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शनिवार, 23 जनवरी 2016

न इतना सताओ


न मुझे इतना सताओ ज़माने वालो
कि खो दूँ होश मै अपने सताने वालो

                तुम्हें क्या खबर कि न उनसे मिलने से
                कहर  की रात  कल मेरे साथ गुजरी है
                तमाम खुशियों का गला घोंटकर जिऊँ कैसे
               तुम्हीं बताओ मुझे मुझ पे कहर ढाने वालो

उजड़ जाएगा मेरे प्यार का मुस्कुराता जहाँ
जो ये मालूम होता तो न बनाता मै आशियाँ
तिनका तिनका बिखर गया मिल गया धूल में
न जुल्म इतना ढाओ मुझे जिन्दा जलाने वालो

                  धरती आसमा सब जल रहे है मेरी आहों से
                  कर ली है सबने तोबा डरकर मेरी पनाहों से
                   पर नोच डाले है बेदर्द बनके तुमने परवाज़ के
                  न समझना रूह बख्शेगी मेरी कहर बरसाने वालो

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