यह ब्लॉग खोजें

मंगलवार, 26 जनवरी 2016

उदास न हो



मेरे हमनशीं , मेरे हमसफ़र
उदास न हो
कठिन सही तेरी जिंदगी का सफर
मगर उदास न हो

हज़ार मुश्किलें आयेंगी तेरी राहों में
है भरोसा तू हौसले से हटा देगा उन्हें
मुझे पायेगा अपने साथ तू  ख्यालों में
जो न हो यकीं वफ़ा पर तो आजमाना मुझे
मगर उदास न हो

सहर के बाद धूप भी तो निखरेगी
तेरे जज्बातों की माला भी तो बिखरेगी
उड़ायेगी उसकी सुगन्धि पवन फूलों से
छंट जायेगी तेरी दुःख  बदली
मगर उदास न हो

जानती हूँ तेरा लक्ष्य बहुत ऊँचा है
तेरे प्यार के चमन को वफ़ा से सींचा है
जो हो जाए तू कुर्बान वतन की राहों में
हज़ार सजदे करूंगी मै तेरी राहों में
मगर उदास न हो



कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें