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रविवार, 24 मई 2020

समय की रेत फिसलती हुई

समय की रेत फिसलती हुई
ये उम्र भी है ढलती सी हुई
कब तलक बोझ उठायेगी
इक दिन जुदा हो जायेगी
फिर अकेले ही चलना होगा
खुद ही जीना  मरना होगा
@मीना गुलियानी

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