यह ब्लॉग खोजें

गुरुवार, 26 मई 2016

चुपके चुपके चोरी चोरी

छेड़ दिया फिर मन वीणा का तार
किसी ने चुपके चुपके चोरी  चोरी

बात  अधूरी हो गई पूरी
 सारे सपने हुए सिन्दूरी
रात को फिर से सपने सुहाने
भोर आई है हम को जगाने -----------चुपके चुपके चोरी  चोरी

दिल की वीणा ने गीत है गाया
प्रीतम प्यारा आन मिलाया
बजने लगे फिर घुंघरू ऐसे
नृत्य की ताल पे छमछम जैसे ----------चुपके चुपके चोरी  चोरी

आंचल फैला और  लहराया
हो गई बेसुध कंचन काया
ऐसा मद है किसने पिलाया
दीवाना दिल उसने बनाया ----------------चुपके चुपके चोरी  चोरी
@मीना गुलियानी



कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें