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रविवार, 2 फ़रवरी 2020

तुमने ज़रा देर कर दी

कबसे मैं तुम्हारा इन्तज़ार कर रही थी
लेकिन तुमने आने में बहुत देर करदी
फ़िज़ा का सुहाना मौसम बदल गया है
चंदा गगन में न जाने कहाँ गुम गया है
तारे भी लुका छिपी का खेल खेल रहे हैं
हम भी तन्हाई में खुद सांसें समेट रहे हैं
कुदरत के नज़ारे भी शोखियाँ दिखा रहे हैं
दिल के सारे अरमान थककर सो गए हैं
रास्ते सभी सुनसान बियाबान हो गए हैं
फ़ुरक़त के वो लम्हे अब सारे खो गए हैं
हम फिर से तेरे  लिए बेकरार हो गए हैं
@मीना गुलियानी




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