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Friday, 21 July 2017

साये से बिछुड़ जाना है

जिंदगी इक सफर है चलते ही जाना है
जीवन है जिम्मेदारी उसको निभाना है

कभी पाई ख़ुशी कभी मिला हमें गम
कभी खाई ठोकर जहाँ चूके थे हम
लेकिन हँसते हँसते सब सहते जाना है

मर मरके भी हम पूछो कैसे जिए
कितने रोये थे हम कितने आँसू पिए
अश्कों को दी कसम न बाहर आना है

दोस्त दुश्मन बने पराये अपने बने
जिनपे हमको गुमां था वो कातिल बने
तन्हाइयों में साये से बिछुड़ जाना है
@मीना गुलियानी 

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