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Friday, 30 September 2016

माता की भेंट -----14

आया दर तेरे ते चल नी माँ 
मेरी करदे मुश्किल हल नी माँ 

सुहे शेरां दे उते सवारी तेरी 
महिमा गांवदे ने नर नारी तेरी 
जाए सुक न उम्मीदां दी वल नी माँ -----------मेरी करदे --------

तू ते शक्ति आद  भवानी है 
तू ते जगदम्बे महारानी है 
लया तेरा द्वारा मैं मल नी माँ ---------------मेरी करदे -----------

किसे सोने दा छत्र चढाया ऐ 
कोई हंजुआं दी भेंट लियाया ऐ 
निश्चा तेरे ते रखके अटल नी  माँ ----------मेरी करदे ------------
@मीना गुलियानी 

माता की भेंट -----13

अब देर न कर मेरी माता, तेरा बेटा है तुझको बुलाता 
आकर विपदा दूर करो माँ , तेरी ही महिमा गाता रे 

तेरे इन भक्तन पर माता भीर पड़ी बड़ी भारी है 
आकर दुखड़े हर लो माता दर पे खड़े दुखारी हैं 
तुझ बिन माता कौन है इनका दुखड़ा आन मिटाता रे 

आजा मइया शेरों वाली जगदम्बा माँ शक्ति है 
हर पल तेरी जोत को पूजें करते तेरी भक्ति हैं 
तेरे बिना माँ कौन सुनेगा गाथा जिसे सुनाता रे 

माँ बेटे का पावन नाता तूने क्यों बिसराया है 
बेटा तेरे दर पे रोये क्यों न गले लगाया है 
रो रो के दिल तुझे पुकारे तुझको तरस न आता रे 
@मीना गुलियानी 

Thursday, 29 September 2016

माता की भेंट ------12

बेकार सोचना है तेरे सोचने से क्या है 
होता वही है जो कि तेरे भाग्य में लिखा है 

तेरे रास्ते अगरचे हैं मुसीबतों ने घेरे 
माता का आसरा ले जब तक है स्वांस तेरे 
उसका ही नाम केवल हर रोग की दवा है 

उसका पता जो पूछे कटड़े से हो रवाना 
जो सामने है पर्वत उसपे तू चढ़ते जाना 
दरबार पर पहुँच जा माता की वो गुफा है 

दुनिया की दौलतों का झूठा  है ये खज़ाना 
ये महल और बंगले कुछ भी न साथ जाना 
मत खेल जिंदगी से बेकार का जुआ है 

गर चाहते हो मुक्ति माँ के चरण पकड़ लो 
जीवन की नाव उसकी शक्ति से पार करलो 
उसकी कृपा से जलता तूफ़ान में दिया है 
@मीना गुलियानी 

हमें दुनिया भर से क्या

महलों में रहने वाले तू खुश हो या खफा
अपना तो कूचा प्यारा हमे तेरे दर से क्या

हमने तो वफ़ा की है और ऐसा ही करेंगे
झोली में गर तू गम दे ख़ुशी से वो भरेंगे
हर चीज़ तेरी प्यारी हमें शिकवा तुमसे क्या

हीरे ,मोती,लाल-ओ-जवाहर भी हम न लें
ज़िल्लत से जो मिले तो मुहब्बत भी हम न लें
इज़्ज़त की रोटी प्यारी हमें दुनिया भर से क्या
@मीना गुलियानी 

Wednesday, 28 September 2016

नही तो मर जाऊँगी

मैंने जीवन की सोंपी तुझे डोर, तेरे संग मैं तो आऊँगी
सैंया हाथ मेरा कभी भी न छोड़ना, नही तो मर जाऊँगी

इस संसार की हर वस्तु से नाता मैंने तोडा
तुझको अपना मान लिया जब ये जग मैंने छोड़ा
मेरा साथ कभी न तुम छोड़ना मैं कैसे जी पाऊँगी

तेरे कारण दुनिया ने जीना दुश्वार किया है
हर मुश्किल में साजन तुमने मेरा साथ दिया है
कभी भूलके नज़र तू न फेरना मैं कैसे सह पाऊँगी
@मीना गुलियानी 

निकसे हैं प्राण ---सैंया

बादल झूमके गावत आज
चन्दा भी छुप छुपके देखत आज
 देखो जी मुझको आवत लाज ---सैंया

तुमको बनाया है मनमीत
देखो हमारी हो गई जीत
अब तुमसे जो हो गई प्रीत
कैसे निभाओगे तुम प्रीत ----सैंया

बाँधी है प्रीत की डोरी जो आज
देखके तुमको आवत लाज
नज़रें झुकाकर करलो जी बात
कहदो अपने जिया की बात ----सैंया

दिल ने उठाये हैं सौ तूफ़ान
काबू में कैसे हों अरमान
तुम ही हो मेरे जीवन प्राण
देखूँ न तुमको निकसे हैं प्राण ---सैंया
@मीना गुलियानी 

Tuesday, 27 September 2016

माता की भेंट ----11

आज मइया शेरां वालिये , भगतों ने तुमको पुकारा 
आज मइया जोतां वालिये ,तेरा ही है माँ सहारा 

माँ अब तो आ जाओ,मेरे दिल ने सदा दी  है 
मेरी बिगड़ी बना जाओ, क्यों देर लगा दी है 

माँ दर्श दिखा जाओ, भगतों ने पुकारा है 
माँ पर लगा जाओ, आसरा ही तुम्हारा है 

नैया डोले मेरी, मत देर लगाओ माँ 
मैं बुझता दीपक हूँ ,तुम आके बचा लो माँ 

मेरे नैन प्यासे हैं ,माँ प्यास बुझा जाओ 
मेरी विनती सुनलो माँ, ऐसे न ठुकराओ 
@मीना गुलियानी 

प्यार का राग सुनो

मन की लगन करे पुकार 
दिल की बात सुनो 
प्यार का राग सुनो रे --------------------

बातों की गहराई 
प्यार की ऊँचाई 
दिल ने ली अंगड़ाई 
मस्त घटा छाई 
दिल गुनगुनाने लगा रे ---------------------

ऐसे यूँ न जाओ 
कुछ तो मुस्कुराओ 
कुछ तो मुँह से बोलो 
यूँ न दिल जलाओ 
दिल ने तेरे छू लिया रे --------------------------

नज़रों का झुक जाना 
तेरा यूँ शरमाना 
पलकों को गिराना 
आँचल सरकाना 
होश मेरा गया रे --------------------------------
@मीना गुलियानी 

माता की भेंट ----10

माँ हाथ जुड़े हैं तेरे दरबार के आगे 
न झुकेगा सर मेरा इस संसार के आगे 

दिल में सदा गूँजे तेरे ही नाम की रटन
हर पल तेरे ही नाम को रटता रहे ये मन 
माँ तेरी लगन के कभी टूटे न ये धागे 

सांसों की डोरी को किया माँ तेरे हवाले 
दे दे मुझे अँधियारे या तू करदे उजाले 
रखना तू मेरी लाज कोई दाग न लागे 
@मीना गुलियानी 

माता की भेंट -----9

खोलो ज़रा भवनां दा द्वार माँ 
जय अम्बे जय अम्बे दीवाने तेरे बोलदे 

तेरियां उडीकां विच अखां गइयाँ पक माँ 
कदे ता दयाल होके बचयाँ नूँ तक माँ 
करदे हाँ असी इंतज़ार ----------------जय अम्बे जय अम्बे --------

बचयाँ तो दस होया केहड़ा कसूर माँ 
नोहां नालो मांस अज होया किवें दूर माँ 
बागां कोलों रुसी ऐ बहार --------------जय अम्बे जय अम्बे -------

मांवां बिना पुतराँ नूँ कोई वि न झलदा 
ताइयो तां जहान सारा बुआ तेरा मलदा 
तुइयो लावें डुबदे नूँ पार ---------------जय अम्बे जय अम्बे ---------

भक्तां ने रखियां माँ तेरे उते डोरियां  
तकदे ने जिवें तके चन नूँ चकोरियां 
दर खड़े पलड़ा पसार -------------------जय अम्बे जय अम्बे ----------
@मीना गुलियानी 

Monday, 26 September 2016

माता की भेंट -----8

तुझे छोड़ कहाँ जाऊँ माँ , मैंने ढूँढा ये सारा जहान है
अब तो ये सारा जीवन , मैंने लिख दिया तेरे नाम है 

तेरे बिना मैं चैन न पाऊँ , रोते रोते वक्त कटे 
हर पल तेरी याद में गुज़रे दिन बीते यूं ही रात कटे 
यूं ही जीवन बिताऊं सुबो -शाम है ,तेरे बिन कहाँ आराम है 

जाने कौन सी गलती पर तू ,रूठ गई है अब मुझसे 
हूँ नादान तेरा बच्चा माँ, अब तो मान जा माँ मुझसे 
तेरे चरणों में मेरा प्रणाम है ,यही विनती करूँ आठों याम है 

माँ-बेटे का पावन नाता, हर नाता अब झूठा  है 
तुझको अपना माना मैंने , हर नाता अब झूठा है 
दुनिया स्वार्थ का नाम है , सबको पैसे से काम है 
@मीना गुलियानी 

पनिया भरन की बेला में

सर पे गगरिया  क्यों छलके , पनिया भरन की बेला में
सर से चुनरिया क्यों सरके , पनिया भरन की बेला में

पायलिया मत शोर मचाना , पिया जब होंगे साथ रे
दिल की बातें कर  ही लेंगे , दोनों ही चुपचाप रे
हँस लेंगे हम जी भरके -------------------------

ओ रे पपीहे तू कुछ कहदे, अपने मन की बात रे ,
दिल की बातें जान ही लेंगे ,साजन अपने आप रे
नैनों से कहदो न बरसे -------------------------

जीवन में सब मिल जाए, जब प्रीतम का हो साथ रे
कुछ न बचे कहने सुनने को , दिल से हो दिल की बात रे
मिलने को फिर मन तरसे --------------------------
@मीना गुलियानी 

Sunday, 25 September 2016

माता की भेंट ------7

माँ जगदम्बे जी के  द्वार , जो भी करता है पुकार 
आस पुजाए, माँ अम्बे , सुन लेती है पुकार 

माँ जगदम्बे की शान निराली 
लौटा  न खाली कोई यहाँ से सवाली 
सुनके करुणा भरी पुकार शेरों पे होके सवार 
आके अम्बा हर लेती ,सबके दुखड़े अपार ----------------------   माँ जगदम्बे

जो भी मइया जी की आस लगाए 
मइया  जी उसकी आस पुजाए 
माँ की महिमा अपरम्पार ,प्रेम की शीतल चले फुहार 
मइया अम्बे जगदम्बे ,कर देती  भव से पार------------------------ माँ जगदम्बे

राजा हो या कोई भिखारी 
सब हैं बराबर यहाँ नरनारी 
माँ के भरे हुए भण्डार ,लेवे  नाम जो होवे पार 
माँ जगदम्बे जी भक्तो का करती हे उद्धार ---------------------------माँ जगदम्बे
@मीना गुलियानी 

माता की भेंट -----6

सुन मइया सुन मेरी विनती को सुन 
हमसे जो भूल हुई माफ़ करो तुम 

दूर करो सारे भरम दास पे करदो करम 
बिगड़ी बनादो मेरी मिट जाए मन का भरम 
तेरे द्वारे आऊँगा शीश झुकाऊँगा 
शीश झुकाके तेरी महिमा मैं गाऊँगा 
दर्श दिखादे मेरा तरसे है मन ---------------------सुन मइया सुन

 मैं गुनहगार मइया  बिगड़ी सँवार तो दो 
दर पे खड़ा हूँ तेरे थोड़ा मुझे प्यार दो 
तेरे द्वारे आऊँगा जोत जलाऊँगा 
जोत जलाके तेरे गुण मइया गाऊँगा 
मुझको लगी है तेरे नाम की लगन -----------------सुन मइया सुन

चंचल है मेरा मन करदे तू थोड़ा करम 
जीवन बनादो मेरा हो जाएं दूर माँ गम 
चरणों में आऊँगा शीश झुकाऊँगा 
बनके दीवाना तेरी महिमा मैं गाऊँगा 
चरणों में तेरे सदा बीते ये जीवन -------------------सुन मइया सुन
@मीना गुलियानी 

माता की भेंट -----5

 जगदम्बे शेरां वाली, बिगड़ी सँवार दे 
नैया भँवर में मेरी , सागर से तार दे 

मैं अज्ञानी मैया ,कुछ भी न जानू 
दुनिया के झूठे नाते ,अपना मैं जानू 
आके बचालो नैया ,भव से उबार दे 

लाखों की तूने मैया , बिगड़ी बनाई 
फिर क्यों हुई है मैया, मेरी रुसवाई 
लाज बचाले माता ,दुखड़े निवार दे 

जपूँ तेरा नाम मैया ,ऐसा मुझे ज्ञान दे 
नाम न तेरा भूलूँ ,ऐसा वरदान दे 
आशा की जोत , मेरे दिल में उतार दे 
@मीना गुलियानी 

Saturday, 24 September 2016

मन की किताब

मैं अपने मन की किताब का एक पन्ना पलटता हूँ

देखता हूँ एक नया फूल उग आया है

जैसे कि वसन्त आ गया है मुझमे

रंग बिरंगे सपने बुनने  लगा है मन

बारिश की बूँद भी फूल पर पड़ती है

मन उपवन की दूब पर ओस पड़ती है

खुशबु गुनगुनाती है जाने क्या गाती है

कुछ तन्हाई के नगमे कुछ मिलन के गीत

तन्हा रातो में अकेलेपन की यादें

आँसुओं में पिघलती हैं मेरा मन तलाशता है

एक आसमान को उसे सहेजने के लिए

मेरी अँगुलियाँ धीरे धीरे सागर की रेत पर

तुम्हारा चित्र उकेरती हैं जिन्हें लहरें मिटा देती हैं

मैं भय से भर जाता हूँ सोचता हूँ

क्या हमारा अस्तित्व भी ऐसे ही मिट जाएगा

क्या हम भी इन्हीं लहरों में विलीन हो जाएंगे

सपने तो सपने ही हैं मन की परछाईयाँ

कभी भय बनकर कभी सत्य बनकर

सामने आती हैं नदी,पत्थर और डालियाँ

सभी अपने अपने रंग ढूँढती हैं

एक लय में एक धुन धड़कती है

एक तूफ़ान की खामोशी सी

तुम्हारे होंठो पर आकर ठहर जाती है

अनगिनत रंगों का गुबार बरसता है

चेतना की सतह पर लगातार

शाम  की उदास हवा में तुम्हारे गीत

दम तोड़ते हैं एक के बाद एक खामोशी में
@मीना गुलियानी

हम हैं बड़े दीवाने

देख हमें आवाज़ न देना, हम हैं बड़े दीवाने
आज न देखेंगे मुड़के , दुनिया को मस्ताने

दूर कहीँ इक पंछी गाये , क्या बतलाये
कल जो बीत गया है , वो फिर लौट न आये
दिल की बातें रखो दिल में , लोग उन्हें क्यों जाने

अरमाँ दिल के मचल रहे हैं , क्या समझाएं
प्रेम में जब दिल मिलते हैं , तो जग तड़पाये
दिल की लगी को दिल ही जाने , या जाने परवाने
@मीना गुलियानी 

माता की भेंट ---4

मेरी अखियाँ च शेराँ वाली माँ वस गई , नैन खोलां किवें 
मेरे दिल विच ओदी तस्वीर बस गई ,भेद खोला किवें

 लोकी पुछदे तू मुहों क्यों नहीँ बोलदी 
तक दुनियां नू अखां क्यों नहीँ खोलदी 
ऐ सुनके मैं आँख ज़रा होर कस लई 

मैं डरदी हाँ सुरमा वि न पांवदी 
ऐहो गल दिन रात मेनु खावदि 
किदे मइया नू सुरमे दी सलाई लग गई 

मेरे अपने बेगाने ताने मारदे 
ताने मार लेन मेरा की बिगाड़दे 
जान मेरी ता जाणी जान नाल लग गई 

मैं दीवानी गुलाम ओदे दर दी 
नौकरानी हाँ मइया जी दे घर दी 
मेरे नैना च मइया जी दी जोत जग गई 
@मीना गुलियानी 

माता की भेंट ------3

माँ मेरी विपदा दूर करो , माँ मेरी विपदा दूर करो 
तेरी शरण मैं आया हूँ , आकर मेरे कष्ट हरो 

तू ही अम्बे  काली है 
दुखड़े हरने वाली है 
माँ मेरे दुखड़े दूर करो 
आकर सारे कष्ट हरो ------माँ---------

भक्तों ने तुझे पुकारा है 
तूने दिया सहारा है 
विनती पे मेरी ध्यान धरो 
चरण पड़े की लाज रखो ------माँ ----------

शरण तुम्हारी आये हैं 
इस जग के ठुकराए हैं 
दुविधा सबकी दूर करो 
पाप ताप सन्ताप हरो ------माँ-------------
@मीना गुलियानी 

Friday, 23 September 2016

माता की भेंट ---2

तू जाणे मेरी माँ तेरियां तू जाणे 

कण्डया विच तू ही हसदी, फुलां दे विच तू ही वसदी 
महिमा तेरी महान तेरियां --------------------------

तू है सारे जग दी दाता , जोड़्या तेरे नाल मैं नाता 
दे दो भक्तिदान ,तेरियां --------------------------

सो जाणे जिस खेड रचाई ,की आखाँ उसदी वडियाई 
हारे वेद पुराण , तेरियां --------------------------------

ऐ जग है सब तेरी माया, कण कण दे विच आप समाई 
मैं बालक अन्ज़ान , तेरियां --------------------------
@मीना गुलियानी 

माता की भेंट -----1

तेरे दर ते आये सवाली माँ , कुछ झोली पा ते टुर जाइये 

खाली जानां फकीरां दा कम नइयो दर दो जहान दी वाली तू 
माँ रोज़ तरीकॉं नई चँगिया , अज हुकम सुना ते टुर जाइये 

दर लग्यां दी सुण ले अज दाती ,तेरे दर ते कोई थोड़ नहीँ 
माँ तेरे दरश दी लोड मैनू , इक झलक दिखा ते टुर जाइये 

माँ वास्ता तैनू प्यार दा ऐ , तेरी शरण मइया मै आ गइयाँ 
सारी दुनिया नू ठुकरा दिता ,तू गल नाल ला ते टुर जाइये 

खाली जाना फ़कीरा दा ठीक नहीँ ,रहबर दा मुकरना ठीक नहीँ 
अज अपनी नज़र नाल मेहराँ दे तू फुल बरसा ते टुर जाइये 
@मीना गुलियानी 
जैसा कि आप सभी जानते ही हैं कि माता के नवरात्रे आरम्भ होने वाले हैं इसलिए मैंने यह सोचा है

कि आज से ही माता की भेंट आपको पढ़ने को मिलेंगी


 जय माता दी 

मुझे यकीन नहीँ है

मेरे मन के महासागर पर 

प्रतिहिंसा के बन्दरगाह मत बाँधो 

क्योंकि तब आस्था का हिमालय 

हिल उठेगा आशा का ये द्वीप 

बंजर सा हो जाएगा 

सत्ता के गलियारों का सन्नाटा 

मुझे भयभीत सा करता है 

कोलाहल से कहो  कि आये 

और मुझे अपने भीतर आत्मसात करले 

इन ऊँची इमारतों की लम्बी परछाईयाँ 

लगता है सब उजाले की जड़ें काट देंगी 

मैं बहुत दूर जाना चाहता हूँ 

कभी ख़्वाबों में, कभी तसव्वुर में 

तेरा हाथ पकड़कर उस पार जाना चाहता हूँ 

पर फिर लगता है मेरे पाँव तले ज़मीन नहीँ है 

तू मेरा सच है पर मुझे यकीन नहीँ है 
@मीना गुलियानी 

Thursday, 22 September 2016

मेरे होंठो पे हँसी है

तूने तो रुलाने में कोई कमी नहीँ की है
लेकिन फिर भी देख मेरे होंठो पे हँसी है

चींटी भी फिसलती है चट्टान से आखिर
लेकिन सम्भलकर वो भी सौ बार चढ़ी है

सोने में तो सारी ये अपनी उम्र गुज़ारी
अब जाग ज़रा मन ये घड़ी बीत रही है

बाकी नहीँ रह गए कोई रिश्ते या नाते
दुनिया ये सारी तो मतलब से भरी है

गैरों से नहीँ शिकवा जो दुःख लाख दे हमें
ग़म है कि ये तिश्नगी अपनों से मिली है
@मीना गुलियानी


वो सुबकती रही

सागर किनारे पड़ी रेत पर वो सुबकती रही

लहरें उसके पास आईं दिलासा देके लौट गईं

उसकी हिचकियाँ पूरी रुकी नहीँ थम गई

सहसा ऐसा लगा उसका मौन क्रंदन शांत हुआ

अचानक प्रलय सा आया आवेग कुछ थम गया

उसने पलटकर मुँह फेरा तो उसकी आँखे वीरान थी

उसके होंठ कुछ कहने के लिए कम्पकंपा रहे थे

हाथों की मुट्ठियाँ बाँधे वो कुछ सोच रही थी

अचानक कुछ निर्णय लेकर वो आतुर हो उठी

प्रतिशोध लेने को उसकी बाहें जोश से भर उठी

लक्ष्य की ओर उसके सधे पाँव बढ़ते जा रहे थे

हर पीड़ा का समाधान उसने जैसे खोज लिया

मन ही मन उसने अपने विरोधी को परास्त किया

अपने मनोबल इच्छाशक्ति को जागृत किया

अब वो समाज के ठेकेदारों के खिलाफ और

समाज की हर बुराई कुरीतियों  के खिलाफ

बुलन्द आवाज में विरोध करने में सक्षम थी

एक अबला अब सबला में परिवर्तित हो चुकी थी
@मीना गुलियानी 

खुदाई तो नहीँ मांगी थी

तेरी नज़रों से  खुदाई तो नहीँ मांगी थी
खैर मांगी थी बुराई तो नहीँ मांगी थी

क्या किया जुर्म जो यूं आप खफा हो बैठे
 होके खामोश यूं ही हमसे जुदा हो बैठे
दिल ही माँगा था जुदाई तो नहीँ मांगी थी

दिल तो बेगाना हुआ उसे अपना न सके
हो गया तेरा तो वो अपना बना भी न सके
चीज़ अपनी थी पराई तो नही मांगी थी

नासमझ थे हम भी कुछ समझ भी न सके
फरेबे जाल से हम बचके निकल भी न सके
फँसके भी हमने रिहाई तो नहीँ मांगी थी

न किया शिकवे कभी न गिला हमने किया
जैसे भी तुमने कहा हमने वैसा ही किया
हमने  तुमसे  भी सफाई तो नहीँ मांगी थी
@मीना गुलियानी 

Wednesday, 21 September 2016

खुदा भी तुझपे रहे मेहरबाँ

ऐ दिल कहाँ तेरी मंजिल
खामोशी हरसू है ,
 गुम हर सितारा है
चुप है ज़मी ,चुप आसमाँ

किसलिए बनके महल टूटते हैं
रिश्ते बनके भी क्यों टूटते हैं
किसलिए दिल टूटते हैं
पत्थर से पूछा बहारों से पूछा
खामोश है सबकी जुबाँ

चल तू गम का जहाँ न निशाँ हो
चल तू जहाँ पे खुला आसमाँ हो
खुशियों से वो भरा इक जहाँ हो
दिल को मिलेगी मंजिल वहाँ
पाएंगे हम कदमो के निशाँ

अब तू जो हंसदे तो हँस देंगे साये
चाहे अपने हों चाहे पराये
रूठों को मनाएं
मिलके रहेगी जन्नत तुझे
खुदा भी तुझपे रहे मेहरबाँ
@मीना गुलियानी

तेरा ही साथ रहे

तू मेरे साथ रहे , दिन हो या रात रहे
दुःख में सुख मिले,हाथों में जो हाथ रहे

तू हमेशा था मेरा और  रहेगा यूं सदा
भूलेंगे हम न तुझे तुझको ही देंगे सदा
जिंदगी की  हार जीत में तेरा ही हाथ रहे

तुझको पाया मैंने खुद को भी भूल गए
पाके तुझको अपना ये जहाँ भूल गए
धूप हो या छाया हो, चाहे बरसात रहे

मुझसे दूर जाना ना  तू मुझे भुलाना ना
हम तो तेरे ही हैं और अब जाना कहाँ
जीते जी मरके भी तेरा ही साथ रहे
@मीना गुलियानी

Tuesday, 20 September 2016

भजनमाला -----138

देना शक्ति मुझे मेरे दाता
गाऊँ गुणगान हरदम मैं तेरा
काम दुनिया के जब भी करूँ मैं
सिमरूँ तुमको जपूँ नाम तेरा

मन में ज्ञान के ज्योति जला दो
मेरे जीवन को मधुबन बना दो
दूर हो जाएँ पथ के वो काँटे
फूल ख़ुशियों के ऐसे खिला दो
भूलूं तुझको न मैं एक पल भी
चाहे सन्ध्या हो चाहे सवेरा

चाहे जीवन में बादल घिरे हों
चाहे आशा के फूल खिले हों
चाहे सुख के दो पल मिले हों
चाहे दुःख के भँवर में घिरे हों                    
भावना से कभी दिल न उबरे
न कभी टूटे विश्वास मेरा
@मीना गुलियानी 

भजनमाला -----137

तेरी अख दी सिप दा इक मोती जो गुरु चरणा ते डुल जावे 
नैना दी ज्योति चमक पवे तेरे मन दी मैल सब धुल जावे 

ओ दाता बड़ा दयालु ऐ ,  इक पल विच दुखड़े दूर करे 
पापां दा  हनेरा मेट देवे , हृदय नू नूरो नूर करे  
झट नज़रां नाल निहाल करे बन्दे दा मुकद्दर खुल जावे 

मोहमाया विषयां विकारां तो ,इस चंचल मन नू मोड़ ज़रा 
फिर मन दी वृति नू फेरके ते, चित चरणकमल नाल जोड़ ज़रा 
ओ सतगुरु हरदम याद रखे, भाँवे दुनिया सारी भुल जावे 

कुछ करले नेक कमाई तू ,परवासा की ऐ जिंदगी दा 
फिर आंदी जांदी सांसा विच, पल मिलेगा तैनू बन्दगी दा 
हरिनाम दा अमृत रस पी ले ,तेरी स्वासां विच जो घुल जावे 
@मीना गुलियान

Monday, 19 September 2016

भजनमाला ----136

सतगुरु मेरा दीन दयाल 

हरदम है सेवक दे नाल, सेवक दा ओ रखे ख्याल 
मुश्क़िल विच बन जाए ढाल 

सतगुरु मेरा पर उपकारी, सतगुरु तो जाइये बलिहारी 
कर  देंदा है पल च निहाल 

स्वांस स्वांस तू ओनू  ध्याई , सतगुरु राखा सबनि थाई 
कट देंदा है मायाजाल 

उस दाते दे रंग न्यारे , केहड़ा उसदे हुंदया मारे 
जिसदे बस  विच रहंदा काल 

जोत  उसदी चो पैंदे लश्कारे ,चमकन सूरज चन सितारे 
हीरे मोती नीलम लाल 

पवन उसने झंवर झुलावे ,सारे देवगण आरती गांवे 
सारा गगन है बण्या थाल 
@मीना गुलियानी 

प्यार से मुस्कुराना पड़ेगा

दिल में जलता रहे ये दिया , प्रेम से ये जलाना पड़ेगा
आँधियां हों या तूफ़ान हों , हर बला से बचाना पड़ेगा

जिंदगी दुःख का सागर भी है
जिंदगी प्रेम गागर भी है
सुख दुःख के भँवर से निकलकर
हमें उस पार जाना पड़ेगा

नाव साहिल से गर दूर हो
पाँव चलने से मजबूर हों
थामके फिर भरोसे का दामन
पतवार चलाना पड़ेगा

जिंदगी इक पहेली भी है
सुख दुःख की सहेली भी है
माफ़ करके गुनाहों को सबके
प्यार से मुस्कुराना पड़ेगा
@मीना गुलियानी 

Sunday, 18 September 2016

भजनमाला ----135

तेरे द्वार पे आने वालो की तकदीर बदलते देखी  है 
हमने तो अपनी आँखों से तदबीर बदलते देखी है 

दुःखियों पे लुटाते दया अपनी भक्तो से करते प्यार तुम्ही 
हर पल की रखते खबर तुम्ही तेरी कृपा की न पाई कमी 
चमक दो मेरी भी किस्मत हस्ती ये बदलती देखी है 

बख्शो तुम मेरे गुनाहों को कुछ नज़र कर्म भी तो  कर दो 
जीवन को सुधारूँ मैं अब तो कुछ दया की वर्षा कर भी दो 
इस जन्म मरण के चक्कर से दुनिया ये निकलते देखी है 
@मीना गुलियानी 

भजनमाला -----134

नाम जब तेरा लिया दुःख सब दूर हुआ 
तेरे ही चरणों में मैंने जीवन को जिया 

नाम तेरा अमृत है विष सब दूर करे 
ऐसा वो प्याला है दुःख सन्ताप हरे 
पीकर अमृत को मन मतवाला हुआ 

तुम तो दयालु हो कृपा करते हो 
जो भी दुखिया आये झोली भरते हो 
मेहर की नज़रो से तूने जो मुझको छुआ 

ज्योति तेरी पावन दिल में जलती है 
हर पल याद तेरी दिल में पलती  है 
साँसों की डोरी से मैंने गुणगान किया 
@मीना गुलियानी 

भजनमाला --------133

मन की आँखे खोल रे हरि दर्शन होंगे 
आसन से मत डोल रे हरि दर्शन होंगे 

इस घट भीतर काशी मथुरा 
अनहद बाजे ढोल रे 

इस घट में सब जगत पसारा 
जीवन ये अनमोल रे 

पी ले प्रभु के नाम का प्याला 
जीवन में रस घोल रे 

तन मन उसके करदे हवाले 
आनन्द में तू डोल रे 

जीवन उसके अर्पण करके 
सुख पाया अनमोल रे 
@मीना गुलियानी 

Saturday, 17 September 2016

भजनमाला ----132

तेरी इस दुनिया में मैंने सुख दुःख देखे सारे हैं 
उसने ही जाना है तुमको जिसको तेरे सहारे हैं 

सुख दुःख ही तो इस दुनिया की गाडी को चलाते हैं 
ये दोनों ही मिलकर इक अच्छा इंसान बनाते हैं 
इस संसार की नदिया के दोनों ही तो किनारे  हैं 

दुःख न चाहे कोई भी सब सुख के लिए तरसते हैं 
दुःख में सब रोते हैं पर सुख आये तो सब हँसते हैं 
जिसने भी सुख पाया उसने भी देखे दुःख सारे हैं 

सुख में तेरा सुमिरन हो और दुःख में मैं फरियाद करूँ 
जिस हाल में रखे तू  भगवन तुझे सदा ही याद करूँ 
हमको भूल न जाना भगवन हम तो तेरे सहारे हैं 
@मीना गुलियानी 

सुन ज़रा मान भी जा

सुन ज़रा मान भी जा , और कुछ देर न जा
अभी है पहला पहर , थोड़ी देर और ठहर

अभी तो चाँद झिलमिलायेगा
तेरा ये नसीब जाग जाएगा
खुलके बातें करेंगे जी भरके
तुझको देखा नहीँ है जी भरके
सुन ज़रा ---------------------

रौशनी आफताब लाएगी
तारों की फिर बारात आएगी
डोली मेरी भी तब उठा लेना
मुझको जी भरके तुम मना लेना
सुन ज़रा ------------------------

आज धरती पे चाँद उतरा है
तेरा मुखड़ा भी कैसा निखरा है
तेरी पलकें झुकी झुकी सी हैं
साँसे तेरी रुकी रुकी सी हैं
सुन ज़रा --------------------------
@मीना गुलियानी 

Friday, 16 September 2016

भजनमाला----------131

सतगुरु तुम्हारे प्यार ने जीना सिखा दिया 
हमको तुम्हारे प्यार ने इंसा बना दिया 

रहते हैं जलवे  आपके नज़रों में हर घड़ी 
मस्ती का जाम आपने  ऐसा पिला दिया 

जिस दिन से मुझको आपने अपना बना लिया 
दोनों जहाँ को दास ने तबसे भुला दिया 

भूला हुआ था रास्ता भटका  हुआ था मैं 
किस्मत ने मुझको आपके काबिल बना दिया 

फसने किसी को आज तक सज़दा नही किया 
वो सर भी मेने आपके दर पर झुका दिया 
@मीना गुलियानी 


भजनमाला -----130

आजा मेरे सतगुरु प्यारे मुख अपना दिखला के जा 

संगत दी है डोले नैया तुझे बिन सतगुरु कौन खिवैया 
सतगुरु प्यारे कृपानिधान किश्ती पार लगाके जा 

संगत तेरी रोंदी रुल्दी दुखां विच गई रुल्दी घुल्दी 
भुला दे विच पैके भुल्दी सिदे रस्ते पाके जा 

तुझ बिन सतगुरु कौन सम्भाले डुबदे  लावे कौन किनारे 
लखां सुन्दे तू हैं तारे बेड़ा बने लाके जा 

इक वारि तू सतगुरु आवी आवीं न तू देर लगाविं 
भूले भटके ढेंदे डिगदे बाहों फड़ उठाके जा 

झूठी अकड़ ते मगरूरी पाई संगत विच फतूरी 
बख्शो सानू सब्र सबूरी नम्रताई सिखला के जा 

तुझ बिन सतगुरु काल डराए तुझ बिन सतगुरु कौन बचाये 
शब्दरस दा  लोटा भरके अमृत नाम पिलाके जा 
@मीना गुलियानी 



दिल के दाग़ जले

लो बुझ चली है शमा इस गरीबखाने की
उम्मीद टूट चुकी है अब तेरे आने की

जुनूने शौक  में तासुबह दिल के दाग जले
तुम कह गए थे कि आएंगे हम चिराग जले

अब तो मेरी तमन्नाओं में अँधेरा है
न सोच दिल ये मेरा  कैसे अँधेरे में पले

तुझे खबर भी कैसे हो कि सोज़े गम क्या है
न दिल जला कभी तेरा न दिल के दाग़ जले
@मीना गुलियानी 

मैंने तुझे महसूस किया है

इन हवाओं में इन फिज़ाओं में
पर्वत की इन श्रृंखलाओं में
बादलो की घटाओं में
पेड़ों की घनी छाँव में
अमराइयों के गाँव में
मैने तुझे महसूस किया है

दिल की उमंगो के जोश में
खो गए उस होश में
मदहोशी के आलम में
भीगे भीगे सावन में
इन बरसती घटाओं में
मैंने तुझे महसूस किया है


गुलशन है कुछ निखरा निखरा
पर गुंचा कुछ बिखरा बिखरा
दिल तो है आबाद यूं मेरा
जैसे अभी हुआ है सवेरा
इन चहकती हवाओँ में
मैंने तुझे महसूस किया है

लट है चेहरे पे लहराई
 लगा कली जैसे मुस्काई
कोंपल फूटी कलियां चटकी
बादल से फिर बूंदे टपकी
मन की इन अंगड़ाइयों में
मैंने तुझे महसूस किया है
@मीना गुलियानी 

प्रमाद न कर

छू ले आसमान जमीन की तलाश न कर
जी ले अपनी जिंदगी ख़ुशी की तलाश न कर

तेरी तकदीर यूँ ही संवर जायेगी
इक तेरे यूँ मुस्कुराने से
बहारें फिर से लौट आयेंगी
इक तेरे उसे बुलाने से
वो ज़माने फिर से लौट आएंगे तकरार न कर

न तुम इस तरह उदास रहो
न तुम यूँ ही पशेमांन रहो
चिराग यूं भी जल ही जाएंगे
शमा के जलने से परवाने आएंगे
बहारें फिर तेरे जीवन में आएँगी ऐतबार तो कर

जीवन सुख दुःख से बना है
 इसने हर किसी को छला है
जिसने न हारी हिम्मत वो जीता है
वरना जीवन तो सबका रीता है
ढूँढ ले तू भी अपनी खुशियों को प्रमाद न कर
@मीना गुलियानी 



Thursday, 15 September 2016

दुःख सुख का ताना बाना

यह जीवन तो है दुःख सुख का ताना बाना
रखके हौंसला खुद पे आगे कदम बढाना

दुःख तो है गहरा सागर हिम्मत न हार जाना
आशा की नाव चढ़कर उस पार चले जाना

तुम भी वहाँ सपनों की दुनिया नई बसाना
जब मीत मिले मन का फिर प्रीत को जगाना

आशा की डोर लेकर फिर घर नया  बसाना
फिर प्रेम की सुरभि से जीवन को महकाना

प्रेम को पल्लवित कर  जग को सुखी बनाना
दिलों के दरम्यां हुए हर फासले मिटाना

इस जहाँ से नफरत जाति भेद को मिटाना
हर तरफ ही प्रेम का सन्देश तुम पहुँचाना
@मीना गुलियानी 

Wednesday, 14 September 2016

जादू जगाने लगी है

तेरी सदा मुझको आने लगी है

मैं दूर नही हूँ न तुझसे जुदा हूँ

फिर क्यों कमी तेरी सताने लगी है

मैं गैर नही हूँ तेरा हमसफ़र हूँ

तू हर शय  में जैसे समाने लगी है

न कर तू कभी अब जुदाई का दावा

तेरी हर अदा मुझको भाने लगी है

न दूर जाना कभी पास आके

मेरी जां में तू अब समाने लगी है

एहसां तेरा मैं अब मानता हूँ

मुझमे तू जादू जगाने लगी है
@मीना गुलियानी 

भजनमाला ----129

मेरे सतगुरु जी तुसी मेहर करो , मैं दर तेरे ते आई होइयाँ 
मेरे कर्मा वल न वेखयो जी , मैं कर्मा तो शरमाई होइयाँ 

जो दर तेरे ते आ जाँदा 
ओ असल ख़ज़ाने पा जाँदा 
मेनू वी  खाली मोड़ी ना 
मैं वी दर ते आस लगाई होइयाँ ------मेरे -----------------

तुसी तारणहार कहाँदे  ओ 
डुबया नू बने लांदे ओ 
मेरा वी बेडा पार करो 
मैं वी दुखियारन आई होइयाँ ----------मेरे  ----------------------

सब संगी  साथी छोड़ गए 
सब रिश्ते नाते तोड़ गए 
तू वी किदरे ठुकरावीं ना 
ऐ सोचके मैं घबराई होइयाँ ----------मेरे  -----------------------
@मीना गुलियानी 

Tuesday, 13 September 2016

यादें

यूँ ही कभी याद आकर मुझे बुलाती है
मैं तुम्हारी आहट सुनते ही भागकर आता हूँ
तुम्हारी आँखों में झाँककर तुम्हें पढ़ता हूँ
तुम्हें देखकर ही मैं आतुर हो उठता हूँ
तुम्हारे नयन जब अश्रुजल से भीगते हैं
तब मेरा मन भी व्याकुल हो उठता है
उन्हें हाथ उठाकर भी पोंछ नहीँ पाता
मैं मर्यादा की सीमा नहीँ तोड़ पाता
दूर से ही तुम्हें देखकर तुम्हें चाहता हूँ
तुम्हारा साथ पाकर भी पहुँच नहीँ पाता
कभी जब हवा तुम्हारे गेसुओं से चेहरा ढकती है
तुम्हारी वो छवि मेरे मन में हरदम बसती है
मैं उन सुनहरी यादों में खुद को डुबो देता हूँ
सुबह की किरणें जब तुम पर पड़ती हैं                          
तुम धीरे धीरे उनींदी पलकों से मुस्काती हो
हर लम्हा वो गुज़रा पल चलचित्र बनकर
मेरे हृदय पटल पर ख़ामोशी से फिसलता है
मैं यूं ही गुमसुम दीवाना सा बैठा हुआ
उन बीते लम्हो के साये के पन्ने पलटता हूँ
@मीना गुलियानी

दर्द बेशुमार मिला

रूह मेरी रही प्रेम की प्यासी दर्द बेशुमार मिला
दिल के सोये अरमानो को ये संसार मिला

साथ तेरा माँगा तो मुझको गम की गर्द मिली
चाहत के नगमो के बदले आहें सर्द मिली
दर्द का रिश्ता सबने निभाया जो इस पार मिला

अब तो यही सोचा है हमने यूँ ही जी लेंगे
चुप ही रहेंगे लब सी लेंगे आंसू पी लेंगे
गम से अपना रिश्ता पुराना ये सौ बार मिला

साथ तुम्हारा छूट जबसे हर कोई छूट गया
कहता था जो अपना मुकद्दर हमसे रूठ गया
अब क्या इसका शिकवा करना जो बेज़ार मिला
@मीना गुलियानी 

अरमानो का गुलिस्तां खिलता रहे

जिंदगी का फलसफा यूँ ही  बस  चलता  रहे
खुशियों और अरमानो का गुलिस्तां खिलता रहे

परेशानी और गम तो आते ही रहेंगे
मगर होंसला न कम हो बढ़ता ही रहे

करीब से देखोगे तो पाओगे सभी रेत के घर
मगर दूर से इसकी शान को नज़र अंदाज़ करते रहे

सच तो हमेशा सच ही रहेगा यारो
झूठ बोलने वाले अपनी पहचान का दम  भरते रहे

शहर में  बहुत मुश्किल से मिलता है आदमी
सदियो से अच्छे शख्स की पहचान हम करते रहे
@मीना गुलियानी

तुम बिन जिया उदास है

तुम बिन जिया उदास है
ये कैसी अमित प्यास है

तरुवर अब मुरझाने लगे हैं
गीत मुझे भूल जाने लगे हैं

होठों से हँसी जो तूने चुराई
कबसे निंदिया हुई है पराई

दिल का मेरे चैन उड़ा है
मन का मयूरा व्याकुल हुआ है

पंछी भी न गाये तराने
फूल भी अब लगे शर्माने

भाये न कोयल मतवाली
झूमती है जो डाली डाली

चातक स्वाति जल को चाहे
पी पी की वो रट लगाए

जाने कब बरसेंगे मेघा
कब आके वो जी हर्षाये

बागों में वो सावन लौटे
मन का मयूरा  फिर से गाये

मन मेरा भी झूमे नाचे
मन की उदासी दूर भगाये
@मीना गुलियानी


Monday, 12 September 2016

जिगर में तू समाये जा रहा है

जिगर में तू समाये जा रहा है
मज़ा जीने का अब तो आ रहा है

यूँ बढ़ती जा रही है बेकरारी
खुमार आँखों में छाता जा रहा है

पराये भी अब अपने बन गए हैं
तू जबसे मेरे करीब आ रहा है

तुझी को सौंप दी अब जिंदगानी
न सोचा हाथ से क्या जा रहा है

ये दिल काबू में तेरे हो गया है
बेगाना मुझसे होता जा रहा है
 @मीना गुलियानी 

दुनिया में अफसाना न हो

मेरे दिल तू मुझे कहीँ ले चल जहाँ कोई न हो
अपना तो अपना कोई बेगाना भी न हो

                     इस दुनिया में तो स्वार्थ के रिश्ते हैं
                     हो स्वार्थ तो बनते सभी फ़रिश्ते हैं
                     वरना मुँह मोड़ें सभी जैसे अपना न हो

 इक तू ही मेरा हमदर्द है साड़ी दुनिया खुदगर्ज़ है
तुझको ही सुनाऊँ दास्तां सुने क्यों ये जहाँ बेदर्द है
सब अपना जी यूँ चुरायें जैसे कोई वास्ता न हो

                 जो हो दुखिया ठुकराए जहाँ उसे कोई न अपनाये यहाँ
                  एक तू ही तो अपना है मेरा तुझे छोड़ भला जाऊँ कहाँ
                 आजा सुनले फरियाद मेरी दुनिया में अफसाना न हो
@मीना गुलियानी 

Saturday, 10 September 2016

मोसो रह्यो न जाए

तुम बिन मोसो रह्यो न जाए
विरह की अग्नि बहुत जलाए
तुम बिन धीरज कौन बंधाये

प्यासी अखियां नीर बहाती
तुम बिन व्याकुल कल न पाती
बरखा बैरन मोहे न सुहाए

कब लोगे आके सुध मेरी
प्रीतम काहे इतनी देरी
मन पंछी काहे अकुलाये
 @ मीना गुलियानी 

,दिल बेकरार है

तेरा ही तो मुझे इंतज़ार है
दिल हो रहा आज बेकरार है

शाम ढलने लगी रुत मचलने लगी
दिल की दबी आरजू फिर से जगने लगी
बुझ गई दिए की लौ ,दिल बेकरार है

दिन गुज़र गया मेरा इस ख्याल से
हाल मिल  गया तुम्हारा अपने हाल से
हर सुबह से रात तक ये खुमार है

तेरा मेरा सामना जब भी होगा कहीँ
सामने ही पाओगे जाओ तुम कहीँ
सज़दे में ही गुज़रे शबे  इंतज़ार है
@मीना गुलियानी 

जिऊँ या कि मरूँ मैं

तूने मेरी नींद चुराई  दिल का लूटा चैन
भर भर आएं नैना मोरे कबहुँ न पायो चैन
बताओ क्या करूँ मैं जिऊँ या कि मरूँ मैं

पलकों में तुम ऐसे समाये बिन खोले भी सामने आये
दिल की खिड़की बन्द करूँ तो जाने कौन गली से आये
बताओ क्या करूँ मैं -------------------------------------

हर दरवाज़ा पड़ गया छोटा आया मस्त पवन का झोंका
खुल गए सारे कपाट मन के दिल को मैंने कितना टोका
बताओ क्या करूँ मैं -------------------------------------

नैनन की भाषा तुम बोले दिल खाये मेरा हिचकोले
कैसे भूलूँ तेरी यादें जो संग में मेरे हरदम डोले
बताओ क्या करूँ मैं ---------------------------------------
@मीना गुलियानी 

Friday, 9 September 2016

तन मन मेरा महकने लगा है

आज ये कौन मेरी गली से गुज़रा
तन मन मेरा महकने लगा है
सुधियों में फिर से बहार आ गई है
दिल बिन पिए ही बहकने लगा है

बिन चाँदनी रात रोशन हुई है
शमा सी दिल में जलने लगी है
तन मन मोरा आज झूम उठा है
दिल का मयूरा ठुमकने लगा है

कलियों ने फिर छेड़े तराने
भँवरे लगे फिर से गुनगुनाने
फूलों पे फिर से बहार आ गई है
रुत केसी मस्त फुहार लाई है

घिर आये हैं बदरा  काले
नैन अब नहीँ बरसने वाले
खुशियों के अब रंग मिले हैं
हरसू अब तो फूल खिले हैं

पलकों को फिर चूमे आँचल
देखो बह  जाए न काजल
आज तो दिल झूमे मेरा
आया है फिर दिन ये सुनहरा
@मीना गुलियानी 

वो समा याद आ रहा है

गुज़रा वो समा याद आ रहा है
फ़साना वक्त फिर दोहरा रहा है

जिगर में तिश्नगी बढ़ने लगी है
पिए बिन भी नशा सा छा  रहा है

निगाहों में तेरी मस्ती का आलम
सितम ये केसा मुझपे ढा रहा है

तेरी वो गुफ्तगू याद आ गई है
चिरागे दिल जलाये जा रहा है

हवा में तेरी खुशबू आ रही है
तब्बसुम पूरा घर महका रहा है

मुझे तुमने कहाँ पहुँचा दिया है
ज़माने से तो दिल जलता रहा है
@मीना गुलियानी 

चलें संग तुम्हारे मिलाके कदम

चलें संग तुम्हारे मिलाके कदम
रुकेंगे न हमदम तुम्हारी कसम

                     तेरे प्यार का ही लेके सहारा
                     तुम्हारे बिना न जीना गवारा
                     है जन्नत हमारी जहाँ तू सनम

चन्दा  की रोशनी बरसती रहेगी
महक से हवा भी बहकती रहेगी
फूलों सा महके तेरा गुलबदन

                   देंगी सहारा जो तेरी निगाहें
                   तो आसान होंगी हमारी  ये राहें
                   मिटा देंगे हर फासले को सनम

चाहे ये बदले सारा ज़माना
हमें डर है तुम न कभी दूर जाना
ठोकर पे सारा जहाँ है सनम
@मीना गुलियानी

Thursday, 8 September 2016

मुझे मेरे हाल पे छोड़ दो

मुझे तुमसे कोई गिला नहीँ
मुझे मेरे हाल पे छोड़ दो
न करूँगी तुमसे शिकवा कभी
जो साथ मेरा छोड़ दो

हैं  तूफाँ हज़ारों उठे  हुए
जो थे मेरे  जिगर में दबे हुए
,मैंने कबसे सम्भाला अरमानों  को
जो थे दिल में मेरे थे जगे हुए
न गिला है अब किसी बात का
इसे क्यों न इक नया मोड़ दो

तम्हे अपना कहने की चाह में
न ये दिल किसी का भी हो सका
तुझे भूलना भी मुझसे कभी
मुमकिन कभी भी न हो सका
ये लिखा था मेरे नसीब में
मेरा नाम लेना भी छोड़ दो

दिल मेरा यूं बेजुबान हो गया
जाने कैसी ये आज हवा चली
तू भी गैर हो गया आज तो
मचा  शोर है ये गली गली
मेरा दिल अगर कोई दिल नही
इसे सामने मेरे तोड़ दो
@मीना गुलियानी 


तू हमेशा ही मेरे साथ हो

चाहे दूर हो या तू पास हो 
पर तू कभी न उदास हो 
करती रहूँगी दुआ यही 
तू हमेशा ही मेरे साथ हो 

                      मैं न तुझसे रही थी जुदा  कभी 
                      न ही होंगी तुझसे खफा कभी 
                      यही वादा रहेगा अटल मेरा 
                      गर तुझको भी विश्वास  हो 

दिल तोडना किसी और का 
न कभी रहा है असूल मेरा 
दिल दुखाना चाहे जो तू कभी 
खुद अपना भी दुखेगा दिल तेरा 

                    आज़मा के देख ले तू ज़रा 
                    कर  यकीन  तू मेरा अब ज़रा 
                     मत बुरा मान मेरी बात का 
                     यह तो वक्त  है  एहसास का 
@मीना गुलियानी 

जब नैनो से हो छमछम

ये शाम की तन्हाईयां और बढ़ता जाए गम
आई हवा महकी फ़िज़ा पर साथ न आये तुम

तुम आओगे कब यह कहो ऐसे ही चुप से न रहो
आओगे पर तुम कब यहॉ से गुज़रे हर मौसम

दिल की कली खामोश है चुपचाप सी मदहोश है
हालत है दिल की ऐसी जैसे हो कोई बिरहन

तेरी याद ही दिल में यूँ बसी होठों पे आई न हँसी
सावन क्या बरसाए घटा जब नैनो से हो छमछम
@मीना गुलियानी 

Wednesday, 7 September 2016

जां किसी की जा रही है

जिंदगी की रफ्तार बढ़ती जा रही है
लगता है जैसे जां किसी की जा रही है

लम्हा लम्हा कट रही है जिंदगी
लगता है फिर सांस जैसे थम रही
जिस्म से रूह निकलती जा  रही है
घड़ी लो मौत की अब आ रही है

सिर्फ एहसास बनती जा रही है
चिता यादों की सजती जा रही है
दुआ लब से फिसलती जा रही है
शमा जलती  पिघलती जा रही है

कुरेदो तुम न बुझती हुई चिंगारी को
धीमे से सुलगते जा रहे अंगारो को
न देख पाओगे तुम अब हाल मेरा
इक शमा थी जो बुझती जा रही है
@मीना गुलियानी 

जाऊँ अब मैं कहाँ

साथी न कोई मंजिल दिया है न कोई महफ़िल
बतादे तू ऐ मेरे दिल जाऊँ अब मैं कहाँ

गलियां हैं मेरे गाँव की लगती है धूप छाँव सी
टूटे हुए दिल को ले जाऊँ कहाँ

पत्थर के सब बन गए हमदर्द दर्द बन गए
दवा दिल की मैं अब ढूँढू कहाँ

मिलता न ऐसा ठिकां गम का न हो जहाँ निशां
ऐसी जगह अब पाऊँ कहाँ
@मीना गुलियानी 

चैन कहाँ आराम कहाँ

काँटों  पर चलने वालों को चैन कहाँ आराम कहाँ
अपना मन छलने वालों को चैन कहाँ आराम कहाँ

जीवन तो है बहता पानी यही है इसकी कहानी
कैसे रोकेगा कोई इसको दरिया हो या जवानी
रिश्तों को बदलने वालों को चैन कहाँ आराम कहाँ

मन तो है इक पागल पंछी कैसे इसे समझाएं
उड़ता रहे ये धुन में अपनी कोई बाँध न पाए
पिंजरे में ही पलने वालों को चैन कहाँ आराम कहाँ

दिल का सूनापन तो देखो मन वैरागी गाये
मनवीणा का तार जो टूटा सुर भी कैसे आये
सुर ताल बदलने वालों को चैन कहाँ आराम कहाँ
@मीना गुलियानी 

Tuesday, 6 September 2016

मेरा लुट गया खज़ाना

मेरी हसरतों की दुनिया तू न आंसू अब बहाना
जो था ख्वाब कभी तेरा तू उसको भूल जाना

जो बहार आज आई संग है खिज़ा भी लाई
हर फूल कह रहा है मैं तो भूला मुस्कुराना

दिल बेकरार था जो तेरे प्यार में हमेशा
वो टूटा हुआ पड़ा है गायेगा कैसे गाना

न तो साज़ में ही सुर है न ही ताल में वो लय है
घुंघरू की थमी छमछम कोई गाये न तराना

मिला साथ जब तुम्हारा हम जहाँ को भूल बैठे
अब साथ जब जहाँ है मेरा लुट गया खज़ाना
@मीना गुलियानी 

दर्द बनती जा रही है जिंदगी

धूप का कतरा बनती जा रही है जिंदगी
छाँव से दूर जा रही है जिंदगी

जाने क्यों वो रूठे हैं हमसे
दर्द बनती जा रही है जिंदगी

जहाँ ये नुमाइशघर बन गया
तन्हा तन्हा है मेरी ये जिंदगी

दिल की तिश्नगी यूं बढ़ने लगी
पीड़ा का समुंद्र बनी ये जिंदगी

सब्र जैसे कैद होके रह गया
मुक्ति को छटपटा रही है जिंदगी

हरसू है अँधेरा सा इक छाया हुआ
रोशनी से कतरा रही है जिंदगी

सितम हमपे बेशुमार होते रहे
मांगती है अब हिसाब जिंदगी
@मीना गुलियानी