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सोमवार, 18 मई 2020

तन्हाई

जिंदगी की तन्हाई कम नहीं होती
तुम्हारी जुदाई अब सहन नहीं होती

सोच न था ऐसा ज़हर भी पीना पड़ेगा
जीयेंगे मगर घुट घुट के जीना पड़ेगा

जिंदगी के सफर पे हम चल तो पड़े हैं
राहों में कितने ही काँटे बिखरे पड़े हैं

दुनिया ने कितने जख्म हमको दिए हैं
उफ़ तक न की चुपके जख्म सिए हैं

राहों पे चलते  परछाईयाँ बोलती हैं
हम चुप रहते हैं तन्हाईयाँ बोलती हैं
@मीना गुलियानी 

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