यह ब्लॉग खोजें

सोमवार, 17 फ़रवरी 2020

बच्चे बन जाओ

अगर खुश रहना तुम चाहो
फिर से तुम बच्चे बन जाओ
 यूँ बिना बात के खिलखिलाओ
खुद ही रूठो और मान जाओ
किसी बात को दिल से न लगाओ
सब लोगों से दोस्ती को निभाओ
दिल में उमंगों के तूफ़ान उठाओ
मस्ती से तुम खेलो कूदो गाओ
खुलके सदा हँसो और झूम जाओ
खुली हवा में पतंगें तुम उड़ाओ
कभी तितली के पीछे भाग जाओ
कभी कागज़ की नाव को चलाओ
सपनों के सुंदर तुम महल बनाओ
बाहों के झूले में तुम झूल जाओ
सारे जिंदगी के ग़म भूल जाओ
@मीना गुलियानी




कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें