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सोमवार, 11 मई 2015

गुरुदेव के भजन-253 (Gurudev Ke Bhajan253)



सच्चा तू करतार है सबका पालनहार है
तेरा सबको आसरा सुखों का भंडार है 

नदियाँ नाले पर्वत सारे तेरी याद दिलाते है 
ऋषि मुनि और योगी तेरे नाम के ही गुण गाते है 
महिमा अपरम्पार है तेरा ही आधार है 

बादल गरजे बिजली चमके  वर्षा छम छम आती है 
कोयल बोले मीठी बोली क्या क्या राग सुनाती है 
सबका पालनहार है सुखों का भंडार है 

शुद्ध आत्मा उनकी होती जो तेरा गुण गाते है 
जो जपते है नाम को तेरे अंत नही पछताते है 
ज्ञान की निर्मल धार है हो जाये भव से पार है 



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