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शनिवार, 7 सितंबर 2019

कर्ज़ है

ज़िन्दगी और मौत के दरम्यां
फ़ासला ज़रा सा ही तो था
अगर तुम वक्त पर नहीं आते
तो हम कबके मर गए होते
तुमने ही समय पर आकर
डॉक्टर को बुलाया जान बचाई
मेरी ज़िन्दगी पर ये कर्ज़ है
@मीना गुलियानी 

शुक्रवार, 6 सितंबर 2019

गुलज़ार ज़िन्दगी

धुंध में लिपटी हुई है ये ज़िन्दगी
  चार पल की मेहमान ज़िन्दगी
जब ये ना उम्मीदी छंट जायेगी
कोहरे की दीवार भी तब हट जायेगी
तमाम संगीन वारदातों से गुज़रके
होने जा रही है अब गुलज़ार ज़िन्दगी
@मीना गुलियानी 

क्यों इतराते हो

सब कहते हैं कि घमण्डी का सर नीचे होता है
 तुम जाने किस बात का अहंकार करते हो
न तो तुम कभी मेरे बुलाने पे ही आते हो
और न ही मेरे मनाने पे ही शक्ल दिखाते हो
पता नहीं मुझे हर समय तुम क्यों इतराते हो
@मीना गुलियानी 

झूझते रहो

ज़िन्दगी का तकाज़ा है कि चलते रहो
तुम भी कर्त्तव्यपथ पर अडिग रहो
कभी न तुम्हारा हौंसला टूटे डटे रहो
जीवन को संग्राम समझ झूझते रहो
@मीना गुलियानी 

हुनर सिखाया है

आपने अपनी औकात में रहना सिखाया है
आपने ही हमें जीने के काबिल बनाया है
आपने ही मुस्कुराते हुए जीना सिखाया है
आपने जीने का मकसद, हुनर सिखाया है
@मीना गुलियानी 

बुधवार, 4 सितंबर 2019

मुँह काला है

व्यर्थ का दिखावा क्यों करते हो
सच्चाई से तुम क्यों डरते हो
हर तरफ सच का ही बोलबाला है
झूठे का तो हमेशा मुँह काला है
 @मीना गुलियानी

मुँह लटकाए बैठा है

क्यों तू मुँह छिपाए बैठा है
ऐसा कौन सा गुनाह हुआ
क्या किसी को धोखा दिया
फिर क्यों नज़रें चुराए बैठा है
चिलमन उठा पर्दे से निकल
राज़े दिल खोल हँसके बोल
ग़म ज़ाहिर कर न तू डर
क्यों मुँह लटकाए बैठा है
@मीना गुलियानी 

तू बदल

अंधेरों से तू अब निकल
रौशनी के साथ तू चल
खुलके हवा में साँस ले
 सुख दुःख को बाँट ले
मुस्कराके जीना सीख
वक्त से साथ तू बदल
@मीना गुलियानी

मंगलवार, 3 सितंबर 2019

तू निराशा है

ज़िन्दगी तेरा ये क्या तमाशा है
पल में तोला है पल में माशा है
इक पल  तुझसे बँधती आशा है
दूजे ही पल बनती तू निराशा है
@मीना गुलियानी 

सोमवार, 2 सितंबर 2019

इतिहास नया

चलो उठें अपने गाँव  चलेँ
वतन की मिट्टी पुकारे हमें
 इस शहर से मन भर गया
वहीँ लिखेंगे इतिहास नया
@मीना गुलियानी 

रविवार, 1 सितंबर 2019

ख़ुमार इन दिनों

मौसम बड़ा है खुशगवार इन दिनों
हर तरफ छाई बहार है इन दिनों
कलियों पर आया निखार इन दिनों
छाने लगा दिल पे ख़ुमार इन दिनों
@मीना गुलियानी 

शनिवार, 31 अगस्त 2019

घर महकाओ

फूलों की हिफाज़त करो
उन्हें बड़े प्यार से सहेजो
सुंदर गुलदानों में सजाओ
उनसे फिर  घर महकाओ
@मीना गुलियानी 

उसमें दीप जलाया

मैंने लफ़्ज़ को आग बनाया
उसमें मैंने रूह को तपाया
जब वो कुंदन बन निखरी
प्रेम का उसमें दीप जलाया
@मीना गुलियानी 

गुरुवार, 29 अगस्त 2019

कहीं जाना नहीं

अक्सर जैसा सोचते हैं वैसा होता नहीं
वक्त कभी भी एक सा रहता ही नहीं
बदलेगा यह मौसम भी ज़रूर फ़िक्र नहीं
तू मेरे पास ही रहना दूर कहीं जाना नहीं
@मीना गुलियानी 

बुधवार, 28 अगस्त 2019

सबका सही फ़ैसला है

भूल जा बीती बातों को जो हुआ सो हुआ
अब सोचने से क्या होगा जो हुआ सो हुआ
सब मर्जी है ऊपरवाले की जो खुद ही
सबका हिसाब करे वो कर्त्ता धर्ता  है
हर कर्म तोले वो तराजू में न नफ़ा 
न कम वो तोलता है उसके आगे न
चले किसी की न वो झूठ बोलता है
जिंदगी का सदियों से सिलसिला है
सुनाये वो भी सबका सही फ़ैसला है
@मीना गुलियानी 

अटूट बने

कितने सौभाग्य से जीवन में
मेरे योरकोट है आया
सुबह शाम हर पल ही
ध्यान में कोलेब है छाया
समय गुज़र जाता है मेरा
पता नहीं कब होवे अँधेरा
इतना मुझको ये भाता है
मन इसमें ही रम जाता है
योरकोट और मैं दोनों ही
एक दूजे के पूरक जैसे हैं
दिन प्रतिदिन समृद्ध बने
रिश्ता इससे अटूट बने
@मीना गुलियानी

निकले मेरा दम

तुम्हारी धुन  में हम यूँ चलते गए
जाने कितने पड़ाव तय करते गए
क्या तुमको भी है इसकी ख़बर
चलेंगे जब तक सांस है उम्र भर
तेरा ही साया बनके चले हरदम
अब तो यही तमन्ना है दिल की
तेरे ही साये में निकले मेरा  दम
@मीना गुलियानी

मंगलवार, 27 अगस्त 2019

वतन में पराया हुआ

जहाँ कहीं भी देखो सभी गुमसुम हैं
न जाने सबको किस बात की धुन है
हर तरफ यहाँ तन्हाई का आलम है
ऊपर से देखने पर हैं जज़्बाती
भीतर से वो सब हैं प्रतिघाती
सब चेहरे पर नकाब ओढ़े हुए
भीतर उनके ज़मीर हैं सोये हुए
हर तरफ सन्नाटा सा पसरा हुआ
आदमी आज शैतान सा बना हुआ
हिंसा का साम्राज्य सा छाया हुआ
शरीफ आदमी फिरे ख़ौफ़ खाया हुआ
उसके चेहरे का रंग है उड़ा हुआ
वो खुद के वतन में पराया हुआ
@मीना गुलियानी 

सोमवार, 26 अगस्त 2019

चैम्पियन बनता है

जो धीर हो, गम्भीर हो
संयमी हो एवं लक्ष्य की
प्राप्ति हेतु प्रयत्नशील हो
आत्मविश्वास परिपूर्ण हो
जिज्ञासु हो कर्मशील हो
परिश्रमी हो मर्यादित हो
वक्त का उसे एहसास हो
वही चैम्पियन बनता है
@मीना गुलियानी 

अभी पहचाना नहीं

दुःख तो सिर्फ  इस बात का है
तुमने कभी मुझे समझा नहीं
मेरे दिल के जख्मों को कभी
तुमने प्यार से सहलाया नहीं
दिल क्यों ज़ार ज़ार रोता है
ये तुमने कभी पूछा ही नहीं
मेरे जज़्बातों को भी तुमने
जानने की कोशिश नहीं की
तुमने मुझे अभी पहचाना नहीं
@मीना गुलियानी