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शनिवार, 30 नवंबर 2019

ये वो दौर है

ये वो दौर है जहाँ जीने के लिए
खुद को भी मिटाना पड़ता है
हर ज़ख़्म अपना भुलाकर हमें
सबके लिए मुस्कुराना पड़ता है
@मीना गुलियानी 

एक छलावा मात्र है

कल केवल एक छलावा मात्र है
इसका तुम विश्वास मत करना
हमेशा आज पर यकीन करना
कल की चिंता तुम मत करना
कल कभी भी नहीं आता है
बीता हुआ दिन लौट न पाता है
जो कर्म नहीं करता पछताता है
@मीना गुलियानी 

लड़की पूछ रही है

लड़की पूछ रही है हम सबसे
क्या सपने पूरे होंगे हम सबके
क्या हम भी शिक्षा ले पायेंगे 
भैया जैसे क्या हम स्कूल जायेंगे
लिख पढ़कर कुछ हम बन पायेंगे
@मीना गुलियानी

ऐसे कहाँ तक निभाएं

तुम ही बताओ ऐसे कहाँ तक निभाएं
इतना बड़ा दिल हम कहाँ से लायें
ऐसे हालात में कैसे जिंदगी बिताएं
तुमसे बिछुड़कर जिन्दा रह न पाएं
कोई तो जाके रूठे पिया को मनाये
मेरे सुनहले दिनों को लौटा के लाये
@मीना गुलियानी 

तुम्हारे बाद

तुम्हारे बाद आखिर मेरा क्या बचा है
मेरी ज़िन्दगी की शुरुआत तुमसे है
इसका आरम्भ और अंत तुमसे ही है
इसके अलावा सोचा नहीं चाहा नहीं 
@मीना गुलियानी 

वो सुबह कब आएगी

जाने वो सुबह कब आएगी
जब एक औरत अबला न कहलायेगी
सामना वो करेगी भूखे भेड़ियों का
हवस के पुजारियों का कब वो
अपनी अस्मत इनसे बचा पायेगी
अब वक्त वो आ चुका जब वो
खुद ही दुर्गा बन तलवार उठायेगी
 @मीना गुलियानी 

सफ़र पर चल तो पड़े

अब अपने सफ़र पर चल तो पड़े हैं हम

किस्मत है अपनी ख़ुशी मिले या ग़म
@मीना गुलियानी 

बुधवार, 27 नवंबर 2019

सोचा न था

सोचा न था कभी दिन ऐसे भी आयेंगे
रोती रहेँगी आँखें हँसना भूल जायेंगे
सोचा था तुम्हें पाकर ग़म भूल जायेंगे
पता न था खोके आँसुओं में डूब जायेंगे
@मीना गुलियानी 

मंगलवार, 26 नवंबर 2019

कसूर किसका था

इतनी जदोजहद के बाद हम
सोचते हैं कि कसूर किसका था
न तुम्हारा था न मेरा कसूर था
वो तो निगाहों का ही था
जो चुपके से आपस में मिली
धीरे धीरे उनमें बात बढ़ी
फिर कुछ सोच न समझा
न कुछ देखा न भाला
देखते देखते प्यार कर डाला
यही उनका मासूम कसूर था
@मीना गुलियानी 

लिखते रहेंगे दिल की कहानी

लिखते रहेंगे दिल की कहानी
है जो सदियों से भी पुरानी
एक ने कही दूजे ने मानी
तेरी मेरी यही प्रेम कहानी
बरसों पहले की थी नादानी
कीमत अब तक पड़ी चुकानी
@मीना गुलियानी 

सोमवार, 25 नवंबर 2019

किरदार में ढलना पड़ेगा

यह ज़िन्दगी एक रंगमंच है
सभी उसकी कठपुतलियाँ हैं
सबको अपना किरदार निभाना है
अच्छे अभिनय के लिए हमको
उस किरदार में ढलना पड़ेगा
तभी उसको निभा पाएंगे
फिर दुनिया भी याद करेगी
कितना अच्छा किरदार निभाया
अच्छी ज़िन्दगी जी और फिर
वो इस संसार से विदा हुआ
अपने दुःख दर्द को भूलकर
खुशियों को आत्मसात करना है
ऐसे किरदार में ढलना पड़ेगा
@मीना गुलियानी 

ढूँढने निकले हैं


 ढूँढने निकले हैं खुशियों को
 जो कहीं खो गई हैं
 इन वीरान सी राहों में
 नीले आसमान के नीचे
 पथरीली चट्टानों में कहीं
 वो जाके सो गई हैं
 हमें उन्हें जगाना ही होगा
खोया ज़माना लाना ही होगा
ताकि हम फिर से वो पल
 पा सकें और मुस्कुरा सकें
 उन लम्हों को सहेजकर
 रखेंगे कहीं खोने न देंगे
 अपने से जुदा होने न देंगे
@मीना गुलियानी



रविवार, 24 नवंबर 2019

ये रात है कि

ये रात है कि काटे कटती नहीं
बदली ये ग़मों की छंटती नहीं
ज़िन्दगी की रफ़्तार घटती नहीं
आरजू की फ़ेहरिस्त घटती नहीं
साँसों की परवाज़ घटती नहीं
आँसुओं की बौछार थमती नहीं
तेरे बिन ज़िन्दगी कटती नहीं
@मीना गुलियानी 

ये भी होना था

ये भी होना था
ऐ मेरी ज़िन्दगी
तुझे यूँ खोना था
नहीं था बस में मेरे
यूँ ही रोना था
मैं था पागल परवाना
बेखुद यूँ होना था
@मीना गुलियानी 

कोमल धूप का स्पर्श मिला

कोमल धूप का स्पर्श मिला जब
धरती स्वर्ण सी जगमगा उठी
धानी चुनरिया सरसों की बाली
पहनकर धरा भी इठला उठी
माथे पे सिन्दूरी आभा मुकुट
सोहे धरा के पायल छनका उठी
चमके धान की फसल कण कण
शबनम से मोती दमका उठी
शोभा वर्णन करा न जाए वो
हीरे मोती भी अब दमका उठी
@मीना गुलियानी 

शनिवार, 23 नवंबर 2019

आँखों का ही भ्रम था

आँखों का ही भ्रम था
तू मुझमें बहुत कम था
 यकीं दिल को नहीं होता
शायद ये मेरा वहम था 
मेरी वफ़ा में कुछ कमी न थी
तेरे इरादों में कोई ख़म था
ज़ज्बात हमारे जग ज़ाहिर हैं
तेरी साजिशों का मुझे ग़म था
@मीना गुलियानी 

शुक्रवार, 22 नवंबर 2019

शाम से दिल जल रहा है

शाम  से दिल जल रहा है
सुबह न जाने क्या होगा
धू धू करके आग बढ़ी है
हश्र इसका जाने क्या होगा
कोई तो आके इसको बुझाये
भड़क उठेगी तो क्या होगा
दिल के अरमां राख हुए हैं
कुरेदने से कुछ न मिलेगा
@मीना गुलियानी

हौंसला तू बनाये रख

सोच सदा तू आगे की रख
अन्तर्मन में गगन को छू ले
परचम तू लहराए रख
चाहे तूफ़ाँ रास्ता तेरा रोकें
कदम तू बढ़ाये रख
तेरा नाम  हो जग में ऊँचा
अलख दिल में जगाये रख
कामयाबी तेरे पग चूमे
हौंसला तू बनाये रख
@मीना गुलियानी

गुरुवार, 21 नवंबर 2019

देखा ही तो था तुमको

चाहो तो सज़ा दे दो
मासूम गुनाहों की
देखा ही तो था तुमको
क्या और किया हमने

उस हुस्न मुजस्सम पर
कैसे न नज़र उठती
जब चाहते मंज़र में
उम्र बिता दी हमने

इजहारे बेबसी का
करते ही भला कैसे
दिल में तो बहुत चाहा
कहने न दिया गम ने
@मीना गुलियानी 

सपनों में मुस्कुराओगे

दिल में एहसास है बीते हुए लम्हों का
 इक दर्द सा उठता है दिल से जख्मों का
गुज़रा पल कैसे भुलाऊँ तुम बताओ मुझको
भूले से ही सही एक आवाज़ तो दे दो मुझको
लौटकर पास मेरे तुम यूँ ही चले आओगे
क्यों ऐसा लगे सपनों में मुस्कुराओगे
@मीना गुलियानी