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Wednesday, 30 November 2016

वापिस घर लौटके आएं

जब भी बिजली चमकती है

मैं भीतर से कांप उठती हूँ

उलझ गए हैं जिंदगी के धागे

सब धुआँ धुआँ सा दिखता है

वो जिंदगी जिसमें थी भाषा

मूक हो गई खो गई है आशा

गुज़रा सावन भरा था उपवन

पड़ा अब सूखा हरा था मधुबन

चौका गया मुझको पवन का झोंका

कितनी ही बार मैंने मन को रोका

बादलों का घुमड़ना लहरों का उमड़ना

लहराती  चुनरिया बलखाती जुल्फें

घटा जैसी लगती भीगी सी अलकें

कहदो पवन से धीमे से आये

पायल बासन्ती से नगमे गाये

झनक झनक कर क्या बतलाये

मीठे मीठे बोलों से समझाए

पी पी पपीहा भी शोर मचाये

दिल की अगन भी बढ़ती जाए

कोई तो कहदे  जाके मेरे पिया से

जल्दी से वापिस घर लौटके आएं 
@मीना गुलियानी 

Tuesday, 29 November 2016

जिन्दगी

कल जिन्दगी की झलक देखी
वो मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी
मैंने उसे ढूंढा यहाँ वहाँ पर
वो हँसकर गुनगुना रही थी

                           कितने समय बाद पाया मैंने भी करार
                           वो कितने प्यार से मुझे थपथपा रही थी
                           हम क्यों खफा रहते हैं सबब बता रही थी
                           जिंदगी मुझे दर्द देकर जीना सिखा रही थी

 चोट खाकर भी मुस्कुराना पड़ेगा
रोते रोते भी हंसके गाना पड़ेगा
इसी का ही तो नाम जिन्दगी है
 जीने का सलीका समझा रही थी
@मीना गुलियानी 

दिल ये कभी टूटे ना

आओ बसा लें अपनी जन्नत जिसको ज़माना लूटे  ना
खुशियाँ या गम साथ सहें हम हाथ हमारा छूटे ना

तू मेरे लिए मैं तेरे लिए एक दूजे के हो जाएँ
न गम हो जहाँ खुशियाँ हो वहाँ
ऐसा जहाँ हम बसाएँ
तू भी लगादे दिल की बाजी
खेल अधूरा छूटे ना

हर पल हो हँसी न आँखे हो नम इतनी ख़ुशी हम पाएं
मिलते ही रहें न बिछड़ें कभी
वो आशियाँ हम बनायें
तुम भी कभी न रूठो मुझसे
मैं भी कभी रूठूँ ना

मिले चाहे ख़ुशी या मिले कोई गम संग मिलके हम बंटाएं
चाहे थोड़ा मिले चाहे ज्यादा मिले
संग संग जीवन बिताएं
थाम लेना आगे बढ़कर
दिल ये कभी टूटे ना
@मीना गुलियानी

Monday, 28 November 2016

इक पल न बिसराना मुझे

इस बेताब दिल की तमन्ना कैसे बताएँ 
तुम खुद ही समझ लो हम कैसे समझाएँ 

सूना सूना दिल था मेरा जबसे तुम न आये थे 
हर पल भटकता फिरता था सपने हुए पराए थे 
खुशियाँ भी थीं गैरों की आँसू हरदम बहते थे 
कैसे तुमको बताएँ हम जिन्दा कैसे रहते थे 

लेकिन तुम मिले हो जबसे जीवन तुम्हीं से पाया है 
दिल में तुम्हीं समाये हो अपना हुआ पराया है 
भूले हैं हम बिसरे क्षण कल्पित हुए व्यथित मन 
मिला सहारा जब तेरा पुलकित हुआ है मेरा मन 

अब तू मुझको भुलाना न सीने में छुपालो मुझे 
धड़कन बनाके तुम अपनी बाहों में समालो मुझे  
दिल से दूर न करना कभी यादों में बसालो मुझे 
इतना प्यार मुझे करना इक पल न बिसराना मुझे 
@मीना गुलियानी 

Sunday, 27 November 2016

गीत मेरे संग में गाती तो है

कितनी चंचल है नदी की ये धारा
इस पार से उस पार जाती तो है

दिल का दिया भी बुझने को है
लाओ चिंगारी इसकी बाती तो है

लहरों का अस्तित्व मिटने से पहले
सागर के तट पर टकराती तो है

संध्या ने ओढ़ी है अपनी काली चुनरिया
फिर भी रात के बाद भोर आती तो है

मानती हूँ कि अभी तक हूँ मैं खाली हाथ
मगर पवन गीत मेरे संग में गाती तो है
@मीना गुलियानी 

Saturday, 26 November 2016

कर डाला बदनाम मुझे

सबसे पहले प्यार के तुमने भेजे थे पैगाम मुझे 
आज उन्हीं पैगामों ने ही कर डाला बदनाम मुझे 

पायल के घुँघरू भी छनके आई न आवाज़ तुझे 
तुम भी थे मसरूफ़ उधर तो थोड़ा सा काम मुझे 

जो करते हैं जख्मी हमको देंगे न इल्ज़ाम तुझे 
एक ज़रा सा हमने टोका कर डाला बदनाम मुझे 

कितने नश्तर दिल में चुभोए दिया न था इल्ज़ाम तुझे 
तुमने तो कोहराम मचाकर कर डाला नाकाम मुझे 

तेरे फूलों की ठंडक से आता था आराम मुझे 
लेकिन अब उसके कांटे भी देते हैं आराम मुझे 
@मीना गुलियानी 

दिल की बात रही फिर दिल में

दिल की बात रही फिर दिल में
आज तलक भी जुबाँ पे न आई
कितनी बार मिले तुम मुझसे
कितनी बार मैं तुम तक आई

हर पल सोचा कहदूँ तुमसे
हर पल तुमसे ही सकुचाई
जोशे जवानी उमड़ी भी तो
लेकर रह गई वो अंगड़ाई

तेरी आँखे कुछ भीगी सी
मीठे सपनों से भर आई
बिन बोले  समझ गए तुम
मैं तो कुछ समझा न पाई

चाँद हमारे ऑंगन उतरा
चाँदनी भी बरसाता रहा
प्यार का डोला संग में लेके
शीतल सी चली पुरवाई
@मीना गुलियानी 

Friday, 25 November 2016

विश्राम दे दो

मेरे मन की पीड़ा को तुम तनिक विश्राम दे दो 
बादलो घुमड़ना छोडो अब तनिक आराम दे दो 
भूलना चाहती हूँ मैं भी वेदना के सारे वो पल 
बरसा दो आँगन में बूँदे अब ज़रा आराम दे दो 

पी पी करके पपीहा थक चुका है अब तो वह भी 
अब न तरसाओ  क्लान्त मन को शान्ति दे दो 
दुःख से घबराने लगा मन पीड़ा के निष्ठुर हैं क्षण 
आओ बहुत विचलित हुआ मन इसे विराम दे दो 

इक तुम्हारे आने से खिल उठेगा मन का ये उपवन 
सुरभि फिर महकाएगी तन मन पुलक उठेगा गुलशन 
कोई भी  उदासी छू न पाए करो ऐसे अमृत से सिंचन 
तुम्हारे ये बोल मीठे मोह लेते मन बन जाता वृन्दावन 
@मीना गुलियानी 


Thursday, 24 November 2016

कौन हो तुम

कौन हो तुम जो मेरे हृदय में समाये हुए हो

कौन  जो मेरी कसक को बढाये हुए हो

कौन हो तुम जो अपनी मधुरता बढाये हुए हो

कौन हो तुम अपरिचित लोचनों में समाये हुए हो

कौन हो तुम जो मेरे स्वप्नों में समाये हुए हो

कौन हो तुम जो मेरी  नींदें उड़ाए हुए  हो

कौन हो तुम जो मेरी साँसों में समाये हुए हो

कौन हो तुम अपने प्रेम में बन्दी बनाये हुए हो
@मीना गुलियानी 

Wednesday, 23 November 2016

आँसुओं को न ढलकाना

तुम ज़रा अब खामोश हो जाना 
सुनाती हूँ तुम्हें मैं अफसाना 
न भरना अपनी आँखों में आँसू 
सुनो जब मेरा तुम ये फ़साना 

डूबने को है अब सफीना मेरा 
जब मैं आवाज़ दूँ तुम चले आना 
मेरी मुश्किलें सारी दूर हो जायेंगी 
ऐसे आलम में तुम नज़र आना 

मेरी किश्ती लगा दो साहिल के  पार 
तूफानों से कहदो जिंदगी में न आना 
तुमको आखिरी सलाम भेजा तो है 
अपने आँसुओं को न अब ढलकाना 
@मीना गुलियानी 

Tuesday, 22 November 2016

तेरा दीदार काफी है

जगत के रंग क्या देखूँ तेरा दीदार काफी है
करूँ इकरार मैं  किस से तेरा प्यार काफी है

न भाएँ अब ये दुनिया के निराले रंग ढंग मुझको
तेरे चरणों  से हो प्रीति  तेरा उपकार काफी है

जगत के रिश्तेदारों ने बिछाया जाल माया का
तेरे  भक्तों से हो प्रीति यही परिवार काफी है

जगत की फीकी रोशनी से आँखे भर गई मेरी
मेरी आँखों में बस जाओ  तेरा दीदार काफी है

जगत के साजों बाज़ो से हुए अब कान भी बहरे
करो कृपा सुनूँ अनहद तेरी झन्कार काफी है
@मीना गुलियानी 

Tuesday, 15 November 2016

घर से बाहर निकलना पड़ेगा

जिंदगी एक किराये का घर है एक न एक दिन निकलना पड़ेगा
मौत जिस वक्त आवाज़ देगी घर से बाहर निकलना पड़ेगा

शाम के बाद होगा सवेरा देखना है अगर दिन सुनहरा
पाँव फूलों पे रखने वालो एक दिन काँटों पे चलना पड़ेगा

ढेर मिट्टी का हर आदमी है होना मरने पे सबका यही है
या ज़मी में समाधि बनेगी या चिताओं में जलना पड़ेगा

चन्द लम्हे ये जोशे जवानी चार दिन की है ये जिंदगानी
ऐ पिया शाम तक देख लेना चढ़ते सूरज को ढलना पड़ेगा
@मीना गुलियानी 


Monday, 14 November 2016

हरदम सहारा तेरा चाहिए

आसरा इस जहाँ का मिले न मिले
मुझको तेरा सहारा सदा चाहिए
चाँद तारे फलख पे दिखें न दिखें
मुझको तेरा नज़ारा सदा चाहिए

यहाँ खुशियाँ हैं कम और ज्यादा हैं गम
जहाँ देखो वहाँ पर हैं सितम ही सितम
मेरी महफ़िल में शमा जले न जले
मेरे दिल में उजाला तेरा चाहिए

कभी वैराग्य है कभी अनुराग है
जहाँ बदलें हैं माली वही बाग़ है
मेरी चाहत की दुनिया बसे न बसे
मेरे दिल में बसेरा तेरा चाहिए

मेरी धीमी है चाल और पथ है विशाल
हर कदम पर मुसीबत है तू ही सम्भाल
पाँव मेरे थके हैं चलें  न चलें
मुझको हरदम सहारा तेरा चाहिए
@मीना गुलियानी 

Thursday, 10 November 2016

बंजारा हूँ -बंजारा हूँ

बंजारा हूँ मैं गलियां कूचे घूमता हूँ
न हारा हूँ - बंजारा हूँ -बंजारा हूँ

घर बार नहीँ संसार नहीँ
करता मैं किसी से प्यार नहीँ
बोले जो प्रेम से तो मैं जग हारा हूँ

कोई मीत नही कोई प्रीत नहीँ
गाता रहता पर गीत यहीँ
सुनसान डगर अन्ज़ान नगर बेचारा हूँ

मस्ती में अपनी खोया हूँ
पर दिल ही दिल में रोया हूँ
वीरान नगर बेजान जिगर का मारा हूँ

कल क्या हो जाए किसको खबर
भूले हैं हम अब खुद की डगर
है नाव पुरानी मैं केवट बंजारा हूँ
@मीना गुलियानी 

Wednesday, 9 November 2016

हसरतों के सोग की रात

कैसे मैं भुला पाऊँगा अपनी वो मुलाक़ात की बात
हँसते हँसते ही कट जाती थी मेरी हर इक रात

                         तेरी आँखों से की जाम पिए थे मैंने
                         तेरे रुखसार पे की वादे किये थे मैंने
                         रंग और नूर में वो भीगी सी रात

तेरे ही प्यार से जीने का सलीका सीखा
कैसे हर चोट में मुस्काएँ तरीका सीखा
सिलसिला प्यार में मिट जाने की रात

                          तुमसे मिलने में कई बार तो नाकाम हुए
                          कभी मिल भी लिए तो यूँ ही बदनाम हुए
                          शोक में डूबी हसरतों के सोग की रात
@मीना गुलियानी 

कैसे भूलें वो लम्हें ख़ुशी के

मुझको याद आ रहा है
मेरा वो गुज़रा जमाना
वो तेरा यूँ दूर जाना
फिर लौटके न आना

                           हाथों से चेहरे को छिपाना
                           होले होले से पर्दा गिराना
                           बन्द आँखों से  वो शर्माना
                           भीगी पलकों से मुस्कुराना

याद आती हैं भोली अदाएं
वो लरजती हुई सी सदायें
फैली बाहें जो मुझको बुलायें
कहदो हमपे न बिजली गिराएं

                          उफ़ ये तेरी बिखरी सी जुल्फें
                          छीनती हैं सुकून तुझसे मिलके
                          कहीँ करदे न टुकड़े ये दिल के
                          कैसे भूलें वो लम्हें ख़ुशी के
@मीना गुलियानी

Tuesday, 8 November 2016

आज पिया मोरे घर आयेंगे

मंगल गाओ खुशियाँ मनाओ
आज पिया मोरे घर आयेंगे

लिख लिख भेजी थी
पिया को जो पतियां
आज तो होंगी पिया से
मोरी जियरा की बतियाँ
गाओ बधाई बाँटो मिठाई
आज ---------------------

सारे शगुन आज हो गए पूरे
सपने मेरे अब रहे न अधूरे
पी पी बोले कोयलिया काली
झूमे ख़ुशी से वो डाली डाली
फूलों से खुशबू आये मतवाली
आज ---------------------------

सखी तुम मुझे सजाओ री
हल्दी कुमकुम लगाओ री
माथे बिंदिया टीका सजाओ
 पायल  बिछिया भी पहनाओ
मेरे हाथों में मेहँदी लगाओ
आज ---------------------------
@मीना गुलियानी 

एक पत्नी की मनुहार पति से

नहीँ कहती आपसे चाँद तारे तोड़ लाओ 
जब आते हो एक मुस्कान साथ लाओ   

नहीँ कहती कि मुझे सबसे ज्यादा चाहो 
पर प्यार की एक नज़र तो उठाया करो 

नहीँ कहती कि बाहर खिलाने ले जाओ 
पर एक पहर साथ बैठके तो खाया करो 

नहीँ कहती कि हाथ तुम भी बंटाओ मेरा 
पर कितना करती हूँ देख तो जाया करो 

नहीँ कहती कि हाथ पकड़कर चलो मेरा 
पर कभी दो कदम तो साथ आया करो 

यूँ ही गुज़र जाएगा सफर भागते भागते 
एक पल थक के साथ बैठ जाया करो 

नहीँ कहती  कि कई नामो से पुकारो 
एक बार फुर्सत से 'सुनो'कह जाया करो 
@मीना गुलियानी 

Monday, 7 November 2016

अमृत की बूँदे छलकाने लगी

तेरी खिड़की से छनती हुई धूप 
मेरी  नज़रों में समाने लगी 
कुछ प्रेम भरे सपने यादों के 
आँखें पलकों में सजाने लगीं 

 अधखुली आँखों ने देखे थे 
कुछ सपने वो अधूरे से ही 
मतवाली रुत की वो बदली 
आसमाँ पर लो छाने लगी 

कोयलिया की कुहुक प्यारी 
लागे मन में मीठी कटारी 
यादों की सिहरन वो जगाये 
मीठे बोलों से मन हर्षाए 

इठलाती सी बाजे पायलिया 
दूर बाजे पिया की मुरलिया 
फूलों की खुशबू मन लुभाए 
हँसके बोले वो नज़रें झुकाए 

हर अदा उसकी मेरे मन को भाए 
तन छुए जब मस्त पवन लहराए 
चले झूमकर आँचल को बिखराये 
चन्दा उतरा किरणों को छितराये 

तेरी खिड़की से आती  रोशनी 
अब चन्दा को भी भाने लगी 
 उसकी किरणें प्यार लुटाने लगी 
वो अमृत की बूँदे छलकाने लगी
@मीना गुलियानी 


फिर से लौट आओगे

तुमको भूल जाने की कोशिश में
यूँ ही दिन रात जीते मरते हैं
यूँ ही यादों में दिन गुज़रता है
लम्हे यूँ ही मेरे  गुजरते हैं

                                   सोचा न था कि दिन ऐसा भी कभी आएगा
                                   तेरा साया भी कभी दूर मुझसे जाएगा
                                    हमने तो तुझे अपने सीने में छिपा रखा था
                                    क्या पता था  दामन छुड़ाके निकल जाएगा

बीते लम्हो की यादें ही सिर्फ बाकी हैं
वो पल जो गुज़रे साथ वही मेरे साथी हैं
यकीं है  मुझे तुम भी न भुला पाओगे
  मेरी दुनिया में  फिर से लौट आओगे
@मीना गुलियानी 

Sunday, 6 November 2016

दिल दुखाया न करो

कल न जाने क्या बात हुई 
तुमसे जो न मुलाक़ात हुई 
हमने तो लाख पुकारा तुमको 
 तुमने न मुँह फेरके देखा मुझको 

                                     न जाने दिल ही दिल में क्या बात हुई 
                                     यूँ ही दिन ढल गया और रात गई 
                                      नींद आँखों से कोसोँ मेरी दूर हुई 
                                       तन्हाई  भी मिलने को मजबूर हुई 

ऐसे तुम यूँ छोड़के जाया न करो 
जब पुकारूँ तुझे सामने आया करो 
यादें तेरी दिल को बड़ा तड़पाती हैं 
इस  तरह दिल को दुखाया न करो 
@मीना गुलियानी 

दामन छुड़ाया न करो

आज दिल फिर मिलने को बेताब है

क्या जाने कब हो उनसे इन्तेखाब है

तेरी नज़रों में न जाने छुपी क्या बात है

जाने कितने छिपे दबे हुए से राज़ हैं

दिल उन सबको जानने को बेकरार है

तेरी धड़कनो में भी इक मधुर गीत है

इक मीठी सी धुन है इक संगीत है

तुझसे मेरे मन को मिलती राहत है

हर पल तेरे ही आने की तो आहट है

 खिड़की क्यों तेरे नाम से बज उठती है

हवा भी बार बार तुझे पुकार उठती है

झुककर ये हवा तुझे सलाम करती है

फूलों की महक भी तुझे छूकर उड़ती है

भँवरों की टोलियाँ करती हैं अठखेलियाँ

तुझसे ही वो करती रहती हैं ठिठोलियाँ

वरना मेरे सामने तो कभी आती नहीँ

अपना मुँह छिपाती हैं नज़र आती नहीँ

तुम इक पल भी कहीँ दूर जाया न करो

दिल लगता नहीँ दामन छुड़ाया न करो
@मीना गुलियानी 

Saturday, 5 November 2016

कबहुँ न पायो चैन

साजन तेरी याद में तड़पत हूँ दिन रैन
इक पल भी तेरी याद में कबहुँ न पायो चैन

इक पल तो आ जाओ तुम
मुझको न तरसाओ तुम
पल छीन बीते युग समान
बरसत मोरे नैन

बाट तेरी निहारुँ मैं
इक पल भी न बिसारुं मैं
गुज़रो तुम जिस  राह से
उनपे बिछादूँ नैन

प्रीतम तुम कब आओगे
आके दरश दिखलाओगे
तड़पत हूँ मैं मीन ज्योँ
आओ तो चैन
@मीना गुलियानी 

Friday, 4 November 2016

जान गई मैं भी जान गई

जान गई मैं तुमको जान गई 
काहे आये हो मुझको सताने 
मोरा भोला जियरवा लुभाने को 

तोरा मनवा भया है दीवाना 
आये तुझको भी दिल को लुभाना 
जान गई मैं भी जान गई 
हार गई तुमसे मैं बालम 
काहे उलझे हो नैना लड़ाने को 

भूली सारी जिया की मैं बतियाँ 
लिख लिख भेजी तुझको जो पतियाँ 
जान गई मैं भी जान गई 
वैरी मोरा जियरवा न माने 
बोलो काहे को आये रिझाने को 

पूछें हँस हँस के सारी ये सखियाँ 
कहदूँ कैसे पिया की मैं बतियाँ 
जान गई मैं भी जान गई 
काहे तू मोहे सताये 
क्यों न आए तू मोहे मनाने को 
@मीना गुलियानी 

Thursday, 3 November 2016

पिया जी तोहे मन में बसाके

दिल को न आये चैन पिया जी तोसे नैना मिलाके
हम तो हुए बेचैन पिया जी तोहे मन में बसाके

बरसों पहले न था ये ऐसा
दर्द जगा जो पाया न ऐसा
जागूँ मैं सारी सारी रैन

 उड़ गई मोरी आँखों की निंदिया
पूछे  मुझसे माथे की बिंदिया
कासे कहूँ मैं बैन

पड़ गई तेरे प्यार में सैयां
भूली डगर हुई भूल भुलैया
तड़पत हूँ दिन रैन
@मीना गुलियानी



पवनिया धीरे चलो

मोरे सैंया जी आएंगे द्वार रे
पवनिया धीरे चलो
लेके डोलिया भी आए कहार रे
पवनिया धीरे चलो

नदिया गहरी बहता पानी
कल कल धारा नाव पुरानी
सर पे खड़ा मंझधार रे
पवनिया -------------------

उड़ उड़ जाए मोरी चुनरिया
लागे न किसी की नजरिया
नज़रें उठें बार बार रे
पवनिया ------------------

आये पिया आज दिल मेरा डोले
संग संग नैया भी खाये हिचकोले
डोली ले चले कहार रे
पवनिया ----------------------
@मीना गुलियानी