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सोमवार, 2 अप्रैल 2018

तुम ही मेरे प्राण आधारा

मैं तो माटी का दिया हूँ
तुम ही इसकी बाती हो
साँसे मेरी तब ही चलेंगी
जब तक दिया और बाती है
बिन बाती के मोल नहीं कुछ
बाती से ही दीप हो रोशन
ऐसे ही तुम जीवन को मेरे
अपने प्रेम से करते रोशन
मन मेरा इक अँधा कुँआ है
तुमसे ही फैला उजियारा
तुम ही तो जीवन धन मेरे
तुम ही मेरे प्राण आधारा
@मीना गुलियानी 

रविवार, 1 अप्रैल 2018

मुझको निशानी दे गया

कोई ऐसे गया तन्हा मुझे छोड़कर
कुछ यादें सुहानी मुझे वो दे गया

पीछे छोड़े हैं उसने अधूरे से ग़म
साथ यादें न होतीं तो मर जाते हम
चन्द साँसें वो साथ हमारी ले गया

बीते लम्हों में दिखती कहानी उसकी
गुज़रे पलों में बिखरी हैं यादें उसकी
जाते जाते वो आँखों में पानी दे गया

फिर वो आया तो जाने न देंगे उसे
इन पलकों में बंद कर लेंगे उसे
प्रीत अपनी मुझको निशानी दे गया
@मीना गुलियानी 

शनिवार, 31 मार्च 2018

लक्ष्य बन चुका है

कभी कभी ये सारा जहाँ
मुझे तुच्छ जान पड़ता है
मुझे लगता है कि मैं किसी
महाशून्य में खो गई हूँ
मैं खुद को जानना चाहती हूँ
कि मैं कौन हूँ ? क्या हूँ ?
क्या है मेरा वर्चस्व ,अस्तित्व
अपने आप को पाना चाहती हूँ
खुद को मिटाकर मैं
उस शून्य से खुद को मैं
उबारना चाहती हूँ
अब इस अन्धकार को
भेदकर बाहर आना चाहती हूँ
इस गहन यंत्रणा को
मैंने बहुत झेला है
पर अब और नहीं
अब मुक्ति पाना ही
मेरा लक्ष्य बन चुका  है
@मीना गुलियानी

अल्हड़पन मासूमियत को

ऐ वक्त काश तुम लौट आओ
मुझे बताओ ज़रा मैं अपना
खुशहाली भरा जीवन कैसे लाऊँ
इस कंक्रीट भरे जंगल सरीखे
जीवन से कैसे मैं निज़ात पाऊँ
कैसे बचाऊँ खुद को मैं इस
दुनिया में ईर्ष्या ,द्वेष ,नफरत से
कैसे बचाऊँ मैं इंसानियत को
जब हावी हो रही हैवानियत
कैसे भरूँ दिल के जख्मों को
जो हर समय टीस देते हैं
कैसे करूँ दूर ग़म के अंधेरों को
ऐ वक्त काश तुम्हीं लौटा पाते
मेरी हसरतों भरी सुबह शामों को
मेरा अल्हड़पन मासूमियत को
@मीना गुलियानी 

गुरुवार, 29 मार्च 2018

दुनिया में सिमट जाओ

जब सुहानी भोर दस्तक देती है
तुम्हारी आँखे अधखुली होती हैं
 नर्म अंगुलियाँ मेरी हथेली को
छूकर मेरी  धड़कनें बढ़ा देती हैं

तमाम यादें फिर से उभर आती हैं
बीते पलों की याद दिलाती हैं
दुनिया का वजूद  हम भूल जाते हैं
अपनी यादों का मेला सजाते हैं

जी चाहता है तुम मेरे पास बैठो
चुपचाप मुस्कुराते हुए मुझे निहारो
दिल की संवेदना मुझ पर उढ़ेलो
 ख्यालों की दुनिया में सिमट जाओ
@मीना गुलियानी 

बुधवार, 28 मार्च 2018

कड़वा सच है

मैं एक पानी की बूँद हूँ
कुछ हवा भी तूफ़ान उठाती है
एक प्रलय ,ज्वारभाटा सा
मेरे अन्तर में उभरता है
हर कोई जिसे नहीं समझता
कभी शबनम तो कभी शोले
मेरे अन्तर में धधकते हैं
हर लम्हा मेरा रूप
बदलता ही रहता है
रात दिन एक प्रलय सा
तूफ़ान उमड़ता है
वक्त ने मुझे ऐसे मोड़ पे
लाकर खड़ा कर दिया
कितना कोहराम मचता है
पर सुनता ही कौन है
कभी मेरे अन्तर में
झरना बहा करता था
आज वो एक रेगिस्तान
बन चुका है
यह सब वक्त की
विडम्बना , कड़वा सच है
@मीना गुलियानी 

जिसे नहीं चाहती खोना

मैं तो हँसना ही जानूँ नहीं जानती हूँ मैं रोना
मुझको भाता है हँसना न भाता मुझको रोना

कितनी  पीड़ाएँ झेली पर तनिक क्षोभ नहीं है
हर चिंता क्रीड़ा करती मुझमें  भूल गई हूँ रोना

जीवन को ऐसा ढाला तन मन को बदला मैंने
सुख का सागर लहराए दुःख का उठा बिछौना

अब भरा है मेरा तन मन उत्साह और उमंग से
है प्रेम से अब आलोकित मेरे मन का हर कोना

मेरे जीवन में निराशा कैसे घेरेगी अब मुझको
अब धैर्य है मेरा साथी जिसे नहीं चाहती खोना
@मीना गुलियानी 

मंगलवार, 27 मार्च 2018

गगन की ओर बढ़ी जा रही है

प्रकृति की मनोरम छटा लुभा रही है
कहीं ऊँचे पर्वत तो कहीं खलिहान
कहीं गुलिस्तान तो  कहीं  रेगिस्तान
धरती की धानी चुनरी लहरा रही है

नदिया की कल कल ध्वनि आ रही है
एक मधुर संगीत की लय भा रही है
बहते झरने धरा से कुछ कह रहे हैं
चंद्रकिरणें पत्तों से छनके आ रही हैं

बादल भी उमड़ घुमड़कर छाने लगे हैं
गगन के तारे भी चमक दिखाने लगे हैं
धीमे से पुरवइया कुछ गुनगुना रही है
सुनके धरा भी जिसे सकुचा रही है

मन का मयूरा देखो कैसे इतरा रहा है
पपीहा भी पीहू पीहू की रट लगा रहा है
मधुर मिलन की नैनो में प्यास लिए
धरती गगन की ओर बढ़ी जा रही है
@मीना गुलियानी



सोमवार, 26 मार्च 2018

बात यूँ सताने की

उनको आदत है दिल दुखाने की
हमको आदत है फ़रेब खाने की

जाने क्यों रूठके यूँ बैठ गए
राज़ न खोला छिपाके बैठ गए
उनको आदत है रूठ जाने की

मिन्नतें खुशामद गवारा न तुझे
मनाऊँ कैसे तू ही बता दे मुझे
बिना मनाए लौटके न जाने की

ख़ता नहीं है फिर भी मुझे माफ़ करो
मुस्कुराके अपने दिल को साफ़ करो
मान जाओ न करो बात यूँ सताने की
@मीना गुलियानी 

रविवार, 25 मार्च 2018

तेरी याद

हर रोज़ सुबह की धूप
खिड़की के झरोखों से
छनकर मुझ तक आती है
फूलों और पत्तों पर
चमक अपनी लुटाती है
मलयानिल के झोंके भी
सुरभि ,मकरंद लाते हैं
उनकी महक जादू जगाती है
हवा में जब तुम्हारी ज़ुल्फ़
यूँ ही लहराती है
लगता है कोई बदली
घुमड़कर छा  जाती है
साँसों में इक सिहरन
सी दौड़ जाती है
धड़कन मेरी थम जाती है
तेरी पायल की रुनझुन
मधुर गीत सुनाती है
दिल पे बिजली सी
कौंध कौंध जाती है
शाम  होते ही  तेरी याद
मुझ तक दबे पाँव
रोज़ चुपचाप चली आती  है
दिल में हलचल मचाती है
नई पुरानी यादें दोहराती है
जब मैं थक जाता हूँ
अपनी आग़ोश में सुलाती है
@मीना गुलियानी

शनिवार, 24 मार्च 2018

एहसास

तुम मेरे पास नहीं हो
फिर भी तेरे  पास  होने का
एहसास मुझे होता है
हर पल तुम्हारी यादोँ का
मेला सा लगा होता है
हर वो लम्हाा  मेरे लिए
बहुत ही ख़ास होता है
तुम्हारी शरारतें वो बातें
सब दिल के पर्दे में
उतर सी आती हैं
दिल की धड़कनों को
यूँ ही वो बढ़ाती हैं
तेरे साये का अक्स
अक्सर ही साथ होता है
दिल के आईने में तेरा
चेहरा छिपा होता है
तुम हमेशा यूँ ही मुझसे
लुकाछिपी खेला करते हो
कभी हँसाते कभी यूँ ही
मुझे रुलाते और मनाते हो
मेरे सपनो में गुनगुनाते हो
मेरी उदासी दूर भगाते हो
अपनी कमी का एहसास
कभी  न होने देते मुझे 
मेरी कल्पना में समाए जाते हो
@मीना गुलियानी


शुक्रवार, 23 मार्च 2018

माता की भेंट -हृदय में जगाओ प्रीत

अब देर न कर हे माँ तुझे तेरे भक्त बुलाते हैं
आके विनती ज़रा सुनलो तेरे बिन चैन न पाते हैं

बरसे नयन मेरा तरसे है मन
 ऐ मैया तू दर्श दिखा जा
तेरे दर्श बिन तड़पे है मन
मेरी मैया तू जल्दी से आ जा
ये जीवन न जाए बीत-------------तुझे------

माता मेरी जगदाता तू ही
अब तो मैया जी दर्श दिखाओ
नैया भंवर में डोले मेरी
आके मैया जी पार लगाओ
मेरी मैया मिटाओ भव भीत ------ --तुझे-----

काम क्रोध मद लोभ मोह ने
मैया जी मुझको है घेरा
आके बचाओ जान मेरी
ये चौरासी वाला है फेरा
हृदय में जगाओ प्रीत ------------------तुझे-----
@मीना गुलियानी




वो लम्हा मेरा होता है

हर आहट पे तेरे आने का गुमा होता है
दिल के दरवाज़े पे खटका तेरा होता है

पहरों बीत जाते हैं तेरी यादों में
हर लम्हे में तजुर्बा नया होता है

तुमको फुरसत नहीं मिलती आने की
हम पे इस ज़माने का पहरा होता है

दिखाएँ जख्म तुम्हें क्या उल्फत के
क्या बताएँ दिल में दर्द कहाँ होता है

हम तो तेरी चौखट पे सजदा करते हैं
बड़ा पोशीदा वो लम्हा मेरा होता है
@मीना गुलियानी 

माता की भेंट -सब दास्तां बता दे

तेरे द्वार कैसे आऊँ मैया ज़रा बता दे
मँझधार में फंसी हूँ तू ही रास्ता बता दे

घेरे हुए हैं मुझको रंगीन वासनाएँ
मन का नहीं भरोसा पग पग पे जो दगा दे


मुझमें वो बल कहाँ है जो तुझे यहाँ बुला लूँ
निर्बल को दे सहारा, भव पार तू लगा दे

लाखों उबर गए हैं तेरे नाम के सहारे
सौलह भुजाओं वाली मुझको भी आसरा दे

कैसे सुनाऊँ तुमको, अपनी करुण कहानी
शायद ये मेरे आंसू ,सब दास्तां बता दे
@मीना गुलियानी



गुरुवार, 22 मार्च 2018

वफ़ा में मेरी कमी नहीं है

लबों की बातें हम सुन न पाए
नज़र भी उनकी झुकी हुई है
कहीं थीं तुमने हँसते हँसते
बातें वहीं पर रुकी हुईं हैं

जवाब मांगो तो क्या कहूँ मैं
कैसे तुम्हारा  जिक्र करूँ मैं
ह्या से चेहरा उठा न पाओ
नज़र तुम्हारी झुकी हुई है

बताओ दिल में क्या है तुम्हारे
खुले हुए हैं गेसू तुम्हारे
आँखों में कितना गहरा तूफां
बरसात जैसे बनी हुई है

जो न कहोगे और चुप रहोगे
करेंगे तेरा इंतज़ार फिर भी
सुनेंगे तेरी तो हम सदायें
वफ़ा में मेरी कमी नहीं है
@मीना गुलियानी 

बुधवार, 21 मार्च 2018

माता की भेंट - भक्तों का करती है उद्धार

माँ जगदम्बे जी के द्वार जो भी करता है पुकार
आस पुजाये, माँ अम्बे , सुन लेती है पुकार

माँ जगदम्बे की शान निराली
लौटा न खाली कोई यहाँ से सवाली
सुनके करुणा भरी पुकार ,शेरों पे होके सवार
आके अम्बा हर लेती सबके दुखड़े अपार

जो भी मैया जी की आस लगाए
मैया जी उसकी हर आस पुजाये
माँ की महिमा अपरम्पार ,प्रेम की शीतल चले फुहार
मैया अम्बे  जगदम्बे ,कर देती भव से पार

राजा हो या कोई भिखारी
सब हैं बराबर यहाँ नरनारी
माँ के भरे हुए भंडार ,लेवे नाम जो होवे  पार 
माँ जगदम्बे जी भक्तों का करती है उद्धार
@मीना गुलियानी


मंगलवार, 20 मार्च 2018

माता की भेंट -अज्ञान को मिटाओ

हे अम्बिके भवानी दर्शन मुझे दिखाओ
अन्धकार ने है घेरा ज्योति मुझे दिखाओ

मैया तेरे ही दर का मुझको तो इक सहारा
नैया भँवर में डोले सूझे नहीं किनारा
मँझधार से निकालो नैया मेरी बचाओ

लाखों को तूने तारा भव पार है उतारा
बतलाओ मेरी माता मुझको है क्यों बिसारा
बच्चा तेरा हूँ मैया मुझको गले लगाओ

सूनी हैं मेरी राहें आँसू भरी निगाहें
बोझिल हैं मेरी साँसे दुःख कैसे सुनाएं
गम आज सारे मेरे मैया तुम्हीं मिटाओ

तेरा नाम सुनके आया जग का हूँ माँ सताया
मुझको गले लगालो तेरी शरण हूँ आया
रास्ते विकट हैं मैया अज्ञान को मिटाओ
@मीना गुलियानी



माता की भेंट -

माता की भेंट -छोड़ दिया जग सारा

मेरी मैया मेरा तुझ बिन दूजा न और सहारा
मेरी नाव भंवर में डोले माँ सूझे नहीं किनारा

तुम आके पार लगाओ माँ आप ही जान बचाओ
मुझे पार करो इस भव से नैया को पार लगाओ
माँ तेरे भरोसे पर ही मैंने जीवन को है गुज़ारा

माँ मैंने यही सुना है तू विपदाओं को मिटाती
माँ सबके दुखड़े हरके रोतों को तू है हँसाती
मेरी भी विनती सुनलो इस जग से मैं तो हारा

तुम अर्ज़ सुनो माँ मेरी सुनलो मत करना देरी
माँ शेर सवारी करके रखना तू लाज मेरी
तेरा ही सहारा लेकर माँ छोड़ दिया जग सारा
@मीना गुलियानी



सोमवार, 19 मार्च 2018

दिल मेरा कहाँ खो गया

जिंदगी मुझे बहलाने की
कोशिश न करो
मेरा दिल खिलौने की तरह
बहुत ही नाज़ुक सा है
हाथ लगाते ही वह
टुकड़ों में बिखर जायेगा
सुनी हमने चुप की सदा
अंबर पर चाँद न घटा
हँसी को करा लिया जिबह
दिल मेरा कहाँ खो गया
@मीना गुलियानी 

माता की भेंट -तूफ़ान में दिया है

बेकार सोचना है तेरे सोचने से क्या है
होगा वही जो कि तेरे भाग्य में लिखा है

तेरे रास्ते अगरचे , हैं मुसीबतों ने घेरे
माता का आसरा ले,जब तक है स्वांस तेरे
उसका ही नाम केवल, हर रोग की दवा है

उसका पता जो पूछे ,कटड़े से हो रवाना
जो सामने है पर्वत,उसपे तू चढ़ते जाना
दरबार पर पहुँच जा,माता की वो गुफा है

दुनिया की दौलतों का,झूठा है ये खज़ाना
ये महल और बंगले ,कुछ भी न साथ जाना
मत खेल ज़िन्दगी से, बेकार का जुआ है 

गर चाहते हो मुक्ति ,  माँ के चरण पकड़ लो
जीवन की नाव उसकी ,शक्ति से पार करलो
उसकी कृपा से जलता ,तूफ़ान में दिया है
@मीना गुलियानी