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मंगलवार, 4 फ़रवरी 2020

ये कैसा संयोग है

आज तो कितना सुखद संयोग है
आखिर मेरी दुआ रंग ले ही आई
तुमको मुझसे फिर से मिला दिया
कबसे हम मिलने को तरस रहे थे
आज फिर से वो सुहाने पल हैं
वही गगन और तारों भरी रात
हँसता हुआ चाँद महकता गुलशन
तुम्हारे हाथों में मेरा है ये हाथ
संयोग ने जीवन में रोमांच भर दिया
हमेशा के लिए हमें फिर एक कर दिया
@मीना गुलियानी




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