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Thursday, 30 June 2016

तेरी रंग भरी ओढ़नी

 पिया मैने ओढली तेरी रंग भरी ओढ़नी 

तूने प्यार से दीन्हि मुझको 
रंग भी सारे दे दिए मुझको 
भीग गई तेरे रंग में ,भीगी ये ओढ़नी 

पिया न  फीका पड़े अब रंग 
ऐसो रंगो न होवे बदरंग 
कसके चास लगाओ ,फीकी न होवे ओढ़नी 

कितने जतन से ओढूँ इसको 
प्रेम से कितने सहेजूँ इसको 
बार बार मुस्काऊँ पहनकर तेरी ये ओढ़नी 
@मीना गुलियानी 

भजनमाला ---62

हर हाल में दाता का हम शुक्र मनाते है 
जिस रंग में तू रंगदे हम रंगते जाते है 

तेरी मर्जी है दाता चाहे तो तख्त बिठा 
तेरी मर्जी है दाता चाहे तो  भीख मंगा 
तेरी रज़ा में हम दाता ख़ुशी मनाते है 

तेरी दासी हूँ दाता तू साथ निभा देना 
अगर भूल  चूक हो जाए तो माफ़ कर देना 
तेरे दर पे हम दाता ये अलख जगाते है 

तू बक्शनहार है मै गुनहगार दाता 
तेरी कृपा से दाता सब कष्ट टल जाता 
मुझे पार कर भव  लाखों तर जाते है 

दरबार से तेरे कोई खाली न जाता 
रोता हुआ जो अाए हँसता हुआ है जाता 
जिन्हें जग ने है ठुकराया अपनाए जाते है 

तेरे भंडार में  नहीं कोई कमी दाता 
खाली झोली भी तुझसे भरवा के ले जाता 
यहाँ जन्मों के दाता सब फन्द छुड़ाते है 
@मीना गुलियानी 

भजनमाला ---61

सदा सत्सग की महिमा ,  मुबारक हो मुबारक हो 

जगत को जलता देख करके प्रभु ने ज्ञान घटा भेजी 
बुझावे ताप त्रय को जो मुबारक हो मुबारक हो 

शोक  संशय सभी भागे गर्जना संतों की सुनके 
पिलावें ज्ञान अमृत को मुबारक हो मुबारक हो 

बिना जप योग यज्ञ तप के सत्संग भवतारन गंगा 
समागम संतों का ऐसा मुबारक हो मुबारक हो 

भवसिंधु पार होने को जहाज सत्संग है जग में 
खिवैया पूर्ण सतगुरु मुबारक हो मुबारक हो 
@मीना गुलियानी 

Wednesday, 29 June 2016

याद फिर मुझे आने लगी है

तुम्हारी याद फिर मुझे आने लगी है
हवाओं में मस्ती सी छाने लगी है

कैसा हँसी आज ये पल हो गया है
बेखुदी सी  मुझपे अब छाने लगी है

सितारों से आगे जहाँ और भी है
बहारें ये संदेश लाने लगी है

तेरी नज़रों ने मुझको घायल किया है
सबा पैगाम लेके आने लगी है

उठाओ ये घूँघट ज़रा मुस्कुरा दो
नज़र तेरी बिजली गिराने लगी है
@मीना गुलियानी

भजनमाला -----60

दुखियों का सहारा तू ही तो है
दुनिया में हमारा तू ही तो है
तू ही तो है सांई तू ही तो है

भव सागर पार कराए तू ही
दुखियों के कष्ट मिटाए तू ही
जीवन रखवारा तू ही तो है

तेरे नाम में पावन शक्ति है
वो ही भक्त की प्रेमळ भक्ति है
वो आत्म आधारा तू ही तो है

तू ही राम रहीम खुदाया है
सबमें तू ही सांई समाया है
जिसे दिल ने  पुकारा तू ही तो है

जब भक्त शरण में आते है
सांई सोये भाग्य जगाते है
भवतारंनहारा तू ही तो है
@मीना गुलियानी

तुम्हीं मीत मेरे

तुम्ही देवता हो तुम्हीं मीत मेरे
तुम्हीं प्राण वीणा के संगीत मेरे

तुम्हीं मन के मंदिर में दीपक सलोने
मधुर ज्योति में हँस रहे चारों कोने
हर इक साँस आती है दीपक संजोने
तुम्हीं हो अँधेरे क्षणों के सवेरे

व्यथा भार मन प्राण कब तक सहेंगे
नयन आज तुमसे हृदय की कहेंगे
सदा रैन दिन तेरे निकट रहेंगे
फूलों से कोमल है गीत मेरे
@मीना गुलियानी

Tuesday, 28 June 2016

भजनमाला ---59

हे दयामय आपका हमको सदा आधार हो
आपके भक्तो से भरपूर ये परिवार हो

छोड़ देवें काम को और क्रोध को मद मोह को
शुद्ध और निर्मल हमारा सर्वदा आचार हो

प्रेम से मिल मिलके सारे गीत गाएँ आपके
दिल में बहता आपका ही प्रेम पारावार हो

जय पिता जय जय पिता हम जय तुम्हारी गा  रहे
रात दिन घर में हमारे आपकी जयकार हो

पास अपने हो न धन तो उसकी कुछ परवाह नहीं
आपकी भक्ति से ही धनवान ये परिवार हो
@मीना गुलियानी

भजनमाला ----58

करो हरि नैया मेरी पार तुम बिन कौन बचावनहार

पाप प्रलोभन इंजन भगवन खींच करो मंझधार
मन केवट माया के मद में घेरा पञ्च मकार

ढीली पड़ी सुरत की डोरी स्वामिन तुम्हें बिसार
बार बार टकरत दुःसह दुःख टूट गयो पतवार

नाव पुरानी झांझरी हो गई क्षण में डूबंनहार
बल्ली हाथ गहो करुणाकर पार करो करतार
@मीना गुलियानी

भजनमाला ----57

मुझे ऐसा बना दो मेरे प्रभु जीवन में लगे ठोकर न कहीं
जाने अन्जाने भी मुझसे अपकार किसी का हो न कहीं

उपकार सदा करता जाऊँ दुनिया अपकार भले ही करे
बदनामी न हो जग में मेरी कोई नाम भले ही दे न कहीं

तू ही इक ऐसा साथी है दुःख में भी साथ नहीं तजता
दुनिया ये प्यार करें न करें खोऊँ तेरा भी न प्यार कहीं

जो तेरा बनकर रहता है काँटों में गुलाब सा खिलता है
कितने ही कांटे पाँव चुभें पर फूल भी हों कांटे न कहीं

मन में हो पूर्ण कलश मेरा आँखों में ज्योति छलकती हो
तुमसे मधु पीने को ऐसा जगता ही रहूँ सोऊं न कहीं

मै क्या हूँ क्या मेरा पथ है यह सत्य सदा मै समझ सकूँ
इस सत्य पथ पर चलते चलते मेरे पाँव थके न रुकें न कहीं
@मीना गुलियानी 

Monday, 27 June 2016

मकां सा है

आसमां आग ये उगलता है

सारा मंजर धुँआ धुँआ सा है

तुमसे दुश्मनी क्या हुई

ख़ाक गुलिस्तां सा है

शहर ये बेजुबां सा है

ले गया कहकहे हमारे सब

जो बना मेहरबां सा है

 मुन्तज़िर यूँ तो ये जहाँ सा है

तेरी दहलीज़ पर कदम जो पड़े

जगमगाने लगा मकां सा है
@मीना गुलियानी

कैसे बता सकूँगा मैँ

तुझपे ये दिल निसार क्यों
जाने है तुमसे प्यार क्यों
रहता है दिल बेकरार क्यों
कैसे बता सकूँगा मैँ

पहले तुम्हारे गाँव में
पेड़ों की घनी छाँव में
आँखे हुई थी चार क्यों
कैसे बता सकूँगा मैँ

तुमको नज़र में बंद किया
दिल ने तुम्हें पसंद किया
जीना हुआ दुश्वार क्यों
कैसे बता सकूँगा मैँ

दुनिया में कुछ कमी नहीं
फिर भी तुम्हारी याद में
रहता हूँ बेकरार क्यों
कैसे बता सकूँगा  मैँ
@मीना गुलियानी

भजनमाला ------56

हे दयामय आप ही संसार के आधार हो 
आप ही करतार हो हम सबके पालनहार हो 

जन्मदाता आप ही माता -पिता भगवान हो 
सर्व सुखदाता सखा भ्राता हो तन धन प्राण हो 

आपके उपकार का हम ऋण चुका सकते नहीं 
बिन कृपा के शांति सुख का सार पा सकते नहीं 

दीजिये ऐसी मति करें शुभ कर्म हम संसार में 
मन हमारा धर्ममय हो और तन लगे उपकार में 
@मीना गुलियानी 

भजनमाला --------55

इतना तो करले बन्दे दुनिया के बीच आके 
न बाँध पाप गठरी ले जा खरी कमा के 

नेकी वो दर किनारे मत बाँध पाप भारे 
यमदूत आगे मारे न जा तू धोखा खाके 

शुभ कर्म को विसारी पापों की पूँजी डारी 
आगे मंजिल करारी रख  पाँव तू जमा के 

होशियार होके चलना एक दिन है तुमको जलना 
फिर होए न सम्भलना जब काल सर पे ताके 

घर माल मुल्क खज़ाने कोई न संग जाने 
सब यूं ही रह जाने सुन ले तू दिल लगा के 
@मीना गुलियानी 

Sunday, 26 June 2016

बलमवा तेरे लिए

मैंने कितने ही सितम उठाए बलमवा तेरे लिए

निर्मोही संग प्रीत लगा के
राह तकत रही नैन बिछाके
ताने जग के सहे है मैने बलमवा---------

सबक वफ़ा का सिखाया न जाए
सीखो तो फिर भुलाया न जाए
दर्दे - गम को छुपाया है मैने बलमवा ----------

ख़्वाबों ख्यालों में मुहब्ब्त कैसी
हम पे बीती क़यामत ये कैसी
पूछे जो कोई  कैसे बताऊँ बलमवा -----------

हमपे बीती क़यामत ये कैसी
बुझे जो हवा से शिकायत कैसी
मैने लाखों के ताने सहे बलमवा --------------
@मीना गुलियानी 

दिल से हम भुला न सके

दिल से हम तुम्हें  भुला न सके

साथ आँखों ने हमारा तो दिया
आंसुओं ने सहारा हमें दिया
दाग-ऐ -दिल फिर भी मिटा न सके

चाँद में देखी है तेरी सूरत
रात बन गई एक मुसीबत
गम के बादल हटा न सके

आहों ने तो भी आग लगाई
आरजुओं ने बिजली गिराई
हम जले दीप बुझा न सके
@मीना गुलियानी 

भजनमाला -----54

गुरुवर कृपालु मुझको अब शान्तिदान दे दो
चरणों में नाथ अब तो थोड़ा सा स्थान दे दो

जन्मों से भटकता हूँ पाया है क्लेश भारी
सुख शान्ति का अभय का समता का ज्ञान दे दो

विषयों के हलाहल ने व्याकुल मुझे किया है
रक्षा करो दयामय अमृत का पान दे दो

सुख दुःख से भरे जग के संवाद बहु सुने है
व्याकुल है कर्ण इनमे गुरुवर सुगांन दे दो
@मीना गुलियानी                                                   

भजनमाला ---53

भगवन मुझे बता दो भक्ति का भाव अब तो 
चित्त से मेरे हटा दो विषयों का भाव अब तो 

मुझको सता रहे है कामादि शत्रु भारी 
अपनी दया से हर लो इनका प्रभाव अब तो 

तृष्णा के सिंधु से जो तूफ़ान उठ रहे है 
इनसे है डगमगाई मेरी ये नाव अब तो 

आशा की तरंगों ने मुझको झकोर डाला 
संतोषमय बना दो मेरा स्वभाव अब तो 

अज्ञान अँधेरे में भटका बहुत समय तक 
भगवन प्रकाश देकर, हरलो कुभाव अब तो 
@मीना गुलियानी 

Friday, 24 June 2016

भजनमाला---52

कपट का क्रोध का भगवन कुटिलता का पुजारी हूँ        
विमुख हूँ भक्ति से तेरी महाविषयी विकारी हूँ

जो है निज स्वार्थ  के संगी उन्हें साथी समझता हूँ
नहीं सतसंग को खोजूँ मैँ मति मारा अनाड़ी हूँ

परम पावन तुम्हारे प्रेम को तजकर जगत रक्षक
मलिनता से भरे जग के विषय का मै शिकारी हूँ

कहूँ किससे सुनेगा कौन मेरी दुःख भरी गाथा
तेरी ही आस है भगवन तेरे दर का भिखारी हूँ
@मीना गुलियानी 

भजनमाला ---51

दयामय भूल जा अपराध मेरे तू दयालु है
क्षमा करदे क्षमा करदे क्षमा कर तू दयालु है 

पतित मैँ हूँ पतित तारण है तू निश्चय है ये मेरा 
मुझे पावन बनाकर तार दे शिव तू दयालु  है 

कई पतितों को तारा कष्ट अगणित के निवारे है
मुझे भी तार दे दुःख हार दे शिव तू दयालु है 

तेरा यश है मेरा उद्धार बनते काम दोनों के 
मै याचक हूँ दया का हे दयामय तू दयालु है 

मेरे कर्मो का क्षय करदे हृदय में शान्ति को भरदे 
अचल कर मन तो तू शंकर कृपाकर तू दयालु है 
@ मीना  गुलियानी 

Thursday, 23 June 2016

दिल की बगिया महकने लगी है

कहाँ से तुम चले आए ख्वाबों की दुनिया सजने लगी है
आने से तेरे बहार आ गई  दिल की बगिया महकने लगी है

संवरने लगे फूलों के गुंचे भी अब तो
हवा भी रुख अपना बदलने लगी है
खिली देखो सरसों जूही चमेली
कलियाँ भी अब तो खिलने लगी है

फूलों ने देखो बिछाई है चादर
उषा भी अपनी लाई है गागर
सूरज की लाली लगी है चमकने
गागर भी अब तो छलकने लगी है

हँसी शाम अब तो होने को आई
सितारों ने अपनी महफ़िल जमाई
चंदा गगन में लगा मुस्कुराने
शबनम भी देखो बहकने लगी है

रंगीन मौसम रुत भी जवां है
फूलों से महका गुलिस्ताँ है
मिले आज तुम अरमा जवां है
नशेमन की चिलमन दरकने लगी है
@मीना गुलियानी 

Wednesday, 22 June 2016

भजनमाला ---50

नाथ तोहे बाँह गहे की लाज
अपना जान उबारो भव से मेरा जीर्ण जहाज

अति मलीन मतिहीन दीन मैँ सजता खोटे साज
तदपि दया करी प्रभु तुमने दिखलाई भव पाज

मैँ कृतघ्न कपटी अति भारी दम्भिन को सिरताज
भूला तव उपकार परम पितु खाय बिगाड़ा नाज

यद्पि विषय भोग में फूला करता फिरा मिजाज
किन्तु याद आया जब तब तू हे स्वामिन सिरताज

अब तो कठिन बनी प्रभु मेरे बिगड़ चले सब काज
टेर सुनो अब तो दास की दूर करो भ्रम आज
@मीना गुलियानी                                                 

भजनमाला ---49

चरण में आपके गुरुवर अटल श्रद्धा रहे मेरी 
शरण में ही रहूँ निशदिन अटल श्रद्धा रहे मेरी 

न इच्छा भोग की हो रोग कुछ व्यापे नहीं तन में 
बने सद्योग का साधन अटल श्रद्धा रहे मेरी 

अहिंसक भाव हों मन में न हो प्रतिकार की इच्छा 
सदा सत्सग ही भावे अटल श्रद्धा रहे मेरी 

न हो अभिमान धन जन बुद्धि विद्या का कभी पैदा 
मिलेगा धाम ईश्वर का अटल श्रद्धा रहे मेरी 
@मीना गुलियानी 

Tuesday, 21 June 2016

भजनमाला ------48

प्रभु मेरे दोषन को मत हेरो,मेरो मन को घोर अंधेरो 

यद्पि अधम इंद्रिय के वश भोगत हूँ भव फेरो 
किन्तु आप ही प्रेरक सबके ज्यों चाहो त्यों प्रेरो 

मैँ हूँ दीं अधीन आपके तुम स्वामी मैँ चेरो 
करूँ याचना मैँ फिर किससे है उपहास घनेरो 

जाने अति दुःख पाये दयामय जहि भांति से टेरो 
सुनत बेर नहीं देर लगाई आय गयो अति नेरो 

तुम्हरो बिरद सुन्यो अति भारी है विश्वास घनेरो 
प्रभु जी टेर  सुनो निज जन की दयादृष्टि से हेरो 
@मीना गुलियानी 

भजनमाला ---47

मेरा उद्देश्य हो प्रभु आज्ञा को तेरी पालना 
कर कर कमाई धर्म की चरणों में तेरे डालना 

मानव के नाते हे प्रभु जाऊँ कहीं मैँ भूल भी 
इतनी विनय है आपसे बनकर सखा  सम्भालना 

जितने भी यज्ञ कर्म हों सेवा व प्रेम से करूँ 
आएँ अभद्र भाव जो उनको सदा ही टालना 

रक्षा तो मेरी तू करें रक्षा में तेरी मैँ रहूँ 
अपने ही साँचे में प्रभु जीवन को मेरे ढालना 

मृत्यु का मुझको भय न हो मांगता हूँ वर यही 
मेधा बुद्धि की ऐ प्रभु झोली में भिक्षा डालना 
@मीना गुलियानी 

Monday, 20 June 2016

भजनमाला ----46

ॐ भू                                           ॐ भू                                      ॐ भू 

मैने पूछा पपैया से ऐ पपैया बता  तेरा किसके विरह में तड़पता जिया 
है लगन  में मगन  दिल किसको दिया पी  पपी करता बता तेरा कौन पिया 
बोला - वही ईश्वर है मेरा प्यारा प्रभु ------------------  ॐ भू --------  ॐ भू 

वही आकाश गहन गिरि श्रृंगों में है वही बाग़ तड़ाग विहंगो में है 
वही सिन्धु की तरल तरंगो में है वही र्म हुआ सब रंगो में है 
फूलों में बसी उसकी खुशबु ------------------------------  ॐ भू --------  ॐ भू 

वही पूर्ण ब्रहम करूणा सिंधु वही प्रणतपाल  प्रिय प्राण प्रभु 
वही राजों का राजा गुरुओं का गुरु वही बन्धु सखा वही मात-पितु 
तेरी इच्छा हो पूर्ण हे प्यारे प्रभु ----------------------  ॐ भू ---------  ॐ भू 
@मीना गुलियानी 


तुझे महसूस किया है

कैसे कहूँ कि मैंने तुझे महसूस किया है

तुम छिपे हो इन हवाओं में
तुम छिपे हो इन लताओं में
इन फूलों की खुशबु में महसूस किया है

तुम्ही हो बादलों के गर्जन में
तुम्ही हो पायल की छमछम में
इन भँवरो की गुंजन में महसूस किया है

तुम ही सांझ और धूप  में
तुम ही रंग और रूप में
साँसों  के सरुर में महसूस किया है

तुम्ही छिपे हो गीत और संगीत में
तुम्ही छिपे हो सुर और प्रीत में
धड़कनो के गीत में महसूस किया है

तुम हो परिंदो की  परवाज़ में
तुम हो आस और विश्वास में
धरती आकाश में महसूस किया है
@मीना गुलियानी 



Sunday, 19 June 2016

भूली बिसरी याद

जब जिंदगी में आँख खुली 
पिता को मैंने पास पाया 
एक धुंधला सा चेहरा  वो 
फिर मुझे है याद आया 
उठाया जब गोद में उसने 
पहली वो पहचान हुई 
फिर अंगुली पकड़कर चलना सिखाया 
मेरी नन्ही जान के लिए 
बने वो भगवान समान 
निश्चिन्तता थी मन के भीतर 
मीठी बयार थी बहती 
दिनचर्या को मस्ती से जीना सिखाया 
अब किसी पगडण्डी पर पैर नहीं कांपते 
ऊबड़ खाबड़ ज़मीन पर कदम नहीं लड़खड़ाते 
लफ्ज़ नहीं कांपते ,मन नहीं घबराता 
ऐसा मुझे जीना सिखाया 
कोई चाहत अधूरी नहीं मन में 
ऐसा निर्मल ज्ञान कराया 
पिता बने मेरे लिए बरगद की छाया 
@मीना गुलियानी 

भजनमाला -----45

वो खुशनसीब है जिसको तुम्हारा द्वार मिला 
नसीब चमका और चैन बेशुमार मिला 

जमाने भर की हमने तो खाई ठोकर माँ 
तेरी शरण में आके ज़रा करार मिला 

किये सितम जो जमाने ने कैसे बतलाएँ 
मिला सुकून जो मुझको तेरा दुलार मिला 

मईया जी तुम न कभी भूलकर खफा होना 
तेरे सिवा  न मुझे कोई राज़दार मिला 

तेरी शरण हूँ मईया तुम न मुझको ठुकराना 
जमाने भर से सिला गम का बार बार मिला 
@मीना गुलियानी 

आत्मनिवेदन



अपने विषय में ज्यादा कुछ न कहकर सिर्फ इतना ही कहूँगी कि दिल्ली में मेरा जन्म हुआ फिर 

विवाहोपरांत जयपुर की होकर रह गई ।   जयपुर से ही तकनीकी शिक्षा विभाग में कार्यरत्त रहते हुए 

 वरिष्ठ अनुदेशिका के पद से सेवानिवृत हुई ।  हिंदी साहित्य में मैंने एम ए किया एवं महाकवि सूरदास 

तुलसीदास , जयशंकर प्रसाद आदि मेरे प्रिय कवि रहे ।   मुंशी प्रेमचंद , शरतचन्द्र , भगवतीचरण वर्मा ,

विमलमित्र आदि मेरे प्रिय उपन्यासकार रहे है । 


बचपन से ही मुझे लिखने का शौक रहा है ।   मेरी पाँच पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है  जिनमें से चार 

पुस्तकें धार्मिक (भजनों पर आधारित ) है व एक पुस्तक में कविताओं का समावेश है ।   इनके 

अतिरिक्त एक अन्य पुस्तक जिसमे 102  कविताओं का संग्रह है ,शीघ्र ही प्रकाशित होने जा रही है । 


अब यह पुस्तक विद्यार्थियों को छन्द, अलंकार व शब्द-शक्तियों का ज्ञान सरलता से कराने में सक्षम 

होगी ऐसा मैँ मानती हूँ ।   यह पुस्तक पढ़ने के उपरान्त अपने विचार अवश्य ही मुझे 

meenagulyani@gmail.com  पर प्रेषित करें. ।\

भजनमाला ---44

आनन्द रूप भगवन किस भांति तुझको पाऊँ
तेरे समीप स्वामिन मैँ किस तरह से आऊं 

सुख मूल मुक्ति रूपम मंगल कुशल स्वरूपम           
कण्टक सखा  है फुलवा क्या तेरे सिर चढाऊँ 

श्री लक्ष्मी है तेरी निशदिन चरण की चेरी 
ताम्बे का  एक  पैसा क्या नाथ पर चढाऊँ 

गंगा है तेरी दासी सेवक है इंद्र तेरा 
तेरे शरीर पर क्या दो चुल्लू जल चढाऊँ 

छोटे से दास तेरे रवि चन्द्र है उपस्थित 
करते है नित उजाला घृत दीप क्या जलाऊँ 

विनती ये दास की है निशदिन यही दयामय 
हृदय में लौ हो तेरी आँखों में मैँ समाऊँ 
@मीना गुलियानी                                                      

Friday, 17 June 2016

भजनमाला -----43

तेरे नाम में वो शक्ति मुर्दों को जिन्दा करदे 
देने पे जब तू आये बाँझो की गोद भरदे 

नहीं काम कोई मुश्किल जब माँ तेरी मेहर हो 
सब उसका फ़िक्र करते जिसकी तुझे फ़िक्र हो 
हो पहाड़ सी मुसीबत तू एक पल में हर दे 

इतनी माँ शक्ति दे दो कुछ काम करके जाएँ 
तेरे सामने खड़े हो आँखे न हम झुकाएँ 
तुझपे हो जो निछावर मुझे ऐसा दिल जिगर दे 

आये दर पे जो सवाली उनकी तू झोली भरदे 
उल्टी है जो लकीरें जल्दी से सीधी करदे 
फरियाद सुनले मेरी ज़रा ध्यान माँ इधर दे 
@मीना गुलियानी 

भजनमाला ---42

किसका दर है कि जबीं आप झुकी जाती है 
दिले खुद्दार दुहाई कि खुदी जाती है 

आये जो तेरी शरण हमने तब ये पहचाना 
तेरे दर पे ही तो किस्मत जगाई जाती है 

ढाए दुनिया ने सितम हमको तुम न ठुकराना 
तेरे दर पे ही तो खुशियाँ लुटाई जाती है 

रूठे दुनिया चाहे सारी न तुम खफा होना 
तुझे पाने को ही हस्ती मिटाई जाती है 

अपने दासों पे कर्म मय्या आज फरमाना 
तेरे दर पे ही तो बिगड़ी बनाई जाती है 
@मीना गुलियानी 

Thursday, 16 June 2016

दो मसले

बस ये दो मसले 
जिंदगी भर हल न हुए 
न नींद पूरी हुई 
न ख्वाब मुकम्मल हुए 
वक्त ने कहा कि काश 
थोड़ा और सब्र होता 
सब्र ने कहा कि काश 
थोड़ा और वक्त होता 
बचपन में पैसा ज़रूर कम था 
पर उसमें बहुत दम था 
अब पास में महंगा मोबाइल है 
पर गायब वो बचपन की स्माइल है 
ऐसी बेरुखी देखी है हमने 
कि लोग आप से तुम तक 
तुम से जान तक और 
जान से अंजान बन जाते है 
@मीना गुलियानी 

दिल तो आखिर दिल है

दिल तो आखिर दिल है
जिसे समझाना पड़ता है
बहलाना पड़ता है
फिर भी न सम्भले तो
उसका टूटना निश्चित है
यही उसकी नियति है
मिलना बिछुड़ना भी क्या है
कैसी विडंबना की स्थिति है
दोनों विपरीत दिशा के पथिक
कभी कभी साथ चलते है
तकलीफ एक को हो तो
दूजे को भी सहना होता है
तब हम कहते है भाग्य दोष
या कर्मो का लेख ऐसा होगा
@मीना गुलियानी 

भजनमाला --------41

अब चेत कर अनाड़ी विश्वास धार मन में 
बाहर क्या ढूँढ़ता है प्रभु को सम्भार तन में 

तू हो रहा बहिर्मुख प्यारे लगे क्षणिक सुख 
अंतर् नहीं टटोले खोजे गुफा में बन में 

क्यों जाए काशी मक्का सोरो गया में है क्या 
भीतर भी त्रिवेणी कर स्नान तू मनन में 

झूठे है तिलक माला भगवान यों न पावें 
अजपा है जाप जप ले हो मस्त एक धुन में 
@मीना गुलियानी  

Wednesday, 15 June 2016

किसी के लिए ख़ास हूँ मै

सत्य क्या है पता नहीं 
अभी तक उसकी तलाश में हूँ मै 
धैर्य क्या है फिर भी 
उसके आस पास हूँ मै 
आकाश के तारों में नहीं 
चन्द्रमा के दाग में हूँ मै 
धरा के किसी छोर में नहीं 
न ही रवि के प्रकाश में हूँ मै 
पूर्णिमा की रात में नहीं 
अमावस की रात में हूँ मै 
निर्जीव सन्नाटे में नहीं 
न सजीव बात में हूँ मै 
न ही राधा  के रास में 
न ही उमा के लास्य में हूँ मै 
पर इस जगत में कहीं न कहीं 
किसी के लिए बहुत ख़ास हूँ मै 
@मीना गुलियानी 

जल्दी लौट आओगे

देखो तुम यहाँ से चले तो न जाओगे
जाओगे तो मुझे भी तड़पता ही पाओगे
कैसे जी पाऊँगी मै तुम्हारे बिन
लम्हा लम्हा साल सा लगता है
काटे से भी न दिन ये कटता है
लम्बी लम्बी जुदाई की रातें होती है
सदमों में डूबी ये बरसातें होती है
तुम्हारे बिन दुनिया मेरी वीरान है
ऐसा लगता है पसरा हुआ श्मशान है
तुम्हारे आने से ही बहार आती है
हर कली फूल बनके मुस्कुराती है
हवा गुनगुनाती है पेड़ों की टहनी लहलहाती है
फूलों की शबनम गीत गाती है
शाख़ों पे सब्ज पत्तों की बहार आती है
पंछी चहचहाते है भँवरे गुनगुनाते है
वादा करो तुम अब कहीं  जाओगे
जाओगे तो जल्दी लौट आओगे
@मीना गुलियानी 

भजनमाला ---40

आशा कदी बन्दे दियां होंदिया न पूरियाँ 
कलपदा बतेरा फिर वी रहंदिया अधूरिया 

आखदे सियाने माया माया नू है जोड़दी 
लखां वाल्या नू रहन्दी आशा करोड़ दी 
करोड़ हो जावन ता वी पेंदीया  न पूरियाँ 

तांगे वाला कहंदा मेरे हेठ सोहनी कार होवे 
कार वाला कहंदा मेरा उड्दा जहाज होवे 
वेखके जहाज वल्लों वटदा ऐ घूरिया 

पानी न घुट किसे प्यासे नू पिलाया गया 
रोटी दा  वि टुक किसे भुखे नू न खिलाया गया 
रब कोलो मंगदा आई मक्खन ते चूरिया 

ऐनी अक्ल दिती रब हर इक दास नू 
वस चले बन्दे दा ता उड जावे आकाश नू 
पंख नहीं दिते रब्बा ऐहो मजबूरियाँ 
@मीना गुलियानी 

Tuesday, 14 June 2016

एक अहसास है

विश्वास है एक आस ,एक भरोसा है
एक किरण है और एक अहसास है
कुछ पाने का कुछ खोने का
क्षणिक भर छलना बनके रहने का
तेरा संग  पाने का, तेरा सहारा है
इसकी अनुभूति ऐसी है जैसे कि
पंछी को परों से
भक्त को ईशवर से
शिशु को माँ से
पत्ते को डाली से
शब्द को आवाज़ से
आवाज को संगीत से
संगीत को आराध्य से
यथार्थ को धरातल से
प्रेमी को निश्छल हृदय से होती है
@मीना गुलियानी 

मेरा खुदा मिल गया

मै तो घर से अकेला चल पड़ा
रास्ते में ये फूल मिल गए
पूछा उन्होंने तुम गुमसुम क्यों हो
मै पल भर चौंका फिर मुस्कुरा  दिया
अब तो लगा जैसे वीराने में बहार आ गई
हर कली जाग उठी मुस्काने लगी
गुलशन लहलहाने लगा खुशबु लुटाने लगा
क्योकि तुम दबे पाँव वहाँ चली आई थी
क्या यह सब मेरी आँखों का धोखा है
क्या यह एक दिवास्वप्न है या सत्य है
तुम्हारी ख़ुशी, हँसी देखने की तमन्ना लिए
बरसों से इस वादी में बार बार लोटता हूँ
यहाँ कभी हम दोनों मुस्कुराए थे
प्यार के नग्मे भी गुनगुनाए थे
तुम्हारी पदचाप पायल की छमछम
अभी तक मेरे कानो में गूंजती है
यथार्थ है स्वप्नमात्र तुम ही हो
तुम्हे पाकर तुम्हे सपर्श करने की
तुमसे बाते करने की इच्छा होती है
मेरा रूठा हुआ प्यार मुझे मिल गया
ऐसा मुझे लगा जैसे मेरा खुदा मिल गया
@मीना गुलियानी 

तुम्हारा यहाँ क्या काम है

यहाँ तुम क्यों चले आए
तुम्हारा यहाँ क्या काम है
ये तो सिर्फ एहसासों की बस्ती है
जो बरसों से वीरान  गुमनाम है
कभी यहाँ भी फूल खिलते थे
दो प्रेमी छुपके मिलते थे
भँवरे गुनगुनाया करते थे
फूल मुस्कुराया करते थे
पवन के झोंके खुशबु लुटाया करते थे
फूलों का पराग किसी ने चुरा लिया
इनकी हँसी किसी ने छीन ली
ऐसा एक सैयाद आया जिसने
इनकी नूरानी छीन ली
अब न वो बोल है
न हँसी न मुस्कुराहट
बस अब है एक कसमसाहट
फुसफुसाहट ,सिहरन,छटपटाहट
@मीना गुलियानी 

भजनमाला ---39

छोड़के जग को है इक दिन जाना 
भूल न जाना बन्दे भूल न जाना 

ये तो है इक रैन बसेरा किसका रहा है सदा बसेरा 
हुआ सवेरा अब उड़के है जाना 

ये तन है मिट्टी का खिलौना माटी से हुआ पैदा माटी में मिलना 
मोहमाया में तू मत भरमाना 

झूठी है ये दुनिया सारी है स्वार्थ की प्रीती सारी 
फंस गया तो फिर पड़े पछताना 

भज प्रभु का तू नाम हे बन्दे जीवन को तू सुधार ले बन्दे 
चौरासी के फंदे में न आना 

भवसागर में मेरी नैया पार उतारो मोरे खिवैया 
प्रभु जी मुझे तुम पार लगाना 
@मीना गुलियानी  

Monday, 13 June 2016

तुम्हारी याद

आज फिर से तुम्हारी  याद चुपके से चली आई है
मेरे मन की कली भी  होले  से फिर  मुस्कुराई है

तुमने न आने की कसम कभी खाई थी
तब तुमने दिल तोड़ने की रस्म निभाई थी
तुम्हारी याद ने फिर बगिया मेरी  महकाई है

दिल को सुकूँ मिलता है तुझे याद करके
उसे हौंसला मिलता है चाहत का रंग भरके
 जाने न हम क्या  होती ये रुसवाई है

तुम्हे कसम है मेरी दूर तुम जाया न करो
जाओ तो  जल्दी ही लौट आया करो
वरना तमन्ना मेरी बिन खिले मुरझाई है
@मीना गुलियानी 

मेरे स्वप्न

मेरे स्वप्न गेय नहीं है 
आरोह अवरोह से परे है 
वो अपनी तान,वृत्ति अपने ही 
रस में पूर्णतया लीन है 
ये जो अमराई में खेल रहे है 
वे जो टेसू रंग में भीगे है 
वे जो कागज़ की नाव चला रहे है 
वे जो हरसिंगार हिला है 
यही है मेरे स्वप्न तुम मत देखो 
मेरे स्वप्न भटकते है प्रवाह की खोज में 
मेरे स्वप्नों की आराजकता 
 शान्ति की सम्भावना है 
मेरी एकान्त अनुभूति की अभिव्यक्ति है 
सत्य की पीड़ा का निर्मम सार है 
मेरे स्वप्न सयंम नहीं जानते 
नियम नहीं मानते यथास्थिति का उपहास है  
@मीना गुलियानी 

भजनमाला ----38

रे मन अब तो चेत रे बिरथा जन्म न जाए

काहे को तूने महल बनाया
चार दिनों का देस रे

 कौड़ी कौड़ी माया जोड़ी            
कपट का धरकर भेस रे

रैन दिवस तूने यूं ही गँवायो
भूल गयो निज भेस रे

चेत सके तो चेत रे बन्दे
क्या होव चुग जाए खेत रे

हाड मॉस की काय तोरी
प्रीत कीन्ही किस हेत रे

अब रोने से क्या होवेगा
काल ने पासा दिया फेंक रे

चार कहार तुझे लेने आये
छोड़ चला परदेस रे
@मीना गुलियानी 

Sunday, 12 June 2016

जिंदगी का विराम

तुम चुपचाप अपनी राह पर चलते रहो
कारवां खुद ब खुद बन जाएगा
तुम अपनी राह पर बढ़ते रहो
मंजिल का रास्ता भी मिल जाएगा
बहा दो संगीत में ऐसी फुहार हरसू छाये बहार
संगीत को रोक न पाये कोई दीवार
संगीत को पहुँचाए हम सरहद पार
संगीत न माने धर्म कर्म न जात पात
संगीत से जोड़ो सारी  कायनात
संगीत में बसे अल्लाह और राम
संगीत में बसे है मेरे प्राण
संगीत में ही हो जिंदगी का विराम
@मीना गुलियानी 

मेरा ख्वाब तू

मैने कभी सोचा था कि 
सच में न सही झूठ ही सही 
यथार्थ में नहीं तो ख्वाब में ही 
मै अवश्य तुम्हें पा लूँगा 
तुझे मै अपना बना लूँगा 
ऐ जिंदगी तू सच निकली 
जिंदगी ख़्वाब थी,ख़्वाब रही 
ख्वाब और सच के बीच में 
मै अपने तसव्वुर के पुल बांधूंगा 
तू न सही तेरा अक्स ही सही 
अपनी यादों में कहीं तुझे पा लूँगा
@मीना गुलियानी 

तेरी परछाई

कभी कभी जब मेरे ज़हन में 
तेरा नक्श उभरता है तब 
मैने चाहा कि तुम मेरे पास होती 
तो कितना अच्छा होता 
सुलगते धुएँ की आँच की तरह 
सवाल उठे है मेरे ज़हन में 
याद आती है मुझे वो शाम 
जब तुम दीवार से सटी हुई थी 
और चाँदनी में पिघलकर 
तेरी परछाई दीवार पर उतर आई थी 
लगता है अभी तक वो 
परछाई वहीं पसरी हुई है 
तूने मेरे कानो में कुछ कहा  था 
कल हम यही पर मिलेंगे 
जहाँ हमने देर तक बातें की थी 
मै आज भी  वहीं अंधियारे में 
तेरी ही तलाश में वहीं बैठा हूँ 
@मीना गुलियानी 


Saturday, 11 June 2016

भजनमाला ---37

कैसे बैठ्यो रे आलस में तोसे राम कह्यो न जाए 
राम कह्यो न जाए तोसे कृष्ण कह्यो न जाए 

भोर भयो मल मल मुख धोयो 
दिन चढ़ते ही उदर टटोयो 
बातन बातन सब दिन खोयो 
साँझ भई पलंगा पर सोयो 
सोवत सोवत उमर बीत गई 
तेरे काल शीश मंडराए 

लख चौरासी में भरमायो 
बड़े भाग नर  देह तू पायो 
अबकी चूक न जाना भाई 
लुटने पावे नहीं कमाई 
ऐ भाया समय फिर ऐसो 
बार बार नहीं आए 
@मीना गुलियानी 

तुम सुनके सदा मेरी आ जाओ

मेरे दिल ने तुझे अब दी है सदा
सुन मेरी सदा मत देर लगा
तुम सुनके सदा मेरी आ जाओ -आ जाओ -

मेरी नैया की पतवार अब तेरे हाथ में है
जीवन की धूप छाँव अब तेरे हाथ में है
मेरी सांसो का भी तार अब तेरे हाथ में है

देखो ये कायनात तेरा नाम ले रही है
सूरज की किरण भी तेरे मुख को छू रही है
सारे जग को ये ख़ुशी का पैगाम दे रही है

जबसे तुझे पाया तू बना मेरा खुदा है
थाम हाथ तू मेरा यही तुझसे इल्तज़ा है
कभी छोड़ना न मुझको दिल की यही दुआ है
@मीना गुलियानी

भजनमाला ----36

ये दुनिया दो रोज़ की मत कर  यासो हेत 
गुरु चरणों में जाइये जो परम सुख देत 

सबसे बड़ा है इस दुनिया में गुरु चरणों का नाता 
लालन-पालन मात-पिता का गुरु चलना है सिखाता 

जिसके सर पर हाथ गुरु का जीवन से तर जाए 
मंजिल तो क्या चीज़ जगत में खुद भगवन मिल जाए 
रूठे साथी रूठे नाती धन से रूठे भ्राता 

जिसने गुरु चरणों में झुककर अपना शीश नवाया 
आंधी और तूफ़ान चले पर संग गुरु का साया 
जप तप चाहे लाख करो पर बिन गुरु ज्ञान न आता 

सब कुछ अपना अर्पण करदो चाहे जिधर ले जाए 
जिसको खोलो मंदिर में मन दर्पण में दिखलाये 
इक पल भी हो जाए कृपा तो भव सागर तर जाता 
@मीना गुलियानी 

वो लम्हा न मिला

महज पेबंद है ये बादल अब 
टूट गया है अँधेरे का तिलस्म 

ये आसमान  भी  फ़टी हुई चादर है 
सितारों से झांकता है रोशनी का जिस्म 

कविताएँ मेरी वायदा भर है दर्द का 
हर अक्षर लिखता आँसुओं की इबारत 

कैसे न हो गम मुझे उम्र गंवाने का
 जिसकी मुझे तलाश थी वो लम्हा न मिला 
@मीना गुलियानी 


अंधियारा और जीवंतता

रात तो अथाह अंधियारा है 
सुबह की किरणो से है जीवंतता 

तुम्हारे चेहरे पर शान्ति ऐसी है लगती 
मानो आँखों में गरजती हो मौन क्रान्ति 

वो क्षण जो स्वछन्द  प्रणय का था प्रतीक 
वो एक भ्रम बना हो गया स्वयं ही ओझल 

तुम महज एक बदन ही नहीं 
एक एहसास भी हो निश्छल 
@मीना गुलियानी 

Friday, 10 June 2016

भजनमाला -----35

मुझे इक तेरा सहारा है 
इस मतलब की दुनिया में न कोई हमारा है 

नैया मेरी डगमग डोले मनवा मेरा खाये हिचकोले 
चप्पू मेरे टूट गए अब दूर किनारा है 

इस दुनिया में रहने वाले है सब मतलब के मतवाले 
सच्चा इस दुनिया में भगवन नाम तुम्हारा है 

जो अपने से रूठे है मैने परख लिया सब झूठे है 
अब उनकी संगत में नहीं मेरा गुज़ारा है 

प्रभु जी मुझको छोड़ न देना हौंसला मेरा तोड़ न देना 
इक तुम्हारी आस पे जीता दास तुम्हारा है 
@मीना गुलियानी 

Thursday, 9 June 2016

सपनों के रंग


इंद्रधनुष को यदि आँखे देख पाती 
तो हर रंग सच्चा हो जाता 
सपने भी एक ऐसा सच है जिसे 
बीतने पर जिया जाता है 
जागने पर तो हर आदमी अपनी 
ख्वाहिश जाहिर करते और पूरी करते 
खामोशी भी जब टूटकर बिखरती है 
उसमे से भी संगीत की धुन निकलती है 
जिसे हम धड़कनो की धुन पर गुनगुनाते है 
फूलों की खुशबु भी बेफिक्र होकर नचाती है 
दिए की रोशनी हमें परछाईयो में बांधती है 
किरणें हमें अंधेरों की बाहों में लुभाती है 
@मीना गुलियानी 

वो गुज़रे पल

मै तुम्हें देखकर सोचता रहता हूँ
अनगिनत बातें लम्हें वो गुज़रे पल

याद करता हूँ उस गुमनाम जिंदगी को
जिसमें तुम्हारे गीत खामोशी में खो जाते है

यादें कभी सुर्ख गुलाब सी हुआ करती थी
चाँद बादलों की ओट से मुस्कुराया करता था

तन्हा रात में वो चांदनी के संग गुनगुनाता था
तुम और मै बेवजह उनको ताकते रहते थे

कुछ शब्द तुम्हारे कानों में होले से जो मैने कहे
बेफिक्र लम्हों में वो नज़्म बनकर ही रह गए

मै खो जाता हूँ उन अनूठी यादों के लम्हों में
पाँव धीरे धीरे जमीन पर थिरकने लगते है

मैने अंतिम सांस तक निभने वाले प्रेम को सुना है
घर देर लौटने पर तुम्हारी व्यग्र आँखो को देखा है

चाँदनी मुझे अपनी गोद में समेट लेती है
और मै खो जाता हूँ खुद को भुलाने के लिए
@मीना गुलियानी 

भजनमाला ---34

सत्ता तुम्हारी भगवन जग में समा रही है 
तेरी दया सुगन्धि हर गुल से आ रही है 

रवि चन्द्र और तारे तूने  बनाए सारे 
इन सबमे ज्योति तेरी इक जगमगा रही है 

विस्तृत वसुंधरा पर सागर बहाए तूने 
तह जिनकी मोतियों से अब चमचमा रही है 

दिन रात प्रांत संध्या मध्यान्ह भी बनाया 
हर ऋतु पलट पलट कर करतब दिखा रही है 

सुंदर सुगन्धि वाले पुष्पों में रंग तेरा 
ये ध्यान फूल पत्ती तेरा दिला रही है 

हे ब्रहम विश्वकर्ता वर्णन हो तेरा कैसे 
जल थल में तेरी महिमा हे ईश छा  रही है 
@मीना गुलियानी 

Wednesday, 8 June 2016

बहुत बेपरवाह हूँ मै

खुद अपना अक्स हूँ या किसी की सदा हूँ मै
इस सारे शहर में यूं बिखरा हुआ सा  हूँ मै

मै ढूँढ़ने चला हूँ खुद यूँ ही अपने आपको
मुझ पे तोहमत है कि बहुत खुद नुमा हूँ मै

मुझसे न पूछ नाम मेरा ऐ मेरी रूहे कायनात
मै और कुछ भी नहीं बस तेरा आईना हूँ मै

घंटियों को भी बजकर नींद जब है आ गई
मेरी खता है अब क्यों जगता रहा हूँ मै

लाऊँ कहाँ से ढूँढके अब उम्रे रफ्ता को मै
अब तू मुझको भूल जा बहुत बेपरवाह हूँ मै
@मीना गुलियानी 

, झूठे पड़ गए तार


जीवन की वीणा बाजे ना, झूठे पड़ गए तार


बिगड़े ठाठ से काम बने क्या, मेघ बजे न मल्हार


पंचम छेड़ो मद्धम बाजे, खरज  बने  गन्धार


इन तारों को तुम खोलो , इन तरबो को फेंको


सही तार नई तरबो  से नया होवे  सिंगार


इसमें जो सुर अब बोलेंगे , तो गूंज उठे संसार
@मीना गुलियानी

भजनमाला -----33

सुख चाहे यदि न्र जीवन का जपले प्रभु नाम प्रमाद न कर 
है वही सिमरने योग्य सदा तू और किसी को याद न कर 

अस्थिर है जग के ठाठ सभी यदि बिछुड़ गए अचरज ही क्या 
हो लोभ मोह के वशीभूत सिर धुनकर शोक विषाद न कर 

धन माल बटोर चाहे जितना पर इतना ध्यान हमेशा रहे 
अपना घर बार बसाने को औरों का घर बर्बाद न कर 

पर निंदा को तजकर तू आदर्श बना निज जीवन को 
सद्ज्ञान प्राप्त कर सज्जन से दुर्जन से व्यर्थ विवाद न कर 
@मीना गुलियानी 

Tuesday, 7 June 2016

दरिया मिल गया

अपनी मेहनत का मुझको समरा मिल गया
जिसमें खुद खोया हुआ था वो सहारा मिल गया

रहा बाकी बचा क्या जब चैन दिल को मिल गया
फूल हाथ आया तो मानो बाग़ सारा मिल गया

झड़ गए वो सूखे पत्ते पेड़ सब्ज़ बन गया
जितना उसका लुट गया उससे ज्यादा मिल गया

यास में उम्मीद झलकी मौज कश्ती बन गई
डूबने वाले को तिनके का सहारा मिल गया

मेरी उम्मीद से बढ़के था करम तेरा हुआ
तलब इक बूँद की थी और दरिया मिल गया
@मीना गुलियानी 

क्या हसीन जहमत है

होश में बातें मत किया कीजिये
होश की बात करना तो वहशत है

रोशनी तो बस अन्धो के लिए ख़्वाब है
और आँख वालों के लिए ये दहशत है

सब यहाँ मर मरके जीते है दोस्त
फिर भी और जीने की सबको हसरत है

सर पे सभी बोझ उठाये फिरते है
यह जिंदगी भी क्या हसीन जहमत है
@मीना गुलियानी 

भजनमाला ----32

छाड़ि चरण कहाँ जाऊँ 
और को सुनि है पीर पराई ,काको विपद सुनाऊँ 

सुर न्र कोउ परमार्थ नाहिंन , कहाँ कहाँ भरम गवाऊँ 

क्षण क्षण तेरे ही नाम की मुक्ता , चुगि चुगि दिवस बिताऊँ 

दास कहत तू मेरो कहावे , मै तेरो कहलाऊँ 
@मीना गुलियानी 

Monday, 6 June 2016

भजनमाला ---31

रामा रामा रटते रटते बीती रे उमरिया 
रघुकुल नंदन कब आओगे भीलनी की नगरिया 

मै शबरी इक भीलनी हूँ भजन भाव न जानू 
राम तेरे दर्शन के कारण बन में जीवन पालूँ 
चरणकमल से निर्मल करदो दासी की झोपड़िया 

रोज़ सवेरे वन में जाकर फल चुन चुन कर  लाऊँ मै 
अपने प्रभु के सन्मुख रखके प्रेम का भोग लगाऊँ मै 
मीठे मीठे बेरन की मै भर लाई छाबड़िया 

श्याम सलोनी मोहनी मूरत नयनो बीच बसाउंगी 
पद पंकज की रज धर मस्तक जीवन सफल बनाऊँगी 
अब क्यों प्रभु जी भूल गए हो दासी की डगरिया 

नाथ तेरे दर्शन की प्यासी मै अबला इक नारी हूँ 
दर्शन बिन दो नैना तरसे सुनलो बहुत दुखारी हूँ 
रामरूप से दर्शन दे दो करदो मेहर नज़रिया 
@मीना गुलियानी 

पिघल रही होगी

चाँद भी मुझसे जल रहा होगा
चाँदनी भी पिघल रही होगी

जब तू नहाकर निकली होगी
आग पानी में लग रही होगी

संगमरमरी बदन हे ऐसा तेरा
हर निगाह फिसल रही होगी

तुझको बनाया है खुदा ने ऐसा
आरजू भी मचल रही होगी
@मीना गुलियानी 

ये आँखे

ये आँखे रोज़ तुम्हारी यादों का मेला सजाती है
हवाएँ भी रोज़ तुम्हारी खुशबु साथ लेके आती है

तुम्हारी आँखों की नमी  रिसकर
मेरी आँखों में उतर आती है
तुम्हारी अंगुलियाँ बिखेरती बालों को
गुज़री यादो को पिघला जाती है

तमाम वजूद सिमट  जाता है
मेरी संवेदनाओं का आँखों में
बैठो जब तुम मेरे सिरहाने
तन्हाई ख्यालों में सिमट जाती है
@मीना गुलियानी 

भजनमाला ---30

मालिक की बंदगी को हरगिज़ नहीं भुलाना 
दुनिया सराए फानी इसमें न दिल लगाना 

पाया नसीब से है अनमोल तन ये प्राणी 
सुमिरन भजन तू करके जीवन सफल बनाना 

दुनिया के धंधो को तू मत सच्चा जान प्यारे 
बिन नाम के है निष्फल इसमें न दिल लगाना 

ले मान गुरु का कहना इसमें तेरी भलाई 
तू खोज अपने घट में मिले भक्ति का खज़ाना 

मकसद नहीं है असली आने का इस जहाँ में 
बिछुड़ी हुई रूहों को मालिक के संग मिलाना 
@मीना गुलियानी 

Sunday, 5 June 2016

हम किधर जाएँ

मेरी तन्हाई और तेरा तसव्वुर है
हमने सोचा कि हम किधर जाएँ

जाने तू कब यहाँ से गुज़री थी
तेरी महक फिज़ाओ में बाकी है

इन गुलिस्ताँ के फूलों में भी
तेरे चहकने की आवाज़ आती है

खो गए यहीं कहीं तेरे पाँव के निशाँ
वक्त से कहदो ज़रा यहीं ठहर जाएँ
@मीना गुलियानी 

यकीन नहीं मुझे

तू ही मेरे प्यार का सच है यकीन नहीं मुझे
मैने तो मासूम अंधेरों में तुझे तलाशा था

आज इन उजालो में जब तुमको पाया है
आज मैने जाना कि तेरा अक्स भी पराया है

उन बीते लम्हों की फिर से मुझे याद आई है
ये तेरे लब,जुल्फें लगता है तू नहीं परछाई है

सोचा कि बहुत दूर निकल जाऊँ तेरे साथ कहीं
पर तभी मैने पाया कि मेरे पाँव तले जमीन नहीं
@मीना गुलियानी 

भजनमाला ---29

जोड़ जोड़ भर लिए खज़ाने अब भी तृष्णा अड़ी रही 
धरे रहे तेरे रंगले बंगले खाली बारादरी रही 

एक ब्राह्ण की सुनो कहानी पूजा करने आया था 
नहाय धोए कर नदी किनारे आसन खूब जमाया था 
आ गया यम का परवाना बस हाथ में माला पड़ी रही 

पहन पोशाक बांधकर पगड़ी गदी पर इक सेठ गया 
 जाते ही इक चक़्कर आया पाँव फैलाकर लेट गया 
कूच कर  गया लिखने वाला कलम कान में पड़ी रही 

कोठे ऊपर एक नवेली चढ़ी सिंगार बनाने को 
भरी सलाई सुरमे वाली सुरमा आँख लगाने को 
काल गुलेल लगी पीछे से सुरमेदानी धरी रही 

सैर करने को एक बाबूजी गाडी में असवार हुए 
गाड़ी अभी चलने न पाई बाबू ठंडे ठार हुए 
लगा तमाचा मौत  का सड़क पे टमटम खड़ी रही 
@मीना गुलियानी 

Saturday, 4 June 2016

रात की तन्हाई

तुमने कभी रात की तन्हाई का दर्द बांटा है
कभी उसकी स्याह खामोशी से बातें की है

मैने देखे है उसके सीने के जख्म
उसकी आहों से उठता हुआ धुँआ

सुनी है उसकी सिसकियाँ तल्खियाँ और तड़प
उसकी आँखों का गम बूँद बनके रिसता है

उसके सीने की आंच में तपकर
नित नया  चाँद भी पिघलता है
@मीना गुलियानी

तुम्हारी याद आती है

कुछ इस तरह से तुम्हारी याद आती है
जैसे झील के उस पार नाव जाती है

लगता है तुम्हें बारिश से अभी डर लगता है
बारिश की बूँदों को गिरते देख सहम  जाती हो

मै तुम्हारा झील के उस पार इंतज़ार करता हूँ
तुम्हारी परछाईं मुझे छूकर चली जाती है

लगता है तुम सूरज के उजाले से भी घबराती हो
तभी तो उसके उगते ही अँधेरे में गम हो जाती हो

मै तुम्हे देखने को ,सुनने को तरसता रहता हूँ
तुम्हारी आवाज़ सपनों में आकर गुनगुनाती है
@मीना गुलियानी


भजनमाला ---28

नेकी के कर्म कमा जा रे , दुनिया से जाने वाले

यह तन  तेरा तरुवर है नेकी इक क्षीर सागर है 
इस तरुवर के फल खा जा रे 

यह धन यौवन संसारी है दो दिन की फुलवारी 
कोई खुश रंग फूल खिला जा रे 

तझसे धन अंत छूटेगा जाने किस राह लुटेगा 
इसे परहित हेत लगा जा रे 

जगसेवा है सुखदेवा कर  दीन  दुखी की सेवा 
यश पाना है तो पा जा रे 

यह कंचन काया तेरी हो अन्त राख की ढेरी 
इससे जो बने बना जा रे 
@मीना गुलियानी 

सदमे कभी कम न होंगे

मेरी यादों के सिलसिले कभी कम न होंगे
तुम्हें मेरी याद आएगी मगर हम न होंगे
गुलशन में बहारें आयेंगी मुस्कुराती रहेंगी
कोई गम न करना अगर हम न होंगे
फूल तो गुलशन में यूं ही खिलेंगे
बहारों के मौसम कभी कम न होंगे
जानता हूँ कि तुम भुला न पाओगी मुझे
कैसे कहदूँ कि मेरे न रहने से गम न होंगे
मेरी याद रह रहकर तड़पाएगी तुझको
जुदाई के सदमे कभी कम न होंगे
@मीना गुलियानी 

Friday, 3 June 2016

भजनमाला ------27

प्रभु जी के दरबार में है खुला सभी का खाता 
जितना जिसके भाग्य में होता उतना ही वो पाता 

क्या साधु क्या संत गृहस्थी क्या राज क्या रानी 
प्रभु की पुस्तक में लिखी है सबकी कर्म कहानी 
सबकी जमा खर्ची का वो ही सही हिसाब लगाता 

बहुत बड़े क़ानून प्रभु के बड़ी बड़ी मर्यादा 
किसी को कौड़ी कम न देता किसी को कौड़ी ज्यादा 
इसलिए तो इस दुनिया में ये जगतसेठ कहलाता 

करते है फैसला सभी का प्रभु आसन पर डटके 
उसका फैसला कभी न बदले लाख कोई सिर पटके 
समझदार तो चुप रह जाता मूर्ख शोर मचाता 

नहीं चले प्रभु के घर रिश्वत नहीं चले चालाकी 
प्रभु के घर देंन  लेंन  की रीत बड़ी है बाँकी 
पुण्य का बेडा  पार करें वो पाप की नाव डुबाता 

भवसागर से पार लगावे नीली छतरी वाला 
गुरुकृपा से खुल जाता घट का अंदर ताला 
इस दुनिया में जो कोई आता आखिर वो हे जाता
@मीना गुलियानी 

Thursday, 2 June 2016

अरमाँ भूल गए

तुम्हें देखा तो देखते रह गए
मन के परिंदे उड़ान भूल गए
समुन्द्र का ज्वार थम सा गया
लहरों ये का तूफ़ान थम सा गया
तेरी मुहब्ब्त की दिलकशी में हम
दीवाने होकर आखिरी अंजाम भूल गए
सब है नसीब में तेरा नाम भूल गए
दिन रात की तन्हाई आराम भूल गए
चल पड़े घर से तेरी तालाश में फिर
आगाज़ तो किया अंजाम भूल गए
मेरी खताओं की सज़ा मौत ही सही
हम तेरे तसव्वुर में अरमाँ भूल गए
@मीना गुलियानी 

ऐतबार जरूरी है

जीने के लिए वजह का होना ज़रूरी है
दिल में भी थोड़ी जगह होना जरूरी है
चलो कहीं दूर चलें पर तेरा साथ जरूरी है
रात ढल चुकी अँधेरे में रोशनी जरूरी है
चलेंगे फांसले मिटेंगे पुराने घाव भरने जरूरी है
पहले दीवानों से मिलते थे अजनबी होना जरूरी है
दिल को दूरी का एहसास के लिए बिछुड़ना जरूरी है
प्यार हो जाने पर एक दूसरे पर ऐतबार जरूरी है
@मीना गुलियानी 

भजनमाला -----26

बीत गइया घड़ियाँ मुड़के हत्थ नईयो आणिया 
सुतया तू जाग काहनू लम्बिया ने तानिया 

छुप गए चन तारे सूरज अखा खोलिया 
राम दे प्यारे पंछी बोलदे ने बोलियां 
तू वि उठ जाग पढ़ ले सन्ता दिया बाणिया 

अखियाँ नू खोल ज़रा छड़ दे खुमारिया 
खुल गया बाज़ार लुट लया व्यापारिया 
गठरी सम्भाल तेरी सुतिया बिहानिया 

उठके सवेरे पंथ करले सरवांदे 
झूठे भरवासे हुंदे बदला दी छावा दे 
ओखिया ने प्रेम दिया मंजिला निमानिया 
@मीना गुलियानी 

भजनमाला ----25

प्रेमी बनकर प्रेममय ईशवर के गुण गाया कर 
मन मंदिर में गाफिला झाडू रोज लगाया कर 

सोने में तो रात गुज़ारी दिन भर करता पाप रहा 
इसी तरह बरबाद तू बन्दे करता अपने आप रहा 
प्रांत: समय उठ ध्यान से सतसंग में तू जाया कर 

न्र तन के चोगे का पाना बच्चों का कोई खेल नहीं 
जन्म जन्म के शुभ कर्मो का होता जब तक मेल नहीं 
न्र तन पाने के लिए उत्तम कर्म कमाया कर 

दुखिया पास तेरे है कोई तूने मौज उड़ाई क्या 
भूखा प्यास पड़ा पड़ौसी तूने रोटी खाई क्या 
सबसे पहले पूछकर भोजन को तू खाया कर 
@मीना गुलियानी 

Wednesday, 1 June 2016

प्यार का एहसास तुम हो

मेरी तन्हाई और ख्वाबों में तुम हो
मेरे होठों की हँसी और बातों में तुम हो

उनींदी पलकें मेरी और सपनों में तुम हो
महकता जिस्म मेरा उसकी खुशबु तुम हो

तुम्ही मेरे सवालों में और जवाबों में तुम हो
मेरी धड़कन में बसी हर सांस में तुम हो

मेरा प्यार है तरसता रेगिस्तान  बरसात तुम हो
मै हूँ प्यार की अधूरी कहानी मेरा प्यार तुम हो

दिल के कोने में बसी मेरी  इक याद तुम हो
मेरी रूह में छिपा प्यार का एहसास तुम हो
@मीना गुलियानी 

कोई जवाब नहीं

मुझसे तुम कोई सवाल पूछा न करो
तेरे सवालों का तो कोई जवाब नहीं

मेरे तो सब ख़्वाब हुए पराये है
हर तरफ तन्हाई के ही साये है
जैसे कि हर सांस दिल की धड़कन
कह रही है मेरी जिंदगी उधार है कहीं

तुम जो पिलाओ आँखों से नशा आ जाए
जो उतर न पाये सहर होने तक
अब कोई बात न करना खामोश रहो
तेरी बातों सवालों का कोई हिसाब नहीं
@मीना गुलियानी 

भजनमाला -----24

करो नित नाम का सुमिरन अगर मुक्ति को पाना है
अरे पगले ये वो घर है जो इक दिन छोड़ जाना है 

अवस्था जा रही तेरी बना ले नाम सुमिरन से 
वो खर्ची साथ ले अपने वहाँ पर पहुँच जाना है 

किया नहीं कर्म शुभ तूने दिया नहीं दान हाथो से 
जिह्वा से न किया सुमिरन तेरा किस जहाँ ठिकाना है 

तेरा दमदम में दम जाता तुझे कुछ नज़र नहीं आता 
तेरी करतूत का पर्चा तेरे दर पे भी आना है 

जो रिश्तेदार है तेरे  जिन्हें तुझसे ये उल्फ़त है 
तेरे इस जिस्म को अग्नि पर रखके फिर जलाना है 
@मीना गुलियानी