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गुरुवार, 31 मार्च 2016

हमें मालूम न था


दिल की बस्ती लुट जायेगी
ऐसा तो हमें मालूम न था

                   दिल के हाथो मजबूर हुए हम
                   उल्फ़त की मौजो ने लूटा
                   आगाज़ तो हो ही गया था
                   अंजाम हमें मालूम न था था

मेरे आंसू और ये आहें
राहों में यूँ खो जाएंगे
कौन सुने फरियाद दिल की
ये राज़ हमें मालूम न था
@मीना गुलियानी


बुधवार, 30 मार्च 2016

वक्त कभी भी रुकता



है मौसम हँसता हँसता नहीं वक्त कभी भी रुकता
चलो सफर पे बढ़े चलो यह रास्ता कभी न रुकता

मस्ती की है बयार छाई , तन मन की सुधि गई बिसारी
झूमें है हर इक पौधा , खिल गई हर इक क्यारी
सूरज की लाली छाई, हर इक कली मुस्कुराई
कोयल भी देखो कूकी , वसन्त ऋतु ने ली अंगड़ाई

बदरी  भी देखो घिर आई , चपला दामिनी चमकी
लेकर के नई चित्रकारी ,मीनाकारी है अम्बर  की
हंसों की टोली आई, गीतों की गूंजी शहनाई
अम्बर ने अपनी मस्ती में गीत की तान सुनाई 

जल थल अम्बर है डोला , वक्त नहीं किसी का रुकता
चलो सफर पे बढ़े चलो , यह रास्ता कभी न रुकता
@मीना गुलियानी 

आज उजाला करदे


सबके दिलो में तू आज उजाला करदे
दूर दुनिया से नफरत का अँधेरा करदे

                   हर दिल में सदाकत की शमा रोशन हो
                   झूठ का शरारा भी हर दिल से दूर करदे

प्यार के फूल खिलें  जिससे महके ये फ़िज़ा
न रहे दिल में नफरत के लिए बाकी जगह

                   न हो कोई दुश्मन न किसी से वैर यहाँ
                   हर तरफ अमन  का ही रहे नामोनिशाँ

सबके दामन को खुशियों के गुलो से भरदे
न कभी आये खिज़ा ऐसा गुलिस्ताँ करदे
@मीना गुलियानी 

अपनी ही लगन में



आज तो मै उड़ती चलूँ मस्त पवन में
आज झूमूँ गाऊं अपनी ही लगन में

                  जिया झूमे चुनरिया लहराए
                 सर से पल पल सरकती जाए
                  छू लूँ बादलों को मै उड़के गगन में

मेरे संग संग चलती पुरवईया
मेरे गजरे की लेने को बलैया
मन मयूरा नाच उठा संग पवन में

                  ओढूँ तारो की झिलमिल चुनरिया
                  चंदा देखे तो  यूँ चमके बिजुरिया
                  आँख मिचौनी मै खेलूँ संग संग में
@मीना गुलियानी 

पायलिया छम छम गाने लगी



आई बरखा सुहानी मोरी पायलिया छम छम गाने लगी 
भीगी मोरी चुनरिया मै तो खुद ही सिमट सकुचाने लगी 

                 छेड़ो मुझको न कोई देखो रोको न कोई 
                 आज अपनी ही धुन में मै गाने लगी 

पड़ी ठंडी फुहारें भीगा तन मन  पुकारे 
कंपकंपाते लबों पे ये बूँदें सजाने लगी 

                  कैसा नशा है छाया प्यारा मौसम आया 
                  बगिया फूलो की खुशबु लुटाने लगी 
@मीना गुलियानी 

सोमवार, 28 मार्च 2016

बात नहीं होती है



कैसे कहदूँ मुलाक़ात नहीं होती है
रोज़ मिलते है मगर बात नहीं होती है

                  तुम देखा न करो आईना यूँ ही अक्सर
                  दिल का आ जाना बड़ी बात नहीं होती है

मुझसे मत पूछो क्या है मेरे दिल का हाल
दिन तो ढल जाता है पर रात नहीं होती है

                 सबसे हम  नज़रो को छिपाए फिरते है
                 कोई कहीं देखे न बरसात नहीं होती है

जब भी मिलते है और पूछते है हाल मेरा
इससे आगे तो कभी बात नहीं होती है
@मीना गुलियानी




ऐसा वादा कौन करेगा



कोई न दुःख में सांझी बनेगा
मन के इस सूने पनघट पर
आके कौन अब नीर भरेगा

                  सब है  अपने पराये बंदी
                  कोई किसी का नहीं है संगी
                  दुनिया है कितनी दोरंगी
                  मुक्त दुखों से कौन करेगा

कुछ पल के है सारे नाते
कुछ ही पलों के है ये वादे
जो टूटे न कभी उम्र भर
ऐसा वादा कौन करेगा
@मीना गुलियानी 

रविवार, 27 मार्च 2016

तुझे महसूस किया है


कैसे तुझसे कहूँ कि मैने  तुझे महसूस किया है 

तुम छिपे हो इन हवाओं में 
तुम छिपे हो इन लताओं में 
इन फूलों की खुशबु में महसूस किया है 

                   तुम्ही हो बादलों के गर्जन में 
                   तुम्हीं हो पायल की छमछम में 
                   इन भँवरो के गुंजन में महसूस किया है 

तुम ही इस सांझ और धूप में 
तुम ही इस रंग और रूप में 
साँसों के सरुर में  महसूस  किया है 

                   तुम्हीं छिपे हो गीत और संगीत में 
                   तुम्हीं छिपे हो सुर और प्रीत में 
                   धड़कनों के गीत में महसूस किया है 

तुम हो परिंदो की परवाज़ में 
तुम हो आस और विश्वास में 
धरती आकाश में महसूस किया है 
@मीना गुलियानी 

दिल चाहे यादों में डूब जाना



खुशियों का न ठिकाना,  दिल मेरा चाहे मुझसे ,  यादों में डूब जाना 


कैसे बताऊँ तुझको क्या मुझको हो गया है 
दिल मेरा था कभी जो अब तेरा हो गया है 
लगता नहीं ये तुझ बिन तुझको ही चाहे पाना 


                         तस्वीर तेरी अपने दिल में छिपाई हमने 
                         दुनिया को भूलकर ये हस्ती मिटाई हमने 
                         अब दर्द जी में उठता मुश्किल हुआ छिपाना 


दो घड़ी तो पास बैठो तुम पास भी तो आओ 
इतनी दूर होकर न मुझे तुम यूँ सताओ 
मेरी धड़कनों से सुन लो मेरे दिल का ये फ़साना 
@मीना गुलियानी 

शनिवार, 26 मार्च 2016

दिल उड़ा जाता है

तेरी तरफ जाने क्यों मेरा दिल उड़ा जाता है
बेवफा क्यों तू इतना मुझे अब सताता है

                    दूर रहकर भी मुझसे दूर होता नहीं
                    याद न करने पर भी याद आता है

कैसे दूर  करूँ अपनी यादों से तुझे
तू लिपटे साये सा चला आता है

                  मेरी हर खामोशी की सदा कैसे सुन लेता है
                  बिना आहट बिन बुलाये भी चला आता है

तेरा आना कभी नागवार न लगा मुझको
पता नहीं क्यों तू इतना दिल को भाता है
@मीना गुलियानी











अब मुस्कुराइये

दिल की बेताबियाँ न यूँ बढ़ाइये
है आपको कसम मेरी लौट आइये
दूर मुझसे इस तरह यूँ भी न जाइये
मेरा कहा मानकर अब मुस्कुराइये

                    धीरे धीरे आसमां झुकने लगा
                    धरती को झूमके छूने लगा
                    तारे देखो कर रहे सरगोशियाँ
                   चमक रही बादलों में बिजलियाँ
                   इन हवाओं की महक में झूम जाइए

फूलों पे भी केसा ये निखार है
हर तरफ बहार ही बहार है
झूम रही डाली भी गुलनार की
कर रही  मदहोश ये बयार भी
आज इन्हीं वादियों में गुनगुनाइए
@मीना गुलियानी 

सनम तू ही दिल में बसा



तुझे देखा है जबसे सनम तू ही दिल में  बसा
अब तेरे सिवा  कोई नहीं और कहूँ क्या

                    दिल में बसाके मैने तुझको रोज़ सज़दा कर  लिया
                    तू बता ये गुनाह क्या है जो कि मुझसे है हुआ
                    कैसे बताऊँ तुझसे कि मेरे दिल की यही है ख़ता

तेरे ही हाथों में मैने अपनी किस्मत सौप दी
तू बता इस दिल की तूने कौन सी रेखा लिखी
दिल मेरा तेरा हुआ और कुछ चाहे भी क्या
@मीना गुलियानी 

अखियाँ प्यासी रे


आ जाओ अब न तरसाओ अखियाँ प्यासी रे
कबसे तेरी राह निहारूँ छाई उदासी रे

                  प्रीतम कितनी दूर बसे हो
                   मन मंदिर में कर  लो बसेरा

दिल भी तो ये घर है तुम्हारा
इसमें ही डालो तुम डेरा

                 कबसे ये अखियाँ  देखे बिन तुमको
                  नीर बहाती रे


आ जाओ इक बार तो सजना
पूरा मेरा हो जाए ये सपना

                   चिन्ता मिटाओ जल्दी आओ
                   दिल को मेरे न तरसाओ

आ जाओ तो मिट  जाए
जन्मों की उदासी रे
@मीना  गुलियानी 

गुरुवार, 24 मार्च 2016

मेरे हमसफर


कभी धूप में कभी छाँव में 
कभी इन महकती फिजाओं में 
तुझे ढूंढती है मेरी नज़र 
मेरे हमसफर - मेरे हमसफर 

                        तू जहाँ पे है मै भी हूँ वहाँ 
                        तेरे होने ही से मेरा जहाँ 
                       मेरी आहटें तेरी धड़कनें 
                        ज़रा सुनले इन पे भी गौर कर 

मेरी हर ख़ुशी में सरूर है 
तू ही तो मेरा गरूर है 
तेरे साथ ही मै चली चलूँ 
चाहे जो भी हो तेरी रहगुज़र 

                     पिया तू अगर मेरे साथ हो 
                     तो न दिल मेरा यूँ उदास हो 
                     यूँ हाथों में तू थाम ले 
                     मुझे फिर रहे न कोई फ़िक्र 
@मीना गुलियानी 

बुधवार, 23 मार्च 2016

होली के रंग

रंगो से तो सब खेलते है 
                 हम खेलें आज बातों से 
देश में हो या विदेश में 
                 हम होली मनायें यादों से 
लाल गुलाब-बचपन की याद 
                नीला गुलाब -उसकी फरियाद
 हरा रंग -मेरा लड़कपन 
                पीला रंग - मेरी पहचान 
रंगों भरी यादों की लड़ी 
                होली के बहाने मुझे मिली 
रंग है तो जीने का मज़ा है 
                वरना  जीना तो इक सज़ा है 
रंगो से हमारा नाता है 
                जो साँसों को भी भाता  है 
इनका मेल खूबी की सौगात है 
               इनकी तो बस अपनी ही बात है 
जंगल भी टेसू से सज जाते है 
               अमलतास के बगीचे सुनहरे हो जाते है 
वनों में देखो नाचता मोर है 
                 मन बावरा फिरे बन चकोर है 
@मीना गुलियानी 

मंगलवार, 22 मार्च 2016

रहनुमाई न होती

अगर तेरी ये रहनुमाई न होती
मेरी जिंदगी मुस्कुराई न होती

                    नज़रों ने तेरी दिल पे ऐहसा किया है
                   हसीं उम्र भर का ये तोहफा दिया है
                   दुनिया से मेरी बगावत न होती
                   अगर तेरी नज़रों की इनायत न होती

मिली मुझको जन्नत साथ है तुम्हारा
तेरे बिना अब न जीना गंवारा
अगर आँख तुझसे मिलाई न होती
खुशियों की महफ़िल सजाई न होती

                   तेरे लिए है मुझको हर गम गंवारा
                   तुझसे ही चमका मेरा ये सितारा
                   किनारे पे किश्ती ये आई न होती
                   अगर तूने पतवार चलाई न होती
@मीना गुलियानी 

सोमवार, 21 मार्च 2016

वफाओं के दीपक तो जलते रहेंगे

वफाओं के दीपक तो जलते रहेंगे
कभी न बुझे ये कभी न बुझेंगे
ज़माने ने सारी ख़लिश हमको दे दी
अरमां ये दिलों के मचलते रहेंगे

                 कहीं भी रहे तू मुझे गम नहीं है
                जहाँ तू रहे मेरा दिल तो वहीं है
                तेरा प्यार  दिल से कभी कम न होगा
                है वादा किया जो कभी न टलेगा
                हवाओं से गम की गुज़रते रहेंगे

कहदो  ज़माने से अब न सताएँ
बहुत सह चुके अब न जी को जलाएँ
बहुत करली परवाह ज़माने की हमने
बहुत सह  लिए है सितम इसके हमने
न अब जिंदगी में कोई गम रहेंगे
@मीना  गुलियानी

छोडो मोरी बैंया


ओ मोरे सैयां छोडो मोरी बइयाँ छेड़ो न दिल की बात 
अब मोहे जाने दो 
पूछेंगी सखियाँ छेड़ेंगी सारी  सखियाँ कैसे बताऊँ जी की बात 
अब मोहे जाने दो 

                   प्रेम नगरिया कठिन डगरिया गाँव मेरा बड़ी दूर है 
                  थक गई मै तो चलते चलते पाँव हुए मजबूर है 
                   सैेया पूरी हुई न तेरी बात अब मोहे जाने दो 


दिल के अरमां रहे सुलगते सावन को तो बुलाओ 
पद जायेगी ठण्डी फुहारें मेघ बरस भी जाओ 
अब भीगेंगे हुई बरसात अब मोहे जाने दो 


                आई है ये रुत मस्तानी हुई कामना पूरी 
                पापी पपीहा पीहू पीहू बोले जाने क्या मजबूरी 
                जीवन भर का है साथ अब मोहे  जाने दो 
@मीना गुलियानी

रविवार, 20 मार्च 2016

भूले भटके तुम आ जाना


सपनों की इस भूल भुलैया में
तुम अधिक नहीं खो जाना
दूर अमराई में है मेरा गाँव
भूले भटके तुम आ जाना

                 यहाँ शीतल बयार चलती है
                  रुत नित नया रूप बदलती है
                  जुगनू से तारे टिमटिमाते यहाँ
                   भूले भटके तुम आ जाना

बादलों में चाँद जगमगाता है
सच कहूँ कितना मन को भाता है
हर शिकवों को तुम भूल जाना
भूले भटके तुम आ जाना

                 चंचल है  पथिक मन मेरा
                 है प्रेम का सागर गहरा
                 दिल चाहे मुझे भटकाना
                भूले भटके तुम आ जाना
@मीना गुलियानी 

करते है कितना प्यार


कैसे बताएँ हम तुम्हें करते है कितना प्यार 
इतना कि जितने तारे गगन में है बेशुमार 

                 तुम ही हो अब चैन मेरा दिल में बसे तुम 
                 तुम हो संगीत मेरा और तुम ही इसकी  धुन 
                 हर जर्रे जर्रे पर तुम्हारा नाम ही शुमार 

हमने तो दिल कुर्बान किया तेरी चाह में 
तू चाहे तो अपना इसे या दे  भुला दे हमें 
हमने तो कर दी है तुझपे जान भी निसार 

                मेरी धड़कनों में तुम बसे हो राग की तरह 
                 बजती है इक मधुर तान गान की तरह 
                हर बोल पर तुम्हारा ही होता है इख्तियार 
@मीना गुलियानी