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मंगलवार, 1 जनवरी 2019

रूमानी हो जाएँ

आज फिर से हम बच्चे बन जाएँ
हर समय हम उन्हें देते हिदायतें
 चलो आज वो सब हम भूल जाएँ
आज जिन बातों पर उन्हेँ टोकते हैं
कल कहीं उस पल को न तरस जाएँ
आज उन्हें सब मस्ती करने दो
खूब उछलने ,कूदने ,खेलने दो
उनकी मस्ती में खुद को भूल जाएँ
यह बचपन कभी न आए दुबारा
समा सुहाना मौसम प्यारा प्यारा
इस रंगीन रुत में थोड़ा सा झूमें
चलो बच्चों के साथ खिलखिलाएं
करके  दूर उदासी रूमानी हो जाएँ
@मीना गुलियानी 

सोमवार, 31 दिसंबर 2018

मुझको याद आना नहीं

तुम अगर आ सको तो आ जाओ
आके फिर दूर मुझसे जाना नहीं

है फिक्रमंद जिंदगी अपनी तो क्या
तू मगर इसका रश्क खाना नहीं

 मेरा दिल गर तुम्हारे ख़्वाब में डूबे
तुम मुझे नींद से कभी जगाना नहीं

गर तुम कभी भी मुझसे दूर हो जाओ
कसम तुम्हें है मुझको याद आना नहीं
@मीना गुलियानी 

शनिवार, 29 दिसंबर 2018

दीदार करता हूँ

तुमसे मिलकर ख़ुशी है मिल जाती
मैं तुम्हें अब भी याद करता हूँ

तुम्हें ख़्वाबों में देखता हूँ अक्सर
बिन तेरे मैं बहुत उदास रहता हूँ

सोचता हूँ गुज़री ये जिंदगी कैसे
तुझपे मैं जां  निसार करता हूँ

तुम बिन जिंदगी वीरान है मेरी
दिल के आईने में दीदार करता हूँ
@मीना गुलियानी 

शुक्रवार, 28 दिसंबर 2018

उसे धिक्कारेगा

सोचती हूँ आज का मानव भी
कैसा  निर्मम ,निष्ठुर,कामपिपासु
 हो गया है उसकी अंतर्मन की दशा
उसे निम्नस्तर पर लिए जा रही है
 वह  जघन्य अपराध कर  बैठता है
उसकी आत्मा क्या मर चुकी है
केवल नारी देह की लोलुपता ही
उसे आकर्षित करती है उसमें उसे
माँ बहिन की छवि नज़र नहीं आती
नारी केवल भोग्या नहीं है
वो शक्ति स्वरूपा भी है
उसमे दया ,ममता,प्रेम भी है
वो अबला नहीं सबला भी है
पुरुष कामासक्त होकर असुर हो जाता है
उसे अपनी मनोवृति बदलनी होगी
नहीं तो केवल समाज ही नहीं
समूचा राष्ट्र इस जघन्य
कृत्य के लिए उसे धिक्कारेगा
@मीना गुलियानी

हाथ थामे और खो जाएँ

चलो हम सुंदर सा आशियाना बनायें
फूलों की सुरभि से इसे हम महकायें
शीतल बयार के झोंकों से प्रदूषण भगाएँ
इंद्रधनुष और तितली के रंगों से सजाएँ
तिनका तिनका चुनें और इसे बनायें
भंवरों की गुंजन से इसमें संगीत गुंजायें
बच्चों की किलकारियों से खिलखिलाएं
हर ग़म को अपने से दूर हम भगाएँ
सुन्दर सपनों की दुनिया में खो जाएँ
दिल में उमंगों के झरनें हम बहाएँ
खुशियों की तरंगों में हम झूम जाएँ
आकाश तक ऊँची प्रेम पींगें बढ़ाएँ
हाथों में हाथ थामे और खो जाएँ
@मीना गुलियानी

मंगलवार, 25 दिसंबर 2018

बसा लूँ तो क्या हो

बड़ी कातिल है ये तेरी बेवफाई भी
ये दिल किसी से लगा लूँ तो क्या हो

तेरे दूर जाने से जिंदगी वीरान है
चिराग दिल के जला लूँ तो क्या हो

दुनिया ने कितने ज़ख़्म मुझको दिए
उन पे मरहम लगा लूँ तो क्या हो

चाहती हूँ ज़िंदगी याद में तेरी कट जाए
मैं तुझे अपने मन में बसा लूँ तो क्या हो
@मीना गुलियानी 

जल रही होगी

चाँद छुप गया है बदली में
अब वो पहलू बदल रही होगी

सुबह के वक्त इन्हीं वादियों में
वो मेरे साथ चल रही होगी

घने पेड़ों की घनी छाँव तले
उसकी हसरत मचल रही होगी

शाम को झिलमिलाते सितारों तले
दबे पाँव घास पे वो चल रही होगी

रात होने को आई है अब तो
झरोखे में कंदील जल रही होगी
@मीना गुलियानी 

रविवार, 23 दिसंबर 2018

बिन मेरे गुज़र तेरा

दरिया किनारे पे भी प्यासा मैं रहा
तुम लहर बनकर मचलती ही रही

तुम मुझसे बहुत दूर चले आए
उम्मीद की शमा भी बुझने चली

मेरा तुम जिक्र न करना किसी से
रह गया रिश्ता क्या अजनबी से

अगर ढूँढ लेते तो मंजिल भी पा जाते
तुमने ढूँढना चाहा ही नहीं पता मेरा

दुआ तुम करो निज़ात पाने की
हो न पायेगा बिन मेरे गुज़र तेरा
@मीना गुलियानी 

शनिवार, 22 दिसंबर 2018

आ जाओ

मेरे  दिले नादाँ ने पुकारा तुमको
सदा तुम  सुनके इसकी आ जाओ

दुनिया से कुछ नहीं शिकवा है मुझे
तुमसे शिकवा है मुझको आ जाओ

वही एहसास वही कशमकश ज़ारी है
दिल की तिश्नगी मिटाने आ जाओ

जिस घरौंदे  को हमने  बसाया था
वो बिखर  न जाए कहीं आ जाओ
@मीना गुलियानी 

गुरुवार, 20 दिसंबर 2018

गीत ख़ुशी के गाएँ

आज सूरज तपा नहीं सर्दी ने जकड़ा बदन
सुबह की सर्द हवा ने बढ़ाई दिल की धड़कन

ठण्ड में याद आया हमको फिर गर्मी का मौसम
न थी ठिठुरन न इतने लबादे ओढ़ते थे हम

अब तो पानी पीते भी याद आती है नानी
सुबह पानी से अच्छी लगती चाय बनानी

सुबह हमेशा नहाने को चाहिए गीज़र का पानी
उसके बिना तो  ऐसा लगता शामत पड़ी बुलानी

अच्छी लगती मक्की की रोटी साग और गुड़ धानी
पुआ पराँठे पीछे छोड़े चाहे मुँह से टपके पानी

बच्चे धमाचौकड़ी करते घर से बाहर जाकर
हमको खाट है अच्छी लगती और हमारा बिस्तर

गर्मा गर्म पकोड़े और मूँगफली इतनी मन को भाए
चाहे जितनी भी हम खाएँ मन भूखा ही रह जाए

अगर धूप निकल आये तो जाड़ा हम दूर भगाएँ
सबसे प्यारा लगे ये मौसम गीत ख़ुशी के गाएँ
@मीना गुलियानी 

मंगलवार, 4 दिसंबर 2018

तलाश में बढ़ते चलो

जीवन इक बहता हुआ दरिया है
इसे बहने दो
सुख दुःख का मधुर मिलन होता है
उसे होने दो
मौजों को साहिल से टकराना होता है
उन्हें टकराने दो
तुम क्यों उदास मन लिए
गुमसुम से बैठे हो
जीवन से हार न मानो
नहीं तो टूट जाओगे
अथक परिश्रम करते चलो
मंजिल की तलाश में बढ़ते चलो
@मीना गुलियानी 

सोमवार, 3 दिसंबर 2018

अगवानी में प्रतीक्षारत हूँ

फूलों से कहो -
अपने पराग  से सजाएँ पालकी
वृक्षों से कहो -
अपनी हरियाली से सजाएँ पालकी
आकाश से कहो -
चाँद सितारों से सजाएँ पालकी
बादलों से कहो -
इंद्रधनुष से सजाए पालकी
इस पालकी पर मेरी प्रियतमा जब आए
द्वार पे बंधनवार बांधे
सुहागिनें मंगलगान गाएँ
उसकी आरती उतारें
फिर वो देहरी लांघकर
मेरे अंतर्मन में प्रवेश करे
मैं पलकें बिछाए हुए
उसकी अगवानी में प्रतीक्षारत हूँ
@मीना गुलियानी 

रविवार, 2 दिसंबर 2018

हँसके सहती है

नारी है शमा की जैसी
जो सदैव ही है जलती
एक सांचे में है ढलती
जीवन प्रकाशित करती
कितनी यातनाएँ सहती
पर उफ़ न कभी करती
उसके दर्द को किसने जाना
किसने उसको पहचाना
वो रोज़ फ़ना होती है
मन ही मन में रोती है
देती है सबको खुशियाँ
हर ग़म हँसके सहती है
@मीना गुलियानी 

शनिवार, 1 दिसंबर 2018

हम भी हँसे मुस्कुराएं

लगता है समुंद्र का पानी गहरा हो गया है
तेरा मेरा रिश्ता भी गहरा हो गया है
लोगों की निगाहें भी अब उठने लगी हैं
सितारों की आँखें भी झुकने लगी हैं
जुल्फों पे बादल का पहरा हो गया है

तमन्नाओं के सावन तो बरसते रहेंगे
फूल इन बहारों के महकते ही रहेंगे
गुलशन में हमेशा ही बहारें रहेंगीं
जिंदगी  का हर पल सुनहरा हो गया है

यादों से कोई कहदो अब वो लौट जाएँ
तमन्ना से कहदो वो महफ़िल सजाएँ
गुज़रे वो पल लौट आये हैं अब तो
चलो थोड़ा सा हम भी हँसे मुस्कुराएं
@मीना गुलियानी 

शुक्रवार, 30 नवंबर 2018

बहकने लगी हैं

तेरे काजल की रेखा चमकने लगी है
बादल से बिजुरिया दमकने लगी है

तेरे होंठ कहते हैं गुज़री कहानी
अलसाई शाम महकने लगी है

पत्ता पत्ता बूटा बूटा सुनाएगा दास्तां
शबनम मोती बनके दमकने लगी है

क्या पता लौटना फिर न हो दुबारा
उमंगें सावन में बहकने लगी हैं
@मीना गुलियानी 

गुरुवार, 29 नवंबर 2018

जा चला जा उसके पीछे

ओ  चंदा तू समझ ले मत झाँक तू इधर रे
जब आएँ मोरे सैंया तभी आना तू नज़र रे

बदरी में जाके छुप जा कहीं पर्वतों के पीछे
काहे छुपके मुझे देखे तू नज़र झुकाके नीचे

ये नज़ारे प्यारे प्यारे किस काम के हैं सारे
जब  संग पिया नहीं हो बेकार सब इशारे

चुपके से आके पीछे क्यों जिया को मोरे खींचे
तुझे चाँदनी पुकारे जा चला जा उसके पीछे
@मीना गुलियानी 

बुधवार, 28 नवंबर 2018

ग़म हम भूल जाएँ

चलो फिर से बचपन को लौटा लाएँ
अपनी हथेली में किरणों को समेटें
फूलों पे बैठी तितली को पकड़ें
ताज़ी हवा में चलो घूम आएँ
नन्ही नन्हीं कोंपलों को छुएँ
कोई गीत मस्ती में गुनगुनाएँ
 मुँह में हवा भरके गुब्बारे फुलाएँ
नर्म नर्म घास पर पैदल चलें हम
थोड़ी बहुत सेहत हम भी बनाएँ
बच्चों के साथ मस्ती करें हम
उनके ही जैसे बच्चे बन जाएँ
कभी रूठें पल में कभी मान जाएँ
खेलें कभी हँसें और खिलखिलाएँ
आसमाँ के तारे अँगुली पे गिनें
कभी सारी गिनती ही भूल जाएँ
कागज़ की इक नाव बनाकर
थोड़े से पानी में हम उसे तैरायें
बच्चों की किलकारी में खुश होकर
सारे जहाँ के ग़म हम भूल जाएँ
@मीना गुलियानी 

मंगलवार, 27 नवंबर 2018

तेरी याद आ रही है

न जाओ  ऐसे रूठकर मुझसे ओ हमसफ़र
देखो ज़रा पलटकर तेरी याद आ रही है

न जाने किस कसूर पे तुमने मुझे सज़ा दी
कभी न बताया मिलके किसलिए जफ़ा की
कभी शिकवा  न किया है हर ग़म को सहा है
न जाने फिर क्यों दिल पे चोट दी जा रही है

हँसता हुआ था जो गुलशन तुमको पुकारता है
उजड़ा हुआ ये बागबां अब तुमको निहारता है
मुझको दिलासा दे दो थोड़ा सा ही मुस्कुरा दो
आ जाओ फिर पलटकर तेरी याद आ रही है
@मीना गुलियानी

सोमवार, 26 नवंबर 2018

अगाध की ओर

विधाता ने रचा
उसे प्रेम से
कल्पना से
कामना से
फ़ुरसत में
वह  मुझमें  है
उसकी हँसी
कुसुमित होती है
पलाश में
अमलतास में
हेमंत में
वसन्त में
बढ़ती जाती है
अगाध की ओर
@मीना गुलियानी 

रविवार, 25 नवंबर 2018

हाय रे हालात

उन्मुक्तता का छलावा
व्यर्थ का दिखावा
बातों में रुझान
आँखों में तूफ़ान
दिल है पशेमान
बोझिल हैं सांसें
रूकने को सांसें
दर्द की दास्तां
डूबती है जां
स्याह है रात
कैसे हैं जज़्बात
हाय रे हालात
@मीना गुलियानी 

शनिवार, 24 नवंबर 2018

तुम्हारे आने से

सुरमई शाम हुई है तुम्हारे आने से
फ़िज़ा ने रंग बदला तुम्हारे आने से

काली घटाएँ जो छाई थीं चेहरे पे
 वो सब छंट गईं तुम्हारे आने से

सुकून छीन लिया था तेरी जुदाई ने
मिला है दिल को सुकूँ तुम्हारे आने से

कसक उठती थी जब धड़कता था दिल
मिली दिल को तसल्ली तुम्हारे आने से
@मीना गुलियानी 

शुक्रवार, 23 नवंबर 2018

फिर से तड़पा जाता है

न मालूम कितने लम्बे
होते हैं ये जुदाई के पल
दिल कहता है तू सम्भल
लेकिन ये पागल मन है
जो फिर भी जाता मचल
हर पल फिर से दिल में
होने लगती है हलचल
ये सुनकर कि तुम आओगे
दिल को कुछ करार आता है
लेकिन ये लम्बा इंतज़ार
फिर से तड़पा जाता है
@मीना गुलियानी 

गुरुवार, 22 नवंबर 2018

मैं मिटाना चाहता हूँ

मेरा कोई नहीं है तेरे सिवा
सुनले पुकार मत देर लगा
तुम सुनके सदा मेरी आ जाओ
आ जाओ   आ जाओ  आ जाओ

गुलशन के सारे फूल भी तेरा नाम ले रहे हैं
हवा के मस्त झोंके भी जुल्फों को छू रहे हैं
रेशम से भी मुलायम तेरा हाथ छू रहे हैं

मिल जाएँ सारी खुशियाँ मिले साथ जो तुम्हारा
तेरे सिवा न इक पल मुझे जीना भी गवारा
तू ही है मेरा साहिल तू ही मेरा किनारा

तेरे दिल में इक जहाँ मैं बनाना चाहता हूँ
तुझे आज तो अपना मैं बनानां चाहता हूँ
तेरे ग़म को हमेशा मैं मिटाना चाहता हूँ
@मीना गुलियानी 

बुधवार, 21 नवंबर 2018

प्रेम का बन्धन

कैसा है ये प्रेम का बन्धन
जिसमे बंध गया आज मेरा मन
जो पहले मुक्त गगन में
पंछी बन विचरता फिरता था
अब एक पिंजरे में कैद हो गया
लेकिन ये कैद भी न मालूम
क्यों सुखद महसूस होती है
पंछी को पिंजरे से मोह हो गया
कितना विरोधाभास है
किन्तु ये सच है क्योंकि
जिस मंजिल की उसे तलाश थी
वो मिल गई है
और अपने पाँव में खुद
उसने जंजीरें बांध ली हैं
@मीना गुलियानी


मंगलवार, 20 नवंबर 2018

खुद के सताये बैठे हैं

तू आये न आये तेरी ख़ुशी
हम आस लगाए बैठे हैं

कभी परवाह नहीं की दुनिया की
हर हाल में हम तो खुश ही रहे
जैसा तुमने चाहा था हमसे
हम वैसे ही बनकर के रहे
अब और भला क्या मर्जी तेरी
हम खुद को लुटाये बैठे हैं

दिल हमने फना किया तुझ पर
दुनिया से न पूछा था हमने
दुनिया ने सितम लाखों ही किए
अफ़सोस मगर न किया हमने
पर तुम हमको इल्ज़ाम न दो
हम खुद के सताये बैठे हैं
@मीना गुलियानी


जब सारा जग सोता है

कभी इस दिल ने पुकारा जो तुम्हें
पलटकर इक बार तो लौट आना
ये माना कि मुश्किल तो बहुत है
पर आसां नहीं दिल को समझाना
 ख्वाहिशें इंसान को ज़िंदा रखती हैं
 आसां होता है ऐसे हाल में मर जाना
दिल धड़कता हे जब किसी के सीने में
रहता है उसका ऐतबार जिंदा दिल में
करता है पल पल किसी का इन्तज़ार
रहता है  सदा उसके लिए वो बेकरार
देता खुद दलीलें दिल को समझाता है
दिल है कमबख़्त कब समझ पाता है
हर आहट पे उसके आने का गुमा होता है
जागता रहता है जब सारा जग सोता है
@मीना गुलियानी 

रविवार, 18 नवंबर 2018

पाया उसका साथ

जिंदगी भर के लिए माँगा मैंने तेरा ही साथ
अब चाहे जान चली जाए न छूटेगा ये हाथ

उसने जब आँखों ही आँखों में इज़हार किया
दिल मेरा डूब गया इतना मुझे प्यार किया
गम न याद आये ऐसी थी वो हालात की रात

सुर्ख आँचल था वो उसका जो लहराता गया
मेरे जिस्म और रूह को भी महकाता गया
शोख नज़रों से थी बिजली गिराने की रात

नरम नाज़ुक वो फूलों की तरह कोमल वो हाथ
पंखुड़ी जैसे कंपकंपाते से धड़कते दिल का साथ
डूबते राही को मंजिल मिली पाया उसका साथ
@मीना गुलियानी


शनिवार, 17 नवंबर 2018

तुमको बताने आ गया

इस भरी दुनिया से खाली आ गया
आ गया दर पे सवाली आ गया

क्या पता था फूल में भी ख़ार है
ख़ुदपरस्ती का यहाँ बाज़ार है
प्यार में व्यापार धोखा खा गया

ज़र ज़मी जोरू जवानी का खुमार
बेख़बर था आपसे परवरदिगार
क्या करूँ इज़हार मैं शर्मा गया

जानकर अनजान मैं बनता रहा
छोड़कर नेकी बदी करता रहा
होश में आया तो मैं घबरा गया

जो भी चाहो दो सज़ा गुनहगार हूँ
है हकीकत इसलिए लाचार हूँ
हाले दिल तुमको बताने आ गया
@मीना गुलियानी 

बाग़ सारा मिल गया

मेरी उम्मीद से बढ़के था करम तेरा हुआ
तलब बूँद की थी और दरिया मिल गया

जब रहमत तेरी मिली मौज कश्ती बन गई
डूबने वाले को तिनके का सहारा मिल गया

झड़ गए वो सूखे पत्ते पेड़ सब्ज़ बन गया
जितना उसका लुटा उससे ज्यादा मिल गया

अब बाकी कहने को बचा क्या चैन मिल गया
फूल हाथ आया समझो बाग़ सारा मिल गया
@मीना गुलियानी 

गुरुवार, 15 नवंबर 2018

इक हसीन ज़हमत है

होश में तुम बातें मत किया करो
होश की बात करना तो वहशत है

सब यहाँ रोज़ मर मरके जीते हैं
फिर भी और जीने की हसरत है

सर पर सभी बोझ उठाके चलते  हैं
यह जिंदगी भी इक  हसीन ज़हमत है
@मीना गुलियानी 

बुधवार, 14 नवंबर 2018

गूँज उठेगा संसार

जीवन की वीणा बाजे ना
पड़ गए झूठे तार

बिगड़े ठाठ से काम बने क्या
मेघ बजे न मल्हार

पंचम छेड़ो मद्धम बाजे
खरज बने गन्धार

इन तारों तरबों को फेंको
उत्तम तार से नया  होए सिंगार

इसमें जो सुर अब बोलेंगे तो
गूँज उठेगा संसार
@मीना गुलियानी


सोमवार, 12 नवंबर 2018

समझ लो उसे जीना आ गया

प्यार में जिसे जलना आ गया
समझ लो उसे जीना आ गया

उल्फत की यही रीत है यारो
कोई न किसी का मीत है यारो
प्रेम में ज़हर जिसे पीना आ गया
समझ लो उसे जीना आ गया

कब सुनते हैं इश्क में जलने वाले
कब सुनते दिल के नाले दुनिया वाले
काँटों से गुज़रके जिसे जीना आ गया
समझ लो उसे जीना आ गया

इश्क  में करते खुद को फ़ना दिल वाले
ये दिल वाले भी होते हैं कुछ मतवाले
 जिगर का लहू जिसे पीना आ गया
समझ लो उसे जीना आ गया
@मीना गुलियानी 

गुरुवार, 8 नवंबर 2018

मुझे ढूँढ ही लेगा

मेरा दिल आज कहीं पर खो गया है
देखना तुम्हारे आस पास तो नहीं
मिल जाए तो मुझे संदेशा दे देना
हवा के झोंके आके मुझे बता देंगे
पवन की सुरभि भी मुझे बता देगी
नभ के तारे भी उसे ढूँढ़ ही लेंगे
जुगनु अपनी चमक से राह बतायेंगे
सुबह की ओस की बूँदें उसे नहला देंगी
गुलशन के फूल पत्ते उसे सजा देंगे
तुम तनिक भी उसकी चिंता न करना
वो खुद भी अपना आशियाना जानता है
कहीं न कहीं से वो मुझे ढूँढ ही लेगा
@मीना गुलियानी

मंगलवार, 6 नवंबर 2018

इस दाव में तेरी जीत नहीं

भक्ति की यह तो रीत नहीं
मन और कहीं तन और कहीं

मोहमाया ने पर्दा डाला
लहराती आँखों में माया
तू हाथ में माला ले बैठा
मन में भगवान की प्रीत नहीं

मनवा विषयों में झूम रहा
मनवा पापों में घूम रहा
मन को तू कैसे समझाए
इस दाव में तेरी जीत नहीं
@मीना गुलियानी 

सोमवार, 5 नवंबर 2018

न जाने तुम कब आओगे

सहर अब शाम बन चुकी
न जाने तुम कब आओगे
फ़िज़ा भी रंग बदल चुकी
न जाने तुम कब आओगे

सितारे न जाने कहाँ खो गए
नज़ारे सब खामोश क्यों हो गए
हवा भी अब तो बदल चुकी
न जाने तुम कब आओगे

शमा हर महफ़िल में जल गई
ये रंगत पल भर में बदल गई
धुएँ में शब ये ढल चुकी
न जाने तुम कब आओगे
@मीना गुलियानी 

रविवार, 4 नवंबर 2018

कैसे विजय को पाना

कठिन हैं राहें और रास्ता अनजाना
ऐ मुसाफिर तू कदम धीरे से बढ़ाना

रखना हमेशा हौंसला तू लांघ लेगा पर्वत
ऊँची चोटी देखके बिल्कुल नहीं घबराना

हर राह आसान हो जाती है चाहे हो मुश्किल
कर विश्वास तू खुद पे नहीं पड़ेगा पछताना

हर फैंसले से पहले बाज़ू भी आज़मा लेना
ऐसा न हो राह में दुश्मन बने ये ज़माना

सह सह के मुश्किलों को संवरेगी तेरी जिंदगी
लेकिन तू हर कदम को  हँसके आगे बढ़ाना

हों नेक जिनके इरादे वो फिर क्यों घबरायें
हर मुश्किल से सीखें कैसे विजय को पाना
@मीना गुलियानी 

शनिवार, 3 नवंबर 2018

मेरे जख्मों पे तुम मरहम

ज़माना दिए जा रहा ग़म पे ग़म
संभालो ऐ माँ न निकल जाए दम

सताया गया हूँ मैं संसार से
उठा लो मुझे ज़रा प्यार से
बड़ा होगा मुझपे तुम्हारा करम

मेरी नाव है डूबती जा रही
किनारा कहीं भी नहीं पा रही
खत्म होने को है मेरा ये जन्म

मुसीबत में हूँ माँ मैं लाचार हूँ
तुम्हारी दया का तलबगार हूँ
उठाले मुझे गोद में कम से कम

मेरा दिल मैया आज घायल हुआ
नहीं रास आई कोई भी दवा
लगाओ मेरे जख्मों पे तुम मरहम
@मीना गुलियानी 

शुक्रवार, 2 नवंबर 2018

अब तो दर्श दिखा जा रे

सांझ भई घर आजा रे पिया सांझ भई घर आजा रे
तुम्हरे दर्श को तरसे नैना अब तो दर्श दिखा जा रे

तुम बिन कल नहीं पावत मोरा जियरा
तड़पत निशदिन समझत नहीं जियरा
अब तो इसे समझा जा रे

कैसे भेजूँ तुमको मैं पाती
आँसू कारण लिख न पाती
दिल को धीर बँधा जा रे

जल्दी से आओ प्रीतम प्यारे
नैनो  के दीपक बाट निहारे
अब तो दर्श दिखा जा रे
@मीना गुलियानी 

पहिया चलता रहता है

 जिंदगी दो पल की है
उसे हँसकर जीना सीखो
वक्त के साथ चलना सीखो
वो खुद ही बदल जाएगा
यूँ घुट घुट कर मत जियो
खुली हवा में हँसकर जियो
जो बातें तेरे बस में नहीं
उनको ईश्वर पर छोड़ दो
वो ही सब उलझनें मिटायेगा
ख़ुशी और ग़म दो पहलू हैं
इनका समन्वय होना जरूरी है
दोनों साथ साथ नहीं आते
सुख है तो दुःख भी होगा
वक्त पल पल बदलता है
इसका पहिया चलता रहता है
@मीना गुलियानी 

बुधवार, 31 अक्टूबर 2018

गज़ब दिल पे ढाने लगी है

चाँद सरगोशियाँ कर रहा है
जिंदगी मुस्कुराने लगी है
उसके नाज़ुक लबों पे फिर से
गुनगुनाहट सी आने लगी है

कैसा आलम नशीला है छाया
बन गया अपना जो था पराया
फिर से सजने लगे आज गुंचे
हर कली खिलखिलाने लगी है

उनके हाथों में मेहँदी लगी है
सुर्ख जोड़े में दुल्हन सजी है
पायल की खनक उनकी देखो
बोल मीठे सुनाने लगी है

उफ़ ये शर्माता नाज़ुक सा चेहरा
उसपे लहराती जुल्फ़ों का पहरा
उठती गिरती पलकों की चिलमन
क्या गज़ब दिल पे ढाने लगी है
@मीना गुलियानी

मंगलवार, 30 अक्टूबर 2018

रणचण्डी बन सामना करेगी

नारी तू नहीं है निर्बल
तू तो सदा से सबल
देवों की तू है जननी
तुझसे मिले सबको बल
तू है वरदायिनी आदिशक्ति
अन्नपूर्णा और सती सावित्री
तू ही विश्व की कर्त्ता भर्ता
तू पुरुष की अनुगामिनी सहभागिनी
तू है  पुरुष का संबल पर
वो तुझसे हमेशा करता छल
युगों युगों से छलता आया है
हर युग में तूने पीड़ा पाई है
तू  मोक्षदायिनी मुस्काई है
कभी द्रौपदी कभी सीता के रूप में
तूने पीड़ा  को झेला है पर तूने
कभी हार न मानी विजय पाई है
पुरुषों की प्रवृति कब सुधरेगी
हमेशा नारी पर कुदृष्टि डाली है
कभी चीरहरण अपहरण बलात्कार
सब अत्याचार व्यभिचार नारी पर हुए
पर अब और नहीं सहेगी अब वो
दुर्गा का रूप धरेगी हर अत्याचार का
दुराचार का रणचण्डी बन सामना करेगी
@मीना गुलियानी 

सोमवार, 29 अक्टूबर 2018

अब सुधर गए

दिल की गहराई में तुम उतर गए
सारे गिले शिकवे जाने किधर गए

तुम इस कदर समाये हो दिल में मेरे
जिस तरह कि नभ में तारे बिखर गए

मेरी हसरतें भी पूछती हैं उनसे क्या कहूँ
मेरे तो सब अरमान मुझको बिसर गए

तन्हाईयाँ पूछती नहीं तेरा पता कभी
हालात जिंदगी के जैसे अब सुधर गए
@मीना गुलियानी 

रविवार, 28 अक्टूबर 2018

गजब हो जाएगा

तुम प्यार से इक बार मुस्कुरा दो
गजब हो जाएगा

तेरी यादों में खोया मैं रहता हूँ
अपनी मस्ती में सोया रहता हूँ
तुम ख़्वाब में आके मुझे जगा दो
गजब हो जाएगा

फ़िक्र न दुनिया की न पर्दादारी है
तेरी चौखट पर  ही अर्ज गुज़ारी है
मेरे सोए हुए नसीब को जगा दो
गजब हो जाएगा
@मीना गुलियानी

शनिवार, 27 अक्टूबर 2018

प्रात: से हो रही थी

नव प्रभात वेला में उषा ने अँगड़ाई ली
अलसाई हुई मुंदी अपनी आँखें खोली
फिर उठकर वो जल भरने पनघट गई
पहले  नदी में स्नान किया सद्य स्नाता
धवल वस्त्रों में ही नदी से बाहर निकली
खुले घुंघराले केश मुक्ताकण लुटा रहे थे
सूरज रश्मियों को न्यौछावर करने लगा
वातावरण पक्षियों के कलरव से गूँज उठा
फूलों की सुगन्ध मन प्रफुल्लित कर रही थी
उषा ने सर पर  रत्नजड़ित मुकुट पहना
बालों में गजरा लगाया कर्णफूल सजाए
कुंकुम लगाया स्वर्ण कंगन मुक्ताहार पहना
धरा पर धन धान्य की वर्षा हाथों से की
धरा प्रमुदित होकर खुशियाँ समेटने लगी
मंदिरों में घंटा घड़ियाल शंखनाद होने लगे
मंगला आरती के लिए जनता उमड़ पड़ी
देवगण भी गगन से पुष्पवर्षा करने लगे
भक्तगण भावविभोर होकर स्तुति करने लगे
ढोलक नगाड़े की धुन पर भक्त  झूमने लगे
प्रभु के दर्शनों की शोभा अनिवर्णीय थी
भक्तगण  स्वयं को धन्य मानने लगे
ईशकृपादृष्टि उन पर प्रात: से हो रही थी
@मीना गुलियानी


शुक्रवार, 26 अक्टूबर 2018

ये वादा कर लो

दिल न तोड़ोगे कभी आज ये वादा कर लो
यूँ ही तुम साथ निभाने का वादा कर लो

सपने देखे जो अधूरे से अधूरे हैं अभी
दिल की बात मुलाक़ात अधूरी है अभी
चंद लम्हों के लिए साथ का वादा कर लो

फिर कभी मिलना हो पाए मुमकिन ही नहीं
दिल का अफसाना अधूरा ही न रह जाए कहीं
कम न होंगे कभी जज़्बात ये वादा कर लो

फिर ये एहसास दिलाना भी जरूरी तो नहीं
तुमको हम पास बुला पाएं जरूरी तो नहीं
पूरे होंगे सभी अरमान ये वादा कर लो
@मीना गुलियानी 

गुरुवार, 25 अक्टूबर 2018

झाँके प्रेम से भोले ये नयन

जबसे मिला है प्रेम तुम्हारा 
दिल मदहोश फिरे बेचारा 
मन पंछी को मिला सहारा 
समझे ये नैनो की भाषा 
तन मन जोगी भया उदासा 
खिला फूल सा जीवन उपवन 
सुरभित हुआ प्रफुल्लित मन 
भावों का हुआ अवगुण्ठन 
अश्रु रहित हैं आज नयन 
प्यासी प्यासी ये चितवन 
झाँके प्रेम से भोले ये नयन 
@मीना गुलियानी 

बुधवार, 24 अक्टूबर 2018

आँगन ये जगमगा दिया

उठाके सर को नज़र मिलाके जीना तुमने सिखा दिया
लबों पे मेरी हँसी को फिर से तुमने आके जगा दिया

न होश खोये न पल गंवाए
कहीं भी कुछ भी न भूल पाए
ख्वाबों में आके मुझे जगाके
मुस्कुराना फिर सिखा दिया

हैं पल सुहाने तुम्हें जो पाया
दिल में हमने दिया जलाया
बुझा न पाएगी कोई आँधी
शमा को ऐसे जला दिया

पकड़ा जो तेरी वफ़ा का दामन
छुड़ाए कोई है किसमें दम
खुशियों भरी है दिवाली आई
आँगन ये जगमगा दिया
@मीना गुलियानी

मंगलवार, 23 अक्टूबर 2018

वजूद भी उसका वो ले गया

सफर के बीच में छोड़ा उसने
न जाने वो किधर गया
तोड़ गया वो दिल को मेरे
ग़मों के हवाले कर गया
नशा प्यार का सर पे चढ़ा था
उसका खुमार भी उतर गया
दिन ढलते ही सांझ हुई जब
सैलाब सा वो ठहर गया
सुंदर सा जो बनाया घरोंदा
तिनका तिनका बिखर गया
मुझको यकीं मेरे ख़्वाबों पर था
वजूद भी उसका वो ले गया
@मीना गुलियानी 

सोमवार, 22 अक्टूबर 2018

ऐतबार ज़रूरी है

जीने के लिए वजह का होना ज़रूरी है
दिल में थोड़ी जगह होना ज़रूरी है

चलो कहीं दूर चलें पर तेरा साथ ज़रूरी है
रात ढल चुकी अँधेरे में रोशनी ज़रूरी है

चलेंगे तो फांसले मिटेंगे घाव भरने ज़रूरी हैं
पहले दीवाने थे अब अजनबी होना ज़रूरी है

 दूरी के एहसास के लिए बिछुड़ना ज़रूरी है
प्यार होने पर एक दूसरे पे ऐतबार ज़रूरी है
@मीना गुलियानी 

रविवार, 21 अक्टूबर 2018

तू मेरा नसीब भी है

तू मेरा नसीब है तू मेरे करीब है
तू दिल जान मेरी तू मेरा हबीब है

तू मेरे दिल में बसा
मेरी रूह तक पहुँचा
कैसे करूँ दूर तुझे -तू मेरा रकीब भी है

नेकी बदी से बँधा
अजब रिश्ता है तू
क्या कहूँ कैसे कहूँ -तू मेरे करीब भी है

तुझे हर पल चाहा
तुझे हर पल पूजा
दुनिया के ताने शी -तू मेरा नसीब भी है
@मीना गुलियानी 

शनिवार, 20 अक्टूबर 2018

दर्द से मेरा बेहाल है

तू नज़र उठाके देख तो ले तेरे सामने मेरा हाल है
तुझे कैसे मैं जुदा  करूँ मेरी जिंदगी का सवाल है

कैसे भूल जाऊँ वो पल हँसी जब तुम मिले थे राह में
वो नज़ारे अब हैं बुझे बुझे मुझे इसका ही तो मलाल है

मेरी हसरतें भी सिमट गईं जब तूने नज़रें उधर करीं
मेरी सांसें भी हैं थमी थमी तेरी नज़रों में भी सवाल है

हुए होश मेरे गम यहाँ तुझे अपना समझे थे हम यहाँ
तेरी बेरुखी ने सितम किए  दिल दर्द से मेरा बेहाल है
@मीना गुलियानी 

शुक्रवार, 19 अक्टूबर 2018

प्यार का एहसास तुम हो

मेरी तन्हाई और ख़्वाबों में तुम हो
मेरे होंठों की हँसी , बातों में तुम हो

उनींदी पलकें मेरी और ख़्वाबों में तुम हो
महकता तन मेरा उसकी खुशबु तुम हो

तुम्हीं मेरे सवालों में जवाबों में तुम हो
मेरी धड़कन में बसी हर सांस में तुम हो

मेरा प्यार है तरसता रेगिस्तान बरसात तुम हो
मैं हूँ प्यार की अधूरी कहानी मेरा प्यार तुम हो

मेरे दिल के कोने  में बसी इक याद तुम हो
मेरी रूह में छिपा प्यार का एहसास तुम हो
@मीना गुलियानी


गुरुवार, 18 अक्टूबर 2018

ज़रा आहिस्ता चल

तेरे आने की खबर से मची हलचल
ज़रा आहिस्ता चल

तू है मसरूफ़ वहाँ मैं हूँ बेताब यहाँ
तेरे पास आने के न दिखें कोई निशाँ
कैसे टुकड़ों में जिए जाएँ हम
ज़रा आहिस्ता चल

दिल मेरे बस में नहीं तू मेरे पास नहीं
कैसे कहदूँ तुमको कि मैं उदास नहीं
तू जो आ जाए तो दुःख होगा कम
ज़रा आहिस्ता चल

जिंदगी है सूनी मेरी है अधूरी तेरे बिन
तू है खुशियों भरा हो जाए सुहाना दिन
मिले जो तू सब पा जाएँ हम
ज़रा आहिस्ता चल
@मीना गुलियानी


बुधवार, 17 अक्टूबर 2018

माता की भेंट -9 -सबको पैसे से काम है

तुझे छोड़ कहाँ जाऊँ माँ मैंने ढूँढा ये सारा जहान है 
अब तो ये सारा जीवन मैंने लिख दिया तेरे नाम है 

तेरे बिना मैं चैन न पाऊँ  रोते रोते वक्त कटे 
हर पल तेरी याद में गुज़रे दिन बीते यूँ रात कटे 
यूँ ही जीवन बिताऊँ सुबो शाम है तेरे बिन कहाँ आराम है 

जाने कौन सी गलती पर तू रूठ गई है अब मुझसे 
हूँ नादान तेरा बच्चा माँ अब तो मान जा माँ मुझसे 
तेरे चरणों में मेरा प्रणाम है यही विनती करूँ आठों याम है 

माँ बेटे का पावन नाता हर नाते से ऊँचा है 
तुझको अपना माना मैंने हर नाता अब झूठा है 
दुनिया स्वार्थ का नाम है सबको पैसे से काम है 
@मीना गुलियानी 

मंगलवार, 16 अक्टूबर 2018

माता की भेंट -8 -रास्ता तू दिखा देना

मुझे आस तेरी मईया न निराश मुझे करना 
सब कष्ट हरो मेरे आँचल की छाँव करना 

मेरे मन के द्वारे में आ कर लो बसेरा माँ 
तेरी जोत जले मन में हो दूर अँधेरा माँ 
मैं आया शरण तेरी मुझे दर्श दिखा देना 

मेरी आस का बंधन कहीं टूट न जाए 
क्या सांस का भरोसा पल आये कि न आए 
मेरे नैन प्यासे हैं मेरी प्यास बुझा देना 

सब देख लिया जग में माँ कोई नहीं अपना 
सब झूठे नाते हैं जग सारा इक सपना 
मैं भटका राही हूँ रास्ता तू दिखा देना 
@मीना गुलियानी 

सोमवार, 15 अक्टूबर 2018

माता की भेंट -7 -दाती का भरा भंडार है

मईया का खुला दरबार है
द्वारे जो आये बेड़ा पार है 
करती मईया उद्धार है 
दाती का भरा भंडार है 

मांगी मुरादें सब पाते हैं 
झोली को भर ले जाते हैं 
महिमा उसकी अपार है 
दाती का भरा भंडार है

 न लौटा दर से कोई खाली है 
मईया मेरी मेहरों वाली है 
करती  सभी से वो प्यार है 
दाती का भरा भंडार है 

मोहमाया जाल से छुड़ायेगी 
बिगड़ी वो सबकी बनायेगी 
चरणों में गंगा की धार है 
दाती का भरा भंडार है 
@मीना गुलियानी 



रविवार, 14 अक्टूबर 2018

माता की भेंट -6 -जो उसके रंग में ढलते हैं

तेरे द्वार पे आने वालों के दुखड़े माँ पल में टलते हैं 
लाखों दुखियारे लोगों के इक पल में भाग्य बदलते हैं 

ले इच्छा जो भी आता है खाली न दर से जाता है 
हर एक सवाली का पल में अरमां पूरा हो जाता है 
बिगड़ी तकदीरें बनती हैं खुशियों के चमन खिलते हैं 

लौटा न दर से सवाली है ये माता शेरों वाली है 
दे मुक्ति का वरदान यही हर विपदा हरने वाली है 
ये सूरज चंदा और तारे उसके कहने से चलते हैं 

हर जीव में उसकी ज्योति है हर सीप बनाए मोती है 
खुशियों से झोली भर जाए कृपा जो उसकी होती है 
माँ करती उसकी रखवाली जो उसके रंग में ढलते हैं 
@मीना गुलियानी 

शनिवार, 13 अक्टूबर 2018

माता की भेंट -5 -राह निहारें बड़ी देर से

आ जा माँ मेरे नैन दीवाने तेरी ,
राह निहारें बड़ी देर से 

आजा मेरी मईया तुझे है पुकारा 
तेरे बिन जहाँ में है कौन हमारा 
देख ले आकर हाल तू मेरा 
राह निहारें बड़ी देर से 

माँ गम के भंवर में डूबी मेरी नैया 
माँ पार लगाओ तू ही तो खिवैया 
देर न करना मेरी मईया 
राह निहारें बड़ी देर से 

तूने हर दुखी को माँ धीर बंधाया 
बता तूने माता मुझे क्यों बिसराया 
मैं हूँ तेरे दर का भिखारी 
राह निहारें बड़ी देर से 

तुझे ही तो मईया अपना है माना 
हूँ सारे जहाँ से माता मैं बेगाना 
मैं तो मईया शरण तिहारी 
राह निहारें बड़ी देर से 
@मीना गुलियानी 



शुक्रवार, 12 अक्टूबर 2018

माता की भेंट -4 -चरणकमल से लौ लागी

अखियाँ दर्शन अनुरागी ,चरणकमल से लौ लागी

अब तो दर्श दिखा जाना 
प्यास को आके मिटा जाना 
मन मेरा बना बैरागी 

मईया जी अब न देर करो 
मन की उदासी दूर करो 
प्रीत अगन मन में जागी 

जोड़ा तुम्हरे संग नाता 
बेटी मैं हूँ तुम माता 
माँ ने क्यों ममता त्यागी 
@मीना गुलियानी 

गुरुवार, 11 अक्टूबर 2018

माता की भेंट -3 - तू मुझे अपना

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ओ आजा मेरी मईया ओ प्यारी प्यारी मईया
मोरे अंगनवा तू जल्दी से आ

रात दिन मईया मैं राह देखूँ तेरी
काहे तू न आये लगाए मईया देरी
जल्दी से आजा न और तरसा

नैना मेरे मईया जी दर्शन मांगे
तुझसे ऐ मईया न कुछ और मांगे
आके तू अखियों की प्यास मिटा

दुनिया ने मईया है मुझको सताया
सब कुछ छोड़ मईया तेरे दर आया
सुनले तू विनती माँ लाज बचा

कब तक तेरी माँ राह निहारुँ
तुझे छोड़ मईया मैं किसको पुकारूँ
छोड़ा ज़माना तू मुझे अपना
@मीना गुलियानी

बुधवार, 10 अक्टूबर 2018

माता की भेंट -2 --लख चौरासी के हैं फेरे


आजा माँ ----- ---जगदम्बे
मैं तो कबसे खड़ी तेरे द्वार
मईया आके सुनले पुकार 

मैं तो मईया तेरी दासी , अखियाँ दर्शन की हैं प्यासी
दूर करो मेरे मन की  उदासी

छाए हैं चारों ओर अँधेरे , दर्शन देकर कर दो सवेरे
मिट जाएँ माँ सब ग़म मेरे

तेरा दर्शन जब मैं पाऊँ , तन मन अपना भेंट चढ़ाऊँ
तेरी महिमा निशदिन गाऊं

तुम बिन मेरा कोई न दूजा , करूँ मैं निशदिन तेरी पूजा
तेरे सिवा  न भाए दूजा

मईया जी हम बालक तेरे ,माया जाल के काटो घेरे
लख चौरासी के हैं फेरे
@मीना गुलियानी 

मंगलवार, 9 अक्टूबर 2018

माता की भेंट ---अज्ञान को मिटाओ

माता की भेंट


हे अम्बिके भवानी दर्शन मुझे दिखाओ
अन्धकार ने है घेरा ज्योति मुझे दिखाओ

मईया तेरे दर का मुझको तो इक सहारा
नैया भंवर में डोले सूझे नहीं किनारा
मंझधार से निकालो नैया मेरी बचाओ

लाखों को तूने तारा भव पार है उतारा
बतलाओ मेरी माता मुझको क्यों बिसारा 
बच्चा तेरा हूँ मईया मुझको गले लगाओ

सूनी हैं मेरी राहें आंसू भरी निगाहें
बोझिल हैं मेरी सांसे दुःख कैसे हम सुनाएं
गम आज सारे मेरे मईया तुम्हीं मिटाओ

तेरा नाम सुनके आया जग का हूँ माँ सताया
मुझको गले लगाओ तेरी शरण हूँ आया
रास्ते विकट हैं मईया अज्ञान को मिटाओ
@मीना गुलियानी 




जैसा कि आप सभी को विदित है कि कल से नवरात्र प्रारम्भ होने जा रहे हैं इसलिए हर वर्ष की भांति

कल से माता की भेंट प्रस्तुत की जायेगी  आप सभी को अग्रिम शुभकामनाएँ




@मीना गुलियानी 

सोमवार, 8 अक्टूबर 2018

अपना सर झुकाए बैठा हूँ

इक बोझ सा सीने में छुपाए बैठा हूँ
सुलगते आग के शोले दबाए बैठा हूँ

गुज़रते जा रहे कितने  कारवां जिंदगी के
चंद लम्हों के लिए खुद को बचाए बैठा हूँ

दिल की हसरतें मुँह अपना खोल देती हैं
मैं उसे भी अपनी नज़रें चुराए बैठा हूँ

रूठने वाले तेरी सलामती की दुआ करता हूँ
उसके सज़दे में अपना सर झुकाए बैठा हूँ
@मीना गुलियानी

रविवार, 7 अक्टूबर 2018

रोशन शमा से हम ही करेंगे

हम तुमसे कभी कोई भी शिकवा न करेंगे
जब तक भी जियेंगे तुझे रुसवा न करेंगे

वादा यही है हमारा हो बुलंद तेरा सितारा
हर रोज़ तेरे लिए दुआ हम रब से करेंगे

तू चाहे अर्श पे रहे हम रह लेंगे फर्श पर
तुझसे कभी इसकी शिकायत न करेंगे

न टूटे हौंसला तेरा कभी कैसा भी हो सफर
तेरी राहों को रोशन शमा से हम ही करेंगे
@मीना गुलियानी 

शनिवार, 6 अक्टूबर 2018

लुटे न कभी कारवां किसी का

ओ ऊपर वाले सुनले अफसाना बेकसी का

तेरे सामने खड़ा हूँ हाथों को मैं फैलाए
भरदे तू झोली सबकी जो आस हैं लगाए
खाली न तू लौटाना दामन कभी किसी का

अफसाना सुन मेरा तू ऐ दो जहाँ के वाली
गिरतों को दे सहारा लौटाना न दर से खाली
मिले सबको ही सहारा तेरी ही बंदगी का

मतलब की सारी दुनिया मतलब के सारे नाते
दाता तू रहम करना जो भी दर पे तेरे आते
मंजिल पे ही लुटे न कभी कारवां किसी का
@मीना गुलियानी 

शुक्रवार, 5 अक्टूबर 2018

बांधा तेरी कलाई पे डोरा

खन खन खनके कंगना मोरा
जियरा मोरा बना चकोरा

रोज़ दुआएँ रब से मांगू
रहे सलामत साजन मोरा

सुर्ख लिबास जो पहना मैंने
उसपे दुपट्टा काला ओढ़ा

नज़र लगे न तुझको किसी की
बांधा तेरी कलाई पे डोरा
@मीना गुलियानी 

गुरुवार, 4 अक्टूबर 2018

विश्वास से इसे पनपाया है

मैंने अपनी वफाओं का दीपक
गमों की आँधियों में जलाया है
अपने दामन में उसे छुपाया है
तेज़ हवा के झोकों से बचाया है
अपनी तमन्नाओं से सजाया है
सुरभित फूलों से महकाया है
भावनाओं का घरोंदा बनाया है
तिनके जोड़के आशियाँ बनाया है
तितलियों के रंगों से रंगाया है
जुगनु की रोशनी से चमकाया है
चंदा की रोशनी से जगमगाया है
सूरज की किरणों से नहलाया है
प्रेम से इसे मैंने सदा सहलाया है
अटूट विश्वास से इसे पनपाया है
@मीना गुलियानी 

बुधवार, 3 अक्टूबर 2018

चलूँ मैं पिया की नगरिया रे

आज कंगनवा मोरा खनके चलूँ मैं पिया की नगरिया रे
घुंघरू पायलिया के छनके चलूँ मैं पिया की नगरिया रे

आज सखी री कुछ न कहूँगी उनसे जियरा की बात
आँखों से ही वो सब पढ़ लेंगे मोरे मनवा की बात
दिल मेरा अभी से धड़के चलूँ मैं पिया की नगरिया रे

धरती पे सीधे पग न पड़े हैं झूमें सारा गात
ख़ुशी से मैं फूली न समाऊं दर्शन होंगे आज
देखूँगी उनको जी भरके चलूँ मैं पिया की नगरिया रे

ओ रे चंदा तू भी सुनले छुप जाना कहीं आज
तेरे सामने दिल मोरा डोले आती मोहे  लाज
सर से चुनरिया भी सरके चलूँ मैं पिया की नगरिया रे
@मीना गुलियानी


मंगलवार, 2 अक्टूबर 2018

यूँ मुस्कुरा के चलिए

आँखों को हाथों से यूँ ही न मलिए
पग न फिसल जाए ज़रा संभलिए

है रास्ता बड़ा टेढ़ा मेढ़ा यहाँ का
सुझाई न देता है पथ में धुआँ सा
कदम ऐसे बहके न लहरा के चलिए

बहुत ठण्डी  ठण्डी  हवाएँ यहाँ हैं
फ़िज़ा का भी आलम मस्त यहाँ है
खा जाएँ धोखा न इतरा के चलिए

अभी तुमने मौसम को देखा कहाँ है
कभी आये पतझड़ कभी खुशनुमां है
बदल जाए रुत यूँ मुस्कुरा के चलिए
@मीना गुलियानी 

सोमवार, 1 अक्टूबर 2018

वो फिर से याद आने लगा है

तेरे आने का मुझे गुमां सा हुआ है
दिल का ये दिया न बुझने दिया है

नशा तेरे प्यार का आँखों में चढ़ा जो
सुरूर उसका हर पल बढ़ता रहा है

सुना है रात भर बरसा है  ये बादल
ये दिल फिर भी प्यासा ही रहा है

ये दिन अब तो ढलने लगा है
वो फिर से याद आने लगा है
@मीना गुलियानी 

रविवार, 30 सितंबर 2018

कैसा वहशीपना ये आज है

ज़रा सामने तो आओ युवको समाज बर्बाद हुआ आज है
आँख खोलके ज़रा देख लो तेरे हाथों में भारत की लाज है

पहले तो लड़की बिकती थी पर आज पुरुष भी बिकते हैं
गरीब की लड़की पढ़ी लिखी हो किन्तु धनिक पर मरते हैं
धिक्कार जवानों तुम्हें आज है क्या मुर्दा तुम्हारी आवाज़ है

देखो ज़रा तुम देश में कैसा  दहेज का ये व्यवहार चला
घर घर में कोहराम मचा है किसी के घर चूल्हा न जला
कई जीवन हुए बर्बाद हैं घर टूटने की कगार पे आज हैं

वक्त है नाज़ुक सम्भल भी जाओ थामो इस रफ्तार को
दहेज प्रथा का कलंक मिटाओ बदलो ऐसे समाज को
इन बेटियों की लुट रही लाज है कैसा वहशीपना ये आज है
@मीना गुलियानी 

शनिवार, 29 सितंबर 2018

भारत को उच्च शिखर पहुँचाया

आज फिर धूप आँगन में खिल उठी
मन के आकाश पर छितरा गई
कैनवास पर अक्स उभरने लगे
तूलिका रंग से भरकर चलने लगी
हरे रंग से धरा की हरीतिमा झलकी
सुनहरे रंग से धूप की किरणें चमकी
हथेली मेहँदी रचाकर माथे बिंदिया लगा
फूलों के कर्णफूल पहन धरा दुल्हन सी दमकी
पैरों में महावर  रचाकर रुनझुन पायल खनकी
गले में पहनी फूलमाला ओढ़ा पत्तों का दुशाला
काजल बदरी से चुरा धरा ने नैनो में लगाया
मांग में सिन्दूरी फूल चले झूमती उड़ाके धूल
स्वप्न हुए उसके सिन्दूरी हर आशा करने को पूरी
धरती ने खलिहान सजाया धन धान्य उपजाया
नए नए आयामों से भारत को उच्च शिखर पहुँचाया
@मीना गुलियानी

शुक्रवार, 28 सितंबर 2018

रुख़सत अब दे दीजिए जनाब

ये भोली चितवन और उस पर हिज़ाब
दिल  बोला वल्लाह क्या बात है जनाब

आये हो तुम दूर से बैठो ज़रा
कुछ तुमसे बातें करलें ज़रा
अच्छी शायरी कर लेते जनाब

जाने की जल्दी क्यों तुमको पड़ी
इतनी जल्दबाज़ी भी अच्छी नहीं
थोड़ा इत्मिनान कीजिए जनाब

 आयेंगे फिर भी सुनिए  हुज़ूर
ख़िदमत का मौका देंगे ज़रूर
रुख़सत अब दे दीजिए जनाब
@मीना गुलियानी



गुरुवार, 27 सितंबर 2018

तू शान बन के जी

ओ जीने वाले तू सिर्फ इक इंसान बनके जी
धरती का बोझ बनकर न हैवान बनके जी

हो पेट जिनका खाली तू उनका पेट भर
ओ मौज करने वाले कभी उनकी ले खबर
गिरतों का बन सहारा तू इंसान बनके जी

नैया भंवर में डोले किसी की  तू पार लगा दे
हो आफत में जां किसी की तू उसको बचाले
रोते  हुए चेहरे की  तू मुस्कान बनके जी

बन अन्धों की लाठी निराशों की आस बन
भटके हुए लोगों के लिए तू प्रकाश बन
इस पावन धरा की तू शान बन के जी
@मीना गुलियानी

इतनी न सज़ा दीजिए

अपने दिल में जगह दीजिए करम इतना अता कीजिए

दुनिया ने लाखो सितम ढाये हैं हम पर
थोड़ा मरहम लगा दीजिए

कभी तुझसे शिकवा या शिकायत न करेंगे
आते जाते रहा कीजिए

दिल्लगी की है हमने माना थोड़ी सी मगर
इतनी न सज़ा दीजिए
@मीना गुलियानी

मंगलवार, 25 सितंबर 2018

मानुष जन्म अनमोल रे

रे मन संभल संभल पग धरना
आँखें अपनी खोल रे
ये धरती है उबड़ खाबड़ कहीं
कदम न जाए डोल रे

काम क्रोध मद लोभ के रोड़े
रास्ता तेरा रोकेंगे
ईर्ष्या द्वेष महीधर बैठे
तुझको न बढ़ने देंगे
न डरना तू इनसे मानव
तू  अपनी राह टटोल रे

इनके प्रलोभन में मत आना
दूर से ही नाता निभाना
अपने साक्षीभाव में रहकर
दुष्कर्मों को दूर भगाना
समझ लेना जग नश्वर है
मानुष जन्म अनमोल रे
@मीना गुलियानी 

सोमवार, 24 सितंबर 2018

अपने जीवन की वीणा

ओ  जीने  वाले हँसते हँसते जीना

आँसू तेरे छलक न जाएँ
छलक कर ढलक न जाएँ
आँखों में ही इनको पीना

सूरज डूबे कभी न तेरा
जब तू जागे तभी सवेरा
तेरा रंग बदले कभी ना

बिजली तुझको राह दिखाए
सुख के स्वर में बजा बाँवरे
अपने  जीवन की वीणा
@मीना गुलियानी 

रविवार, 23 सितंबर 2018

कल फिर आये ना

तुमको कसम है मेरी दूर तुम जाओ ना
आओ बैठो पास मेरे ऐसे तरसाओ ना

कितने बरस के बाद दिन ऐसा आया
सपनों में तुमसे मिले फिर बने साया
आज की घड़ी को तुम यूँ ही गवाँओ ना

सोचा था दिल में सनम से होंगीं बातें
पता न था कितनी छोटी हैं मुलाकातें
बीता जाए ये लम्हा कल फिर आये ना
@मीना गुलियानी 

शनिवार, 22 सितंबर 2018

रास्ता खुल जाएगा

इच्छाएँ हमेशा बलवती रहती हैं
ये कभी भी मरती ही नहीं हैं
 कभी राहें भी धूमिल होती हैं
जिससे मन हताश हो जाता है
लेकिन मन के पाँव नहीं रुकते
मन मृगतृष्णा में ही डोलता है
जीवन में संतुष्टि आवश्यक है
खुशियों का स्त्रोत हमारे भीतर है
अपने जीवन को स्वयं संवार लो
सांसारिक कामनाओं का अंत करो
जीवन को कभी बोझ न समझो
अपने विवेक को जागृत कर लो
फिर आगे का रास्ता खुल जाएगा
@मीना गुलियानी 

शुक्रवार, 21 सितंबर 2018

लौटके आएँ

विरही नैना नीर बहाए
कोई इन्हें आके समझाये
हर पल पलकों में रहते हैं
अश्रु बन जो छलक न पाए

गम नैनो में छिपा रहता
व्याकुल मन की कहते व्यथा
बदरी जब भी घिरके आये
उमड़ घुमड़ के जल बरसाए

सावन की रिमझिम का मौसम
बूँदों की टिपटिप सुनते हरदम
प्यासा सावन बीत न जाए
कहदो पिया  से लौटके आएँ
@मीना गुलियानी 

गुरुवार, 20 सितंबर 2018

व्याकुल जियरा है तुम बिन

उलझ गए जबसे तोसे नैन
मन ने तनिक न पायो चैन
श्यामल रंग बदरी से चुराया
साँवरा तू मेरे मन में समाया
हँस हँस करे तू मोसे मीठे बैन
तेरी बन्सी मोरा जियरा चुराए
दिल मेरा बिन मोल बिका जाए
इसके मीठे सुर मन को लुभायें
आऊँ जब पनघट पे संग सखियाँ
बावरी बनायें कान्हा तोरी बतियाँ
सखियाँ करत मोसे हँसी ठिठोली
कान्हा तूने मति हर लीन्ही मोरी
चकोरी ज्यों तड़पे चंदा के बिन
ऐसे व्याकुल जियरा है तुम बिन
@मीना गुलियानी

बुधवार, 19 सितंबर 2018

तू जाने ना

कैसे दिन बीते कैसे कटी रतियाँ तू जाने ना
नैना बरसें जागूँ सारी रतियाँ तू माने ना

एक एक पल ये बरस सम लागे
व्याकुल नैना रोयें अभागे
तुम बिन कौन सुने इस दिल की
पीर जो अंतर् में मोरे जागे
कासे कहूँ पिया दर्द मैं अपना तू जाने ना

क्या हालत है तुम बिन मोरी
कबसे राह देखत हूँ तोरी
अब तो विनती सुनलो मोरी
बावरी हो गई विरह में तोरी
दर्द से दूखन  लागि मोरी अखियाँ तू जाने ना
@मीना गुलियानी 

मंगलवार, 18 सितंबर 2018

मेरी मंजिल कहाँ है

हर तूफ़ां को इशारा मिलेगा
हर लहर को किनारा मिलेगा
उठेंगीं मोजें समुन्द्र में जब भी
किश्ती को लेकिन धारा मिलेगा

हम वो नहीं बैठ जाएँ जो थककर
अभी हौसला और यकीं है खुद पर
चाहे लाख  तूफ़ां राहों में आएँ
पूरा करेंगे जो शुरू किया है सफर

हैं फौलादी बाजू उमंगें जवां हैं
दिलों में उमड़ा हुआ तूफ़ां है
ये सफर तो जैसे इक इम्तहाँ है
बताए कोई मेरी मंजिल कहाँ है
@मीना गुलियानी

सदायें दिए जा

उठाए जा रंजो -ओ सितम और जिए जा
 न शिकवा जुबां पे ला अश्क अपने पिए जा

यही तेरी किस्मत का फैसला ऐ दिल
उठाए जा दर्दो -अलम दुआएँ दिए जा

सताये ज़माना तू परवाह न करना
उसी की इबादत का सहारा लिए जा

कोई गम नहीं गर जान भी जाए
तू चौखट पे उसकी सदायें दिए जा
@मीना गुलियानी 

रविवार, 16 सितंबर 2018

राहों से काँटे बुहारना

ऐ मन तू कभी भी हिम्मत न हारना
दिन जैसे भी हों तेरे हँसके गुज़ारना

मत घबराना गर हो गहन अँधियारा
मन दीप जलाकर कर लेना उजियारा
उस उज्ज्वल रौशनी में जीवन गुज़ारना

जीवन में सुख दुःख तो आते हैं जाते हैं
हौसले वाले केवल लक्ष्य अपना पाते हैं
हर हाल में तू खुश होके जीवन संवारना

चाहे पर्वत रोके राहें चाहे सागर पार उतरना
हिम्मत से सम्भव है हर मुशिकल से उबरना
तू खुद अपनी  कंटीली राहों से काँटे बुहारना
@मीना गुलियानी 

शुक्रवार, 14 सितंबर 2018

हमसफ़र हमनशीं न हुए

ऐ चाँद तू गवाह रहना
        मेरे उन पलों का जो
        दूरी में उनकी बिताए
        हर कदम पे धोखे खाए
        लब से कुछ कह न पाए

ऐ चाँद तू गवाह रहना
       मेरी उन हसीन यादों का
       जो संग पिया के गुज़रीं
       जो डोर बँधी न उलझी
       जब उलझी कभी न सुलझी

ऐ चाँद तू गवाह रहना
        पलों का जो हमारे न हुए
        साये की तरह साथ चले
        बेगानों की तरह मिले बिछुड़े
        हमसफ़र हमनशीं न हुए
@मीना गुलियानी 

गुरुवार, 13 सितंबर 2018

हम संग और झूमें ज़मी

है प्यारा सफर और कितना हसीं
सुहाना है मौसम और संग हमनशीं

कितने प्यारे ये गुलशन यहाँ हैं
फूल हर रंग के सब यहाँ हैं
प्यारे प्यारे हैं नज़ारे नज़र लगे न कहीं

लहरें टकरातीं जब भी यहाँ हैं
उमंगें दिल की हो जाती जवां हैं
खूबसूरत ये समां है बदल न जाए कहीं

चाँद तारों का लगता है मेला
मेले में भी क्यों दिल है अकेला
चलो साथी झूमें हम संग और झूमें ज़मी
@मीना गुलियानी 

बुधवार, 12 सितंबर 2018

उसकी बलैंया लेती जाती

ये सुरमई शाम सुहाने झरने
कल कल बहता है पानी
ये हवा मदमस्त सी दीवानी
आई है रुत ये मस्तानी
नभ पर सितारे भी चमके
लगता है जुगनू जैसे दमके
खगवृन्द भी पंक्तिबद्ध आते
खुले व्योम में वो छा जाते
गाय चरकर शाम को आती
 कुमुदिनी देखो खिल जाती
चन्द्रमा भी गगन में निकला
चाँदनी को भी संग में लाया
 सितारों की ओढ़नी लहराती
जुल्फ़ें बादल सी बन जातीं
घटा में बिजुरिया चमक जाती
चाँदनी फिर पायल छनकाती
हिमकणों का मुकुट पहनती
मणिमेखला करधनी लटकाती
लगती वो स्वर्ग की अप्सरा सी
चले लज्जाती सकुचाती बलखाती
धरती उसकी बलैंया लेती जाती
@मीना गुलियानी

मंगलवार, 11 सितंबर 2018

कोहराम मचा रखा है

न कभी पूछ मुझसे वफ़ा में क्या रखा है
एक शोला सा है जो दिल में छुपा रखा है

कम नहीं होगी कभी मेरी वफ़ा तेरे लिए
वादा धड़कन ने ये कबसे निभा रखा है

ये ज़माना जिसे बेताब था दफन करने को
मैंने उस याद को सीने से लगा रखा है

सिर्फ़ नज़रों से ही बेताबी मिट जाती है
 फिर क्यों यूँ ही कोहराम मचा रखा है
@मीना गुलियानी

सोमवार, 10 सितंबर 2018

मन पंछी सा डोले

सखी री मोरा मनवा यूँ मुझसे बोले
भाग जगें मेरे जब उनके दर्श होलें

उन बिन मुझको चैन पड़े ना
डोलूँ इत उत ध्यान बँटे ना
छत पे कौआ भी बोले

आँखों से मेरे नीँद उड़ी है
प्यास जाने कैसी जगी है
दिल में उमंगें डोले

जाने कब आयेंगे साजन
बाट निहारूँ बनके पुजारन
मन पंछी सा डोले
@मीना गुलियानी 

रविवार, 9 सितंबर 2018

क्यों करूँ ख़ुद की फ़िक्र

पी जायेंगे खुद अकेले ही
यह चुप्पी का ज़हर
न हमसे कभी पूछना
क्यों छलकी ये नज़र
जुबां पर न लायेंगे कभी
शिकवा ज़माने भर का
न बतायेंगे किसी को कभी
क्या है अपनी अब खबर
पहले कभी न किया था जिक्र
सुना है तू नहीं है बेख़बर
फिर क्यों करूँ ख़ुद की फ़िक्र
@मीना गुलियानी 

शनिवार, 8 सितंबर 2018

लट ये बिखर जायेगी

ऐ चाँद कुछ देर के लिए तू छिप जा
मुझे एक झलक उसे देख लेने दे
तेरे आने से वो शर्मा जाती है लेकिन
तेरे ओझल होने पर वो नज़र आएगी

सितारे फ़लक पे चमकने दो ज़रा
मेरी उम्मीद को भी जगने दो ज़रा
बाज़ी किस्मत की भी पलट जायेगी
उसके रुख पे लट ये बिखर जायेगी
@मीना गुलियानी 

शुक्रवार, 7 सितंबर 2018

मैं उदास नहीं

मैं भाव भरी हूँ इक बदली
आज आँगन तेरे बरस गई
कितनी दुविधा में तुमसे मिली
अखियाँ भादो सी बरस गईं

कितने वो स्वप्न सुहाने थे
गुज़रे वो कल के ज़माने थे
थे कुछ वो ख़्वाब अधूरे से
 लब पर दिल के फ़साने थे

उस पल का अब एहसास नहीं
लगता ही नहीं तू पास नहीं
मेरे दिल में समाया रहता है
अब देख मुझे मैं उदास नहीं
@मीना गुलियानी 

गुरुवार, 6 सितंबर 2018

यादों के दीप जलते हैं

जिंदगी के सफर में अब तो हम
तेरी यादों के साथ चलते हैं
तन्हा न रह सकेंगे तुझ बिन हम
थामके हाथ हम साथ चलते हैं

कभी मुझसे न दूर जाना तुम
न कभी आँख यूँ चुराना तुम
तेरे जाने से प्राण मेरे तो
लगता है जिस्म से निकलते हैं

न कभी मुझसे तुम खफा होना
रूठ जाऊँ तो तुम मना लेना
तेरे होने से सारी रौनक है
दिल में यादों के दीप जलते हैं
@मीना गुलियानी 

बुधवार, 5 सितंबर 2018

इतरा रही थी

सूर्योदय के समय गगन की लाली
मन को आल्हादित कर रही थी
सूरजमुखी फूलों की आभा निखर रही थी
उषा नागरी भी अंबर पनघट में से
अपनी मटकी को भरने आई हुई थी
चन्द्रमा ने सितारों के साथ विदाई ली
सूरज की रश्मियाँ ज्योत्स्ना लुटा रही थीं
हरे पत्तों पर ओस की बूँदे चमक रहीं थीं
शीतल सुगंधित बयार मन लुभा रही थी
पक्षियों का कलरव सौंदर्य बढ़ा रहा था
उनकी कतार गगन की ओर जा रही थी
लोग हरी घास पर योगाभ्यास कर रहे थे
गाय के रम्भाने की आवाज़ आ रही थी
मुर्गे भी बांग देकर सबको जगा रहे थे
मंदिर में शंखनाद घण्टाध्वनि हो रही थी
बच्चे पेड़ों से अमरुद आंवले तोड़ रहे थे
किसान खेतों में ट्रैक्टर चला रहे थे
गाँव की पनिहारिनें गीत गा रही थीं
कुछ बच्चे खो खो कबड्डी खेल रहे थे
महिलाएँ आँगन में रंगोली बना रही थीं
धरा  स्वर्णिम आभा पर इतरा रही थी
@मीना गुलियानी


मंगलवार, 4 सितंबर 2018

जलाया जा नहीं सकता

सुनाऊँ क्या मैं ग़म अपना
तुझे बतला नहीं सकता
जो मेरे दिल की बातें हैं
तुझे समझा नहीं सकता

तुझे पाकर के खो देना
ये किस्मत की थी मजबूरी
मिलकर भी मिल नहीं पाए
गम भुलाया जा नहीं सकता

न जाने कैसा दौर आया
जिसने सितम है ये ढाया
जिग़र के हो गए टुकड़े
तुझे बतला नहीं सकता

गुलिस्तां ऐसा अब उजड़ा
बसाना जिसको मुश्किल है
वो शमा कैसे करूँ मैं रोशन
जिसे जलाया जा नहीं सकता
@मीना गुलियानी 

सोमवार, 3 सितंबर 2018

मनवा मोरा हर्षाये

मतवारे तेरे नैन
लूटें मन का चैन
सितारे ये चमकें
बिजुरिया भी दमके
काले काले मेघा छाये
बारिश की बूँदे लाये
कोयलिया कूक मचाये
जियरा हुलसा जाए
मन मयूरा झूमे गाये
दिल पागल हुआ जाए
शीतल बयार मस्त बनाये
मन व्याकुल कर जाए
मलयानिल की पवन आए
पिया का संदेशा लाये
मनवा मोरा हर्षाये
@मीना गुलियानी 

रविवार, 2 सितंबर 2018

पछताओगे वरना

उन विशाल अट्टालिकाओं के पीछे से
कोई एकटक उसे निहार रहा था
एक विद्रूप सी स्मित रेखा थी उसके चेहरे पर
जो छल ,प्रपंच रच रही प्रतीत होती थी
वो भोली भाली ग्रामीण कन्या अपनी धुन में
इठलाते हुए  मंथरगति से चली जा रही थी
अचानक ही पीछे से उसने कन्या के कंधे पर
झपट्टा सा मारा तो उस कन्या ने पलटकर देखा
यकायक ही वो कन्या सकपका गई ,सहम गई
फिर भी उसने हिम्मत न हारी, वो पलटी
बिजली सी फुर्ती दिखाई ,सामने पड़े बांस को उठाया
पलटवार उस पर किया वो लड़खड़ाया और गिरा
वो ग्रामीण बाला अब साक्षात् चण्डी के रूप में थी
बांस त्रिशूल जैसा प्रतीत हो रहा था उसे घुमाने लगी
सीधा उसकी छाती पर तान दिया हुँकारने लगी
वो उसका चण्डी रूप देखकर डर गया
जल्दी से ही घबराकर उसके पाँव पड़ गया
अब वो लगा गिड़गिड़ाने लगा क्षमा मांगने
उस कन्या ने बोला फिर कभी ऐसा न करना
जान भी न बचा पाओगे पछताओगे वरना
@मीना गुलियानी 

शनिवार, 1 सितंबर 2018

इस बारिश में

स्वप्न हुए सिन्दूरी अपने
इस मतवाली बारिश में
टिपटिप बरसा है पानी
छत पे रात भर बारिश में

बच्चों ने फिर नाव बनाई
पोखर तलैया में चलाई
पकौड़े और जलेबी खाई
इस मदमाती बारिश में

भीगी है धरती की चूनर
इस रुपहली बारिश में
मौसम फिर गुलज़ार हुआ
रिमझिम सी इस बारिश में
@मीना गुलियानी