  बना दे बिगड़ी बात खाली जाए न सवाली 

शुक्रवार, 22 जनवरी 2016

चार मुक्तक



दिए है दर्द कई इस बेदर्द ज़माने ने 
झोली भरदी है अश्कों के खज़ानों ने 


जज़्ब किए है हर दर्द मुहब्बत के सीने में दफन 
क्यों कुरेदते हो कद्रदां बनकर वो सारे  जख्म 


जाने कब मिटेगा फासला अपना 
टूटेगा चुप्पी का सिलसिला अपना 
कसमसाती जिंदगी की कैद से 
छूटेगा पंछी बावरा पूछो सैयाद से 


न पूछो दास्ताँ इस जिंदगी की मेरे यारो 
कुछ गुज़र गई कुछ गुजर जायेगी यारो 
कठिन था उन लम्हों से गुज़र जाना 
गुज़र गया हूँ हर खतरों से अब यारो 

यह कौन आया

यह कौन आया कि

                कलियाँ चटक उठीं

यह कौन आया कि

                बिजली चमक उठी

यह कौन आया कि

              भंवरे गुनगुनाने लगे

यह कौन आया कि

            फूल मुस्कुराने लगे

यह कौन आया कि

           मौसमे बहार आ गई

यह कौन आया कि

          ख़ुशी की फुहार आ गई

यह कौन आया कि

           मस्ती सी छाने लगी

यह कौन आया कि

         कोयल भी गाने लगी

यह कौन आया कि

          दिल झूम गया

यह कौन आया कि

          पवन का झोंका आँचल चूम गया 

गुरुवार, 21 जनवरी 2016

सजन तुम बिन





कितनी सुहानी है यह साँझ की बेला
                 किन्तु है सूनी सूनी सजन तुम बिन

मीठे मीठे कोयल के सुर
                 पड़ गए फीके सजन तुम बिन

साँसों की गति मंद पड़ गई
               तीव्र न हुई सजन तुम  बिन 

पायल और वीणा  झंकार
               पड़ गई धीेमी सजन तुम बिन

मन मयूर हुआ बेचैन
             आये न चैन सजन तुम बिन

तुम ही तो मेरे खिवैया हो
               कैसे लगूँ पार सजन तुम बिन

तुमसे ही नाता जोड़ा है
             पर टूटे  दिल के तार सजन तुम बिन

वियोग



दूर  है नदी का किनारा 
जल है कितना गहरा 
नैया है मेरी टूटी हुई 
मांझी बिन पतवार बिना 

 फिर दिल  ने तुझे पुकारा 
पर तुम नहीं आये 
चाँद फिर निकल आया 
दिल देखकर जल उठा 

रो रोकर इस दिल ने सदा दी 
मस्त बहारो का मौसम बीता 
कलियाँ कुँवारी रह गई 
उनका यौवन कुम्लहा गया