कल केवल एक छलावा मात्र है
इसका तुम विश्वास मत करना
हमेशा आज पर यकीन करना
कल की चिंता तुम मत करना
कल कभी भी नहीं आता है
बीता हुआ दिन लौट न पाता है
जो कर्म नहीं करता पछताता है
@मीना गुलियानी
लड़की पूछ रही है हम सबसे
क्या सपने पूरे होंगे हम सबके
क्या हम भी शिक्षा ले पायेंगे
भैया जैसे क्या हम स्कूल जायेंगे
लिख पढ़कर कुछ हम बन पायेंगे
@मीना गुलियानी
तुम ही बताओ ऐसे कहाँ तक निभाएं
इतना बड़ा दिल हम कहाँ से लायें
ऐसे हालात में कैसे जिंदगी बिताएं
तुमसे बिछुड़कर जिन्दा रह न पाएं
कोई तो जाके रूठे पिया को मनाये
मेरे सुनहले दिनों को लौटा के लाये
@मीना गुलियानी
जाने वो सुबह कब आएगी
जब एक औरत अबला न कहलायेगी
सामना वो करेगी भूखे भेड़ियों का
हवस के पुजारियों का कब वो
अपनी अस्मत इनसे बचा पायेगी
अब वक्त वो आ चुका जब वो
खुद ही दुर्गा बन तलवार उठायेगी
@मीना गुलियानी
सोचा न था कभी दिन ऐसे भी आयेंगे
रोती रहेँगी आँखें हँसना भूल जायेंगे
सोचा था तुम्हें पाकर ग़म भूल जायेंगे
पता न था खोके आँसुओं में डूब जायेंगे
@मीना गुलियानी
इतनी जदोजहद के बाद हम
सोचते हैं कि कसूर किसका था
न तुम्हारा था न मेरा कसूर था
वो तो निगाहों का ही था
जो चुपके से आपस में मिली
धीरे धीरे उनमें बात बढ़ी
फिर कुछ सोच न समझा
न कुछ देखा न भाला
देखते देखते प्यार कर डाला
यही उनका मासूम कसूर था
@मीना गुलियानी
लिखते रहेंगे दिल की कहानी
है जो सदियों से भी पुरानी
एक ने कही दूजे ने मानी
तेरी मेरी यही प्रेम कहानी
बरसों पहले की थी नादानी
कीमत अब तक पड़ी चुकानी
@मीना गुलियानी
यह ज़िन्दगी एक रंगमंच है
सभी उसकी कठपुतलियाँ हैं
सबको अपना किरदार निभाना है
अच्छे अभिनय के लिए हमको
उस किरदार में ढलना पड़ेगा
तभी उसको निभा पाएंगे
फिर दुनिया भी याद करेगी
कितना अच्छा किरदार निभाया
अच्छी ज़िन्दगी जी और फिर
वो इस संसार से विदा हुआ
अपने दुःख दर्द को भूलकर
खुशियों को आत्मसात करना है
ऐसे किरदार में ढलना पड़ेगा
@मीना गुलियानी
ढूँढने निकले हैं खुशियों को
जो कहीं खो गई हैं
इन वीरान सी राहों में
नीले आसमान के नीचे
पथरीली चट्टानों में कहीं
वो जाके सो गई हैं
हमें उन्हें जगाना ही होगा
खोया ज़माना लाना ही होगा
ताकि हम फिर से वो पल
पा सकें और मुस्कुरा सकें
उन लम्हों को सहेजकर
रखेंगे कहीं खोने न देंगे
अपने से जुदा होने न देंगे
@मीना गुलियानी
ये रात है कि काटे कटती नहीं
बदली ये ग़मों की छंटती नहीं
ज़िन्दगी की रफ़्तार घटती नहीं
आरजू की फ़ेहरिस्त घटती नहीं
साँसों की परवाज़ घटती नहीं
आँसुओं की बौछार थमती नहीं
तेरे बिन ज़िन्दगी कटती नहीं
@मीना गुलियानी
आँखों का ही भ्रम था
तू मुझमें बहुत कम था
यकीं दिल को नहीं होता
शायद ये मेरा वहम था
मेरी वफ़ा में कुछ कमी न थी
तेरे इरादों में कोई ख़म था
ज़ज्बात हमारे जग ज़ाहिर हैं
तेरी साजिशों का मुझे ग़म था
@मीना गुलियानी
शाम से दिल जल रहा है
सुबह न जाने क्या होगा
धू धू करके आग बढ़ी है
हश्र इसका जाने क्या होगा
कोई तो आके इसको बुझाये
भड़क उठेगी तो क्या होगा
दिल के अरमां राख हुए हैं
कुरेदने से कुछ न मिलेगा
@मीना गुलियानी
सोच सदा तू आगे की रख
अन्तर्मन में गगन को छू ले
परचम तू लहराए रख
चाहे तूफ़ाँ रास्ता तेरा रोकें
कदम तू बढ़ाये रख
तेरा नाम हो जग में ऊँचा
अलख दिल में जगाये रख
कामयाबी तेरे पग चूमे
हौंसला तू बनाये रख
@मीना गुलियानी
दिल में एहसास है बीते हुए लम्हों का
इक दर्द सा उठता है दिल से जख्मों का
गुज़रा पल कैसे भुलाऊँ तुम बताओ मुझको
भूले से ही सही एक आवाज़ तो दे दो मुझको
लौटकर पास मेरे तुम यूँ ही चले आओगे
क्यों ऐसा लगे सपनों में मुस्कुराओगे
@मीना गुलियानी