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शनिवार, 7 सितंबर 2019

कर्ज़ है

ज़िन्दगी और मौत के दरम्यां
फ़ासला ज़रा सा ही तो था
अगर तुम वक्त पर नहीं आते
तो हम कबके मर गए होते
तुमने ही समय पर आकर
डॉक्टर को बुलाया जान बचाई
मेरी ज़िन्दगी पर ये कर्ज़ है
@मीना गुलियानी 

शुक्रवार, 6 सितंबर 2019

गुलज़ार ज़िन्दगी

धुंध में लिपटी हुई है ये ज़िन्दगी
  चार पल की मेहमान ज़िन्दगी
जब ये ना उम्मीदी छंट जायेगी
कोहरे की दीवार भी तब हट जायेगी
तमाम संगीन वारदातों से गुज़रके
होने जा रही है अब गुलज़ार ज़िन्दगी
@मीना गुलियानी 

क्यों इतराते हो

सब कहते हैं कि घमण्डी का सर नीचे होता है
 तुम जाने किस बात का अहंकार करते हो
न तो तुम कभी मेरे बुलाने पे ही आते हो
और न ही मेरे मनाने पे ही शक्ल दिखाते हो
पता नहीं मुझे हर समय तुम क्यों इतराते हो
@मीना गुलियानी 

झूझते रहो

ज़िन्दगी का तकाज़ा है कि चलते रहो
तुम भी कर्त्तव्यपथ पर अडिग रहो
कभी न तुम्हारा हौंसला टूटे डटे रहो
जीवन को संग्राम समझ झूझते रहो
@मीना गुलियानी 

हुनर सिखाया है

आपने अपनी औकात में रहना सिखाया है
आपने ही हमें जीने के काबिल बनाया है
आपने ही मुस्कुराते हुए जीना सिखाया है
आपने जीने का मकसद, हुनर सिखाया है
@मीना गुलियानी 

बुधवार, 4 सितंबर 2019

मुँह काला है

व्यर्थ का दिखावा क्यों करते हो
सच्चाई से तुम क्यों डरते हो
हर तरफ सच का ही बोलबाला है
झूठे का तो हमेशा मुँह काला है
 @मीना गुलियानी

मुँह लटकाए बैठा है

क्यों तू मुँह छिपाए बैठा है
ऐसा कौन सा गुनाह हुआ
क्या किसी को धोखा दिया
फिर क्यों नज़रें चुराए बैठा है
चिलमन उठा पर्दे से निकल
राज़े दिल खोल हँसके बोल
ग़म ज़ाहिर कर न तू डर
क्यों मुँह लटकाए बैठा है
@मीना गुलियानी 

तू बदल

अंधेरों से तू अब निकल
रौशनी के साथ तू चल
खुलके हवा में साँस ले
 सुख दुःख को बाँट ले
मुस्कराके जीना सीख
वक्त से साथ तू बदल
@मीना गुलियानी

मंगलवार, 3 सितंबर 2019

तू निराशा है

ज़िन्दगी तेरा ये क्या तमाशा है
पल में तोला है पल में माशा है
इक पल  तुझसे बँधती आशा है
दूजे ही पल बनती तू निराशा है
@मीना गुलियानी 

सोमवार, 2 सितंबर 2019

इतिहास नया

चलो उठें अपने गाँव  चलेँ
वतन की मिट्टी पुकारे हमें
 इस शहर से मन भर गया
वहीँ लिखेंगे इतिहास नया
@मीना गुलियानी 

रविवार, 1 सितंबर 2019

ख़ुमार इन दिनों

मौसम बड़ा है खुशगवार इन दिनों
हर तरफ छाई बहार है इन दिनों
कलियों पर आया निखार इन दिनों
छाने लगा दिल पे ख़ुमार इन दिनों
@मीना गुलियानी 

शनिवार, 31 अगस्त 2019

घर महकाओ

फूलों की हिफाज़त करो
उन्हें बड़े प्यार से सहेजो
सुंदर गुलदानों में सजाओ
उनसे फिर  घर महकाओ
@मीना गुलियानी 

उसमें दीप जलाया

मैंने लफ़्ज़ को आग बनाया
उसमें मैंने रूह को तपाया
जब वो कुंदन बन निखरी
प्रेम का उसमें दीप जलाया
@मीना गुलियानी 

गुरुवार, 29 अगस्त 2019

कहीं जाना नहीं

अक्सर जैसा सोचते हैं वैसा होता नहीं
वक्त कभी भी एक सा रहता ही नहीं
बदलेगा यह मौसम भी ज़रूर फ़िक्र नहीं
तू मेरे पास ही रहना दूर कहीं जाना नहीं
@मीना गुलियानी 

बुधवार, 28 अगस्त 2019

सबका सही फ़ैसला है

भूल जा बीती बातों को जो हुआ सो हुआ
अब सोचने से क्या होगा जो हुआ सो हुआ
सब मर्जी है ऊपरवाले की जो खुद ही
सबका हिसाब करे वो कर्त्ता धर्ता  है
हर कर्म तोले वो तराजू में न नफ़ा 
न कम वो तोलता है उसके आगे न
चले किसी की न वो झूठ बोलता है
जिंदगी का सदियों से सिलसिला है
सुनाये वो भी सबका सही फ़ैसला है
@मीना गुलियानी 

अटूट बने

कितने सौभाग्य से जीवन में
मेरे योरकोट है आया
सुबह शाम हर पल ही
ध्यान में कोलेब है छाया
समय गुज़र जाता है मेरा
पता नहीं कब होवे अँधेरा
इतना मुझको ये भाता है
मन इसमें ही रम जाता है
योरकोट और मैं दोनों ही
एक दूजे के पूरक जैसे हैं
दिन प्रतिदिन समृद्ध बने
रिश्ता इससे अटूट बने
@मीना गुलियानी

निकले मेरा दम

तुम्हारी धुन  में हम यूँ चलते गए
जाने कितने पड़ाव तय करते गए
क्या तुमको भी है इसकी ख़बर
चलेंगे जब तक सांस है उम्र भर
तेरा ही साया बनके चले हरदम
अब तो यही तमन्ना है दिल की
तेरे ही साये में निकले मेरा  दम
@मीना गुलियानी

मंगलवार, 27 अगस्त 2019

वतन में पराया हुआ

जहाँ कहीं भी देखो सभी गुमसुम हैं
न जाने सबको किस बात की धुन है
हर तरफ यहाँ तन्हाई का आलम है
ऊपर से देखने पर हैं जज़्बाती
भीतर से वो सब हैं प्रतिघाती
सब चेहरे पर नकाब ओढ़े हुए
भीतर उनके ज़मीर हैं सोये हुए
हर तरफ सन्नाटा सा पसरा हुआ
आदमी आज शैतान सा बना हुआ
हिंसा का साम्राज्य सा छाया हुआ
शरीफ आदमी फिरे ख़ौफ़ खाया हुआ
उसके चेहरे का रंग है उड़ा हुआ
वो खुद के वतन में पराया हुआ
@मीना गुलियानी 

सोमवार, 26 अगस्त 2019

चैम्पियन बनता है

जो धीर हो, गम्भीर हो
संयमी हो एवं लक्ष्य की
प्राप्ति हेतु प्रयत्नशील हो
आत्मविश्वास परिपूर्ण हो
जिज्ञासु हो कर्मशील हो
परिश्रमी हो मर्यादित हो
वक्त का उसे एहसास हो
वही चैम्पियन बनता है
@मीना गुलियानी 

अभी पहचाना नहीं

दुःख तो सिर्फ  इस बात का है
तुमने कभी मुझे समझा नहीं
मेरे दिल के जख्मों को कभी
तुमने प्यार से सहलाया नहीं
दिल क्यों ज़ार ज़ार रोता है
ये तुमने कभी पूछा ही नहीं
मेरे जज़्बातों को भी तुमने
जानने की कोशिश नहीं की
तुमने मुझे अभी पहचाना नहीं
@मीना गुलियानी 

दूर ले चलो

यह कैसा शहर है जहाँ पर
सिर्फ मकानों के जंगल हैं
हरियाली ,नदिया ,झरनों
इन सबसे दूर चट्टानों में
एकान्त में कोई आस पास
सन्नाटे के अतिरिक्त नहीं है
रात होते ही तेज़ हवा की सांय
मेरी धड़कनों को बढ़ा देती है
मुझे तो अपना गाँव पसंद है
जहाँ हम खेलकर बड़े हुए
इस जंगल से दूर ले चलो
@मीना गुलियानी 

रविवार, 18 अगस्त 2019

व्यवधान ज़रूरी है

रोज़ घर का काम ज़रूरी है
एक दिन आराम ज़रूरी है
दिन कट जाता है बातों में
बातों में व्यवधान ज़रूरी है
@मीना गुलियानी 

शनिवार, 17 अगस्त 2019

न हमको है ग़वारा

तुमको इससे क्या फर्क पड़ता है
तुम्हारी बला से कोई जिए मरे
क्या रिश्ता रह गया अब हमारा
पर ये सब न हमको है ग़वारा
@मीना गुलियानी 

नादान बहुत हैं

एक तुम ही तो थे जिसने मुझे सम्भाला
जीवन की हर आफत से बाहर निकाला
 जिन्दगी पर तुम्हारे ऐहसान बहुत हैं
कुछ हम भी अभी तक  नादान बहुत हैं
@मीना गुलियानी

सह नहीं सकता

ज़मीं से रिश्ता कभी टूट नहीं सकता
आसमां से भी मैं दूर रह नहीं सकता
दोनों के दरम्यां हैं फ़ासले भी बहुत
जिसको ये दिल अब सह नहीं सकता
@मीना गुलियानी 

गुरुवार, 15 अगस्त 2019

नौजवानों जागो

कहाँ है अब वो मेरा भारत
कहते थे जिसे हम सोन चिरैया
अब वीणा की तारें भी टूटीं
कैसे होगा ता ता थैया
भारत के नौजवानों जागो
देश को खुशहाल बनाओ तुम
@मीना गुलियानी 

यूँ सताने की

मिन्नतें खुशामद गवारा न तुझे
मनाऊँ कैसे तू ही बता दे मुझे
बिना मनाए लौटके न जाने की

ख़ता नहीं हे फिर भी मुझे माफ़ करो
मुस्कुरा के अपने दिल को साफ़ करो
मान जाओ न करो बात यूँ सताने की
@मीना गुलियानी 

सोमवार, 12 अगस्त 2019

दिल से पूछिए

इक सवाल मैं करूँ
इक सवाल तुम करो
हर सवाल का जवाब
अपने दिल से पूछिए
@मीना गुलियानी 

शुक्रवार, 9 अगस्त 2019

तूफ़ान उठाती है

हो जाता है कभी कभी जब बारिश आती है
बिजली भी कौंध कौंध कर डरा जाती है
बरसों के भूले बिसरे पल याद दिलाती है
दिल में इक हलचल और तूफ़ान उठाती है
@मीना गुलियानी 

बुधवार, 7 अगस्त 2019

निखरता है

हर दिन इतिहास बदलता है
मानव मेहनत से लिखता है
कुछ पन्नों पर कुछ लकीरों में
भाग्य बनता है निखरता है
@मीना गुलियानी 

कर मेहनत इंसान

मेहनत अपना दीन धर्म है
मेहनत है ईमान
मेहनत से ही भाग्य संवरता
कर मेहनत इंसान
@मीना गुलियानी 

नारा मेहनत का

जीवन है इक बहता दरिया
डूबकर पार उतरना है
धरती से सोना उपजायें
मेहनत से किस्मत चमकाएं
खेल है यहाँ सारा मेहनत का
अपना तो है नारा मेहनत का
@मीना गुलियानी 

मंगलवार, 6 अगस्त 2019

सारा जहान है

ज़िन्दगी ज़िन्दादिली  का नाम है
है नहीं ऐसी तो फिर नाकाम है
जिसने खुद्दारी से जीना सीखा है
हँसते हँसते जीना मरना सीखा है
ठोकरों पे उसकी सारा जहान है
@मीना गुलियानी


विनम्र श्रद्धांजलि

श्रीमती सुषमा स्वराज जी के निधन का समाचार
सुनकर स्तब्ध हूँ ! सुषमा जी अपने राष्ट्र उत्थान
के कार्यों से सबके हृदय में सदैव जीवित रहेंगी !
विनम्र श्रद्धांजलि - ॐ शान्ति शान्ति शान्ति
@मीना गुलियानी 

तुम मुस्कुराके

क्या मिलेगा तुम्हें बार बार मुझको सताके
कभी तो बात  करो मुझसे नज़रें मिलाके
न यूँ ही दूर बैठो मुझसे तुम नाराज़ होके
किया करो मन की बातेँ तुम मुस्कुराके
@मीना गुलियानी 

योग पथ पर ले जाता है

सूरज हमें जीने का सही तरीका समझाता है
शुभ ज्योति के पुंज अपना आलोक फैलाता है
सर्व व्याधि नाशक पुष्टि का ज्ञान कराता है
शुद्ध आत्मा करके योग पथ पर ले जाता है
@मीना गुलियानी 

सोमवार, 5 अगस्त 2019

जी न पायेँगे

सच तुम सुन न सकोगे
झूठ   हम कह न पायेंगे
अच्छा होगा ये अफ़साने
यहीं पर दफन हो जाएँ
वरना हम जी न पायेँगे
@मीना गुलियानी 

शुक्रवार, 2 अगस्त 2019

बहुत याद आते हो

इस मतलबी दुनिया की तंगदिली
दुनिया के फरेब और कड़वे शब्द
जब मेरे मन को ठेस पहुँचाते हैं
तब तुम मुझे बहुत याद आते हो
@मीना गुलियानी 

सुलाती है

शाम होते ही तेरी याद
मुझ तक चली आती है
दिल में हलचल मचाती है
नई पुरानी यादें दोहराती है
जब मैं थक जाता हूँ तब
अपनी आगोश में सुलाती है
@मीना गुलियानी 

सोमवार, 15 जुलाई 2019

होती रहती हैं सरगोशियाँ

वीरान सी सुबह देती है दस्तक
दर्द के गुल छाई ग़म की बदलियाँ
तुम मिले देर से दिल में हैं उदासियाँ
अजीब सी होती रहती हैं सरगोशियाँ
@मीना गुलियानी

काम आयेगा

कोई न कोई हुनर तो सीख लो
बेसबब न तुमसे जिया जाएगा
कल गर मुश्किल से हुआ सामना
ये हुनर फिर तेरे ही काम आयेगा
@मीना गुलियानी

कैमरे में कैद करूँ

यही सोचती हूँ कुछ वक्त मिल जाए
खूबसूरत लम्हों को कैमरे में कैद करूँ
@मीना गुलियानी 

मोड़ पे ले जाए

हर कदम सोचकर हम बढ़ा रहे हैं
मंजिल पे कदम कहीं न डगमगाएँ
वक्त की हलचल बनी हुई है
जाने कब किस मोड़ पे ले जाए
@मीना गुलियानी 

शनिवार, 6 जुलाई 2019

प्रतिदान में दे देती है

सदियों से हमेशा पुरुष
स्त्री को छलता आया है
प्राचीन कवियों ने नारी को
छलनामयी माना है जबकि
स्थिति बिलकुल विपरीत है
नारी तो स्वभाव से ही कोमल
दयावान, भोली भाली होती है
वो निष्कपट रूप से सहज ही
पुरुष पर विश्वास करके
अपना सर्वस्व उसके प्रेम
के प्रतिदान में दे देती है
@मीना गुलियानी 

शुक्रवार, 5 जुलाई 2019

सुकूँ न मिल पायेगा

पास से वो गुज़र गए
हम तो वहीं ठहऱ गए
पेड़ों से पत्ते झड़ गए
सब फूल भी बिखर गए
पल भर जो रुकते वो पास
न होता मन हमारा उदास
क्यों चेहरे पे है बेचारगी
ऐसी भी क्या है नाराज़गी
ये गुलशन अगर मुरझायेगा
तुमको सुकूँ न मिल पायेगा
@मीना गुलियानी 

हमें रुलाओ मत

देखो बात बढ़ाओ मत
इतना हमें सताओ मत
सीने में मेरे है दर्द भरा
जख्मों को जगाओ मत
मान भी जाओ कहना मेरा
इतना हमें रुलाओ मत
@मीना गुलियानी 

गुरुवार, 4 जुलाई 2019

साहिल बना दिया

आसान नहीं था आकाश अपना तलाशना
आसान नहीं था मन का रास्ता नापना
क्योंकि हर नज़र प्रश्न पूछ रही थी
उस पर मेरी ख़ामोशी ज़ुबान बन गई
मेरी हसरतो ने मुझे बेज़ार कर दिया
मँझधार को ही अपना साहिल बना दिया
@मीना गुलियानी 

आगे बढ़ना ही होगा

तुमको उगते सूरज की जैसे
आगे बढ़ना ही होगा
चाहे दिल तुम्हारा टूटे
चाहे तुमसे कोई रूठे
सब कुछ तुम्हें भुलाकर
वर्तमान में जीना होगा
  जड़ता को चैतन्य में
परिवर्तित करना होगा
@मीना गुलियानी





मुस्कान में है जादूगरी

दिल तो तेरी मुस्कान पर मिट गया
कैसे सम्भालूँ गया मेरा जिया
कहाँ इसे ढूँढूँ फिरूँ नगरी नगरी
तेरी मुस्कान में है जादूगरी
@मीना गुलियानी 

शुक्रवार, 28 जून 2019

हालात बदल जायेंगे

ग़म तेरे आने से मुस्कुराहट में बदल जायेंगे
हम इस पे कायम हैं कि हालात बदल जायेंगे
@मीना गुलियानी 

हर हाल में खुश हैं

गर तूने ओढ़ाया तो लिया ओढ़ दुशाला
कंबल जो दिया तूने उसे कंधे पे संभाला
दिन रात घड़ी पहर हर हाल में खुश हैं
@मीना गुलियानी 

पहन हार

आई रजनी करने विहार
आई रजनी आँचल पसार
तारक रत्नों से सजकर
शशि किरणों का पहन हार
@मीना गुलियानी 

रहबर मिल जाए

चाहत की अँधेरी गलियों में
चलने की तमन्ना क्यों छोड़ें
आगाज़ से भटके आलम में
मुमकिन है कि रहबर मिल जाए
@मीना गुलियानी 

बुधवार, 26 जून 2019

बेबाक हुई जाती है

दिल को जाने क्यों तुझे देखने का शौक हुआ
जाने क्यों फिर मेरा आँचल इन हवाओँ ने छुआ
अब तो ये घटाएँ भी बिजलियाँ गिराती हैं

सीने में अरमां ये है कि बुला लूँ तुमको
और पलकों में बंद करके छुपा लूँ तुमको
जाने क्यों तमन्ना मेरी बेबाक हुई जाती है
@मीना गुलियानी 

शुक्रवार, 21 जून 2019

बढ़ी जा रही है

नदिया की कल कल ध्वनि आ रही है
एक मधुर संगीत की लय भा रही है
बहते झरने धरा से कुछ कह रहे हैं
चंद्रकिरणें पत्तों से छनकर आ रही है

बादल भी उमड़ घुमड़कर छाने लगे हैं
गगन के तारे भी चमक दिखाने लगे हैं
धीमे से पुरवइया कुछ गुनगुना रही है
सुनके धरा भी जिसे सकुचा रही है

मंन का मयूरा देखो कैसे इतरा  रहा है
पपीहा भी पीहू पीहू की रट लगा रहा है
मधुर मिलन की नैनो में प्यास लिए
धरती गगन की ओर बढ़ी जा रही है
@मीना गुलियानी 

बुधवार, 22 मई 2019

चौपाई


रिमझिम  के गीत सावन गाए      -      16   मात्राएँ

गाए  भीगी भीगी  रात में             -       16   मात्राएँ

होंठों पे बात दिल की आए            -        16   मात्राएँ

आए भीगी भीगी रात में               -        16   मात्राएँ

@मीना गुलियानी 

सब बिखरा होता

सारा दोष हमारा ही था
न तुम्हें दिल में बसाया होता
न ही पलकों में छिपाया होता
न ख़्वाबों में ही बुलाया होता
न सपनों का महल बनाया होता
न काँच सा वो सब बिखरा होता
@मीना गुलियानी 

मंगलवार, 21 मई 2019

चौपाई

सुन जननि सोइ सुत बड़ भागी  -   16   मात्राएँ
जो पितु मातु वचन अनुरागी     -    16   मात्राएँ
तनय मातु पितु तोषनहारा        -   16   मात्राएँ
दुर्लभ जननि सकल संसारा       -    16   मात्राएँ
@मीना गुलियानी




आगे कदम बढ़ाना

जीवन है सुख दुःख का खेला
तू है इस मेले में अकेला
धूप छाया जीवन का गहना
गुणीजनों का है ये कहना
पर तू इससे मत घबराना
राही तू आगे कदम बढ़ाना
@मीना गुलियानी 

सोमवार, 20 मई 2019

सदा ही खुश रहती मुझसे

फिर आई पूनम की रात
लेके सितारों की बारात
हमें तुम्हारा मिला है साथ
पिया न छोड़ना मेरा हाथ
रात है ये इक बनी पहेली
मेरी पर वो पक्की सहेली
झूठ नहीं कहती वो मुझसे
सदा ही खुश रहती मुझसे
@मीना गुलियानी 

मंगलवार, 14 मई 2019

छेड़ जाती है अब भी

मिट्टी के घर याद आते हैं 
प्यार हमेशा बरसता जहाँ था
खुशियों भरा सारा आलम जवां था
ग़म का जहाँ न नामोंनिशां था
नफरत की कभी न थी दीवारें
हर तरफ प्रेम ही पसरा वहाँ था
मिट्टी की सौंधी खुशबु आती है अब भी
दिल के मेरे तार छेड़ जाती है अब भी
@मीना गुलियानी 

मेरी क्या हस्ती है

दिल हर पल तुझे ही याद करता है
हर पल तेरा शुक्रिया अदा करता है

तुझसे ही सब कुछ पाया है मैंने
क्या मेरी औकात कहाँ पहुँचाया तूने

मेरे दिल के तार तेरा ही नाम गाते हैं
पाया तुझसे सब कुछ भूल न पाते हैं

तेरी रहमतों से रोटी आँखें हँसती हैं
कैसे बिसरा दूँ तुम्हें मेरी क्या हस्ती है
@मीना गुलियानी 

जन्म मिले न बारम्बार

आया है होली का त्यौहार
रंगों की लेके आया फुहार

मैंने अपना हे तुमको बनाया
रंगो अपने रंग में छूटे अहंकार

जो सुख दुःख में सम रहता
उसके ही मन में आए बहार

जब ये चित्त शान्त हो जाए
मनवा तब भूले सब संसार

आओ मिलकर सब रंग लगायें
मानुष जन्म मिले न बारम्बार
@मीना गुलियानी 

विकट हालत तुम बिन

कटता ही नहीं इक पल भी तुम बिन
काटूँ मैं कैसे ये ज़िन्दगी तुम बिन

तुमको भी अचानक यूँ ही जाना था
सोचा न तुमने कैसे जियेंगे तुम बिन

न तन्हा छोड़ा होता न नाता तोड़ा होता
 थामते हाथ मेरा तो कट जाते पल छिन

बहुत दुर्गम है पथ बिछे हैं हर तरफ़ काँटे
बचाऊँ कैसे दामन विकट हालत तुम बिन
@मीना गुलियानी 

मंगलवार, 7 मई 2019

मुझे हैरान करती हैं

जीवन की यह दौड़धूप परेशान करती है
कभी कभी तो यह बहुत हैरान करती है

थक जाता हूँ मैं दस कदम भी चलके
सफ़ऱ में तन्हाई भी परेशान करती है

साथी हो कोई तो मुश्किल आसां हो जाए
तमाम उलझने दिल को पशेमान करती हैं

कभी तो ऐसा हो कट जाए सुकूँ से रहगुज़र
ये स्याह बयाबान राहें मुझे हैरान करती हैं
@मीना गुलियानी 

झुकाने और कहाँ जाते

न मिलते तुम तो दिल को बहलाने कहाँ जाते
ये दुनिया सारी मतलब की बतलाने कहाँ जाते

तुम्हीं अपने हो जिसने मेरा दर्द तो समझा
कटा कैसे सफर तन्हा मेरे ग़म को समझा
नहीं तो तेरी महफ़िल में ये दीवाने कहाँ जाते

जहाँ को मार दी ठोकर तभी तुमको है पाया
तुम्हीं को मानते अपना तू ही मेरा हमसाया
तेरी ही जुस्तजू दिल को समझाने कहाँ जाते

तेरी उल्फत में दर दर ख़ाक छानी थी  हमने
तुझे पाकर जहाँ की सारी दौलत लूट ली हमने
ये दिल मेरा है सज़दे में झुकाने और कहाँ जाते
@मीना गुलियानी


सोमवार, 8 अप्रैल 2019

आएगा मुझे चैन

कई  दिनों  से
मन था परेशान
हुआ  मैं  हैरान
सोचा किससे कहूँ
क्यों  चुप  रहूँ
मन में उलझन
नादां है बचपन
खोए  खोए  हम
कब होगा सवेरा
कब मिटेगा अँधेरा
आएगा मुझे चैन
@मीना गुलियानी 

सोमवार, 1 अप्रैल 2019

दामन हमीं छुड़ा बैठे

तुमसे जब दिल हम लगा बैठे
सबको दुश्मन अपना बना बैठे

हर तरफ नफरतों के हैं शोले
जिनको हम कबसे हैं बुझा बैठे

तुझको पाने की एक हसरत में
खुद का हम चैन भी गंवा बैठे

इससे पहले कि बेवफा वो बने
उससे दामन हमीं छुड़ा बैठे
@मीना गुलियानी

गुरुवार, 28 मार्च 2019

प्रेम बन्धन है

कहते हैं मन तो आईना है
यह हमेशा सच बोलता है
हँसी ग़म के भेद खोलता है
क्यों उदास हैं क्यों मन टूटता है
आज आँगन में नेह के बादल
बिन बरसे ही गुज़र गए
फूल भी खिलने को तरस गए
सूरज की किरणें भी आज
बदली में कैद हो गईं
हर आँख का इक सपना है
रिश्तों की प्रेम डोर न टूटे
यही तो प्रेम बन्धन है
@मीना गुलियानी

सोमवार, 25 मार्च 2019

प्रतिफल सौ बार मिलेगा

ज़िन्दगी की राहों में
कभी टकराव तो कभी
तनाव भी मिलेगा
कभी संबंध अच्छे बनेंगे
कहीं प्रेम का अभाव मिलेगा
कभी रिश्तों में अपनापन
कहीं टकराव खिंचाव मिलेगा
मत करना बुरा किसी का
तुझे भी अच्छा व्यवहार मिलेगा
हर कर्म का बीज जो बोया
उसका प्रतिफल सौ बार मिलेगा
@मीना गुलियानी 

शनिवार, 23 मार्च 2019

मुस्कुराती हो गुनगुनाती हो

जब तुम अपने शानों पे
ज़ुल्फों को लहराती हो
पल्लू को हवा में यूँ
मस्ती से तुम उड़ाती हो
लगता है तुम्हारे आने से
वसन्त ऋतु भी आ गई
कलियाँ भी खिल गईं
भँवरे मंडराने लगे
नई कोंपलों से शाखें
फूलों से लद गईं
आसमान की चादर भी
तारों से भर गई
हाथोँ में गुलाल लिए
फागुन के गीत गाती हो
रोज़ सपनों में आकर तुम
मुस्कुराती हो गुनगुनाती हो
  @मीना गुलियानी

गुरुवार, 21 मार्च 2019

गोपियन के संग रास रचाएँ

आसमां खुशियाँ मनाने लगा
गगन से बूँदें बरसाने लगा
धरा की भी चूनर लहराई
काली बदरिया घिरके आई
झूमने लगी यूँ डाली डाली
गाने लगी कोयलिया काली
ठण्डी मस्त चली पुरवाई
मेघों ने बारिश बरसाई
गोरी की गगरी छलकाई
छलकते पानी से भीगा तन
जाना गोरी ने आया फागुन
हाथों में उसने लिया गुलाल
कान्हा के ऊपर दिया डाल
कान्हा ने जो मारी पिचकारी
सुध बुध उसको बिसरी सारी
धीरे धीरे कान्हा मुरली बजाएँ
गोपियन  के संग रास रचाएँ
@मीना गुलियानी 

मंगलवार, 19 मार्च 2019

आया है होली का त्यौहार

आया है होली का त्यौहार
रंगों की लेके आया फुहार

मैंने अपना है तुमको बनाया
रंगलो रंग में छूटे अंहकार

जो सुख दुःख में सम रहता
उसके ही मन में आये बहार

जब ये चित्त शान्त हो जाए
मनवा तब भूले सब संसार

आओ मिलकर सब रंग लगाएँ
मानुष जन्म मिले न बारम्बार
@मीना गुलियानी 

सोमवार, 25 फ़रवरी 2019

फिर से गुनगुनाएगा

जिंदगी के पन्ने
अभी तक संजोये
लम्हे जो थे खोये
फिसले थे जो कल
हाथों से मेरे चुपचाप
उनका एहसास अब तक
अन्तर तक सालता है
 जाने कब इस दिल को
करार आएगा कब वो
फिर से गुनगुनाएगा
@मीना गुलियानी 

मंगलवार, 5 फ़रवरी 2019

करदे तू सर्वस्व अर्पण

ओ मेरे चंचल मन
तू बावला मत बन
ले ले प्रभु की शरण
करले उनका तू भजन
 सुंदर हैं प्रभु के चरण
करले उनका तू चिन्तन
वो करेंगे हृदय तेरा पावन
करेंगे तेरे दुःख का हरण
मत रख तनिक भी भरम
करदे तू सर्वस्व अर्पण
@मीना गुलियानी

सोमवार, 4 फ़रवरी 2019

नित दर्शन की प्यासी

प्रभु जी तेरी शरण पड़ी है दासी
भव पार करो काटो यम की फांसी

मैंने कष्ट बहुत है पाया
भटक जून चौरासी
मानुष का तन पाया
मिटाओ दुखों की राशि

मैंने बहुत पाप है कीन्हा
संसारी भोगों की आशा ने
दुःख बहुत मुझे दीन्हा
ये कामना है सत्यानाशी

प्रभु जी मैंने भक्ति नहीं कीन्ही
झूठे भोगों की तृष्णा में
उम्र सारी खो दीन्हीं
दुःख मेरे मेटो अविनाशी

प्रभु जी अब सारी आशा टूटी
तेरे चरणों की धूलि लागे
 मुझे एक संजीवनी बूटी
रहूँ नित दर्शन की प्यासी
@मीना गुलियानी

रविवार, 3 फ़रवरी 2019

अपना काम कर दिया

अपने खूने  ज़िगर की स्याही
में कलम डुबोकर हमने
भेजकर इक ख़त को हमने
चर्चा वफ़ा का सरेआम कर दिया

सोचा था घुट घुटके मरेँगे
लब सी लेंगे उफ़ न करेंगे
प्यार के रिश्ते को सबने
पर बदनाम कर दिया

तोड़के हर ज़ुल्मों की जंजीरे
क्या रोकेंगीं ये शमशीरें
ठान लिया जब डरना कैसा
हमने अपना काम कर दिया
@मीना गुलियानी 

आँख मलते मलते

आ गई फिर तेरी याद शाम ढलते ढलते
बुझने लगे दिल के चिराग़ जलते जलते

जाने कैसे ग़म घर में फिर घुसने लगे
तेज़ हवाओं के झोंकों के चलते चलते

तुझको बरसों से देखा नहीं इस तरफ मैंने
परछाईं मिटने लगी अश्कों के ढलते ढलते

जिंदगी के साज़ ने फिर से एक सुर सजाया
कसक जगी ख़्वाब मिटे आँख मलते मलते
@मीना गुलियानी 

शुक्रवार, 1 फ़रवरी 2019

दिल की यही दुआ है

मेरे दिल ने तुझे अब दी है सदा
सुन मेरी सदा मत देर लगा
तुम सुनके सदा मेरी आ जाओ

मेरी नैया की पतवार अब तेरे हाथ मेँ है
जीवन की धूप छाँव अब तेरे हाथ में है
मेरी सांसो का भी तार अब तेरे हाथ में है

देखो ये कायनात तेरा नाम ले रही है
सूरज की किरण भी तेरे मुख को छू रही है
सारे जग को ये ख़ुशी का पैगाम दे रही है

जबसे तुझे पाया तू बना मेरा खुदा है
थाम हाथ तू मेरा यही तुझसे इल्तज़ा है
कभी छोड़ना न मुझको दिल की यही दुआ है
@मीना गुलियानी

गुरुवार, 31 जनवरी 2019

बिताऊँ जानती नहीं

जाने क्या बात है जो तेरी याद
दिल से मेरे कभी जाती ही नहीं
सोचती लाख हूँ पर लब पे मेरे
हंसी कभी तेरे बिना आती नहीं

जिंदगी के हर पल तेरी याद में
जैसे तैसे यूँ  गुज़र ही जायेंगे
हम अपने ख्यालों में खो जायेंगे
क्या करें नींद कमबख्त आती नहीं

तुम इतना दूर मुझसे जाया न करो
जाओ फिर जल्दी लौट आया करो
मुश्किल होता है अकेले सफर करना
जिंदगी कैसे बिताऊँ जानती नहीं
@मीना गुलियानी

मंगलवार, 29 जनवरी 2019

कृपा से उसकी माल खज़ाना

बहुत ही मुश्किल होता है अवसाद से उभर पाना
कठिन होता है बिताए हुए लम्हों को भूल पाना

ये  जिंदगी हर पल सबका कड़ा इम्तेहान लेती है
आसान होता नहीं सबके लिए उसे पास कर पाना

फिर भी कुछ तकदीर और तदबीर  वाले होते हैं
जिन्हें मुमकिन हो जाता है सब कुछ कर पाना

रखते हैं वो हौंसला और पूरा विश्वास उस पर
पा जाते हैं वो सब कृपा से उसकी माल खज़ाना
@मीना गुलियानी 

सोमवार, 28 जनवरी 2019

मुरझाया चेहरा खिल जाएगा

कभी रोने का मन हो तो
अकेले में ही बैठकर रोना
वरना तुम्हारे रोने का भी
सब मज़ाक ही तो उड़ायेंगे
कौन है तुम्हारी सुनने वाला
सब चार बातें ही बनायेंगे
सबको हँसने वाले चेहरे भाते हैं
रोने वालों की खिल्ली उड़ाते हैं
कोई मजबूरियों को न जाने
उसके आँसुओं की कीमत न जाने
सिर्फ उसके रोने पे मुस्कुरायेंगे
सबकी सुनने वाला सुनेगा कभी
तू अपना दुखड़ा उसे सुना तो सही
क्या मिलेगा जो रोया सबके आगे
रोना है तो रो उसके ही आगे
वो ममता अपनी तुझपे लुटायेगा
तेरा मुरझाया चेहरा खिल जाएगा
@मीना गुलियानी 

रविवार, 27 जनवरी 2019

सुंदर स्वप्न मैंने देखा

आज मन के तराजू पर
अपनी आस्था को परखा
मन कुछ डांवाडोल रहा
चेतना ने उसका साहस बढ़ाया
वो फिर से कुछ दृढ़ हुआ
जिंदगी में दुःख सुख आते हैं
उनसे घबराना कैसा सामना करो
विधाता की ही दोनों रचना हैं
उनको समभाव से देखो और
उनका सम्मान करो
निर्विकार निर्विकल्प रहकर
मन का मंथन किया
हृदय कल्पद्रुम सा खिल उठा
भावना के ज्वार उठने लगे
मन में वीणा के तार बजे
 सप्तसुर जगने लगे
कोयल कूकने लगी
 मोर नाचने लगा पपीहा गाने लगा
ऐसा लगा मन में इंद्रधनुष खिल उठा
गगन धरा का मिलन हुआ
इड़ा पिंगला सुषुम्ना का तारतम्य हुआ
प्रेमवश अश्रुधारा बहने लगी
हृदय भावविभोर हो उठा
हृदय पटल पर साक्षात हरि जी
सुदर्शनचक्र लेकर विराजमान थे
नभ से फूलों की वर्षा हो रही थी
तभी घड़ी का अलार्म बजा
तो पता चला कितना सुंदर स्वप्न मैंने देखा
@मीना गुलियानी


शनिवार, 26 जनवरी 2019

दोनों हाथ पसारे हैं

तेरी दुनिया में मैंने सुख दुःख देखे सारे हैं
उसने ही जाना तुझे जो तेरे ही सहारे है

सुख दुख दुनिया की गाड़ी को चलाते हैं
दोनों मिलकर ही अच्छा इंसान बनाते हैं
संसार की नदिया के दोनों ही किनारे हैं

दुःख न चाहे कोई सब सुख को तरसते हैं
दुःख आने पे रोते  सुख आये तो हँसते हैं
जिसने सुख पाया उसने दुःख देखे सारे हैं

कैसे तुमको मैं कहदूँ मुझको सारे सुख दे दो
ये तो तेरी मर्जी पर है जो तुम चाहो वो दे दो
मैंने तो तेरे  आगे अपने दोनों हाथ पसारे हैं
@मीना गुलियानी 

शुक्रवार, 25 जनवरी 2019

और कुछ देर न जा

सुन ज़रा मान भी जा और कुछ देर न जा
अभी है पहला पहर थोड़ी देर और ठहर

अभी तो चाँद झिलमिलायेगा
मेरा ये नसीब जाग जायेगा
खुलके बातें करेंगे जी भरके
तुझको देखा नहीं है जी भरके

रौशनी आफताब लायेगी
तारों की फिर बारात आयेगी
डोली मेरी भी तब उठा लेना
मुझको जी भरके तुम मना लेना

आज धरती पे चाँद उतरा है
तेरा मुखड़ा भी कैसा निखरा है
तेरी पलकें झुकी झुकी सी हैं
सांसें तेरी रुकी रुकी सी हैं
@मीना गुलियानी 

बुधवार, 23 जनवरी 2019

भविष्य हो उज्ज्वल

करती हूँ मैं प्रार्थना
कर लो तुम स्वीकार
आज प्रभु जी तुम
सबके भरदो भण्डार
जाए न खाली कोई
दुखियारा  तेरे दर से
घर घर उजियारा फैले
सूरज की रोशनी से
सपने साकार हों सबके
सबका शुद्ध चित्त हो
सबका ही हित हो
विश्व परिवार सदृश्य हो
पक्षी चहचहाते हों
 भँवरे  गुनगुनाते हों
मलयानिल बयार हो
सुखी सबका संसार हो
सबको मिले शुभ फल
खुशियाँ बाँटे हर पल
भविष्य हो उज्ज्वल
@मीना गुलियानी

मंगलवार, 22 जनवरी 2019

क्यों अंधेरे में जले

उम्मीद टूट चली है तेरे अब आने की
बुझाके रख दी है शमा गरीबखाने की

कहा था तुमने कि आयेंगे जब चिराग जले
पर इंतज़ार में तेरी इस दिल के दाग जले

वही है महफ़िल लेकिन अब यहाँ अँधेरा है
तेरे इंतज़ार में कुछ देर तलक चिराग जले

तू जाने भी कैसे कि दर्दो अलम क्या है
न कभी दिल ये जला न इसके दाग जले

अब तो मेरी तमन्नाओं में भी अँधेरा है
न सोच दिल ये मेरा क्यों अंधेरे में जले
@मीना गुलियानी 

सोमवार, 21 जनवरी 2019

प्यार से मुस्कुराना पड़ेगा

दिल में जलता रहे ये दिया प्रेम से ये जलाना पड़ेगा
आँधियाँ हों या तूफ़ान हों हर बला से बचाना पड़ेगा

जिंदगी दुःख का सागर भी है
जिदंगी प्रेम गागर भी है
सुख दुःख के भंवर से निकलकर
हमे उस पार जाना पड़ेगा

नाव साहिल से गर दूर हो
पाँव चलने से मजबूर हों
थामके फिर भरोसे का दामन
पतवार चलाना पड़ेगा

जिंदगी इक पहेली भी है
सुख दुःख की सहेली  भी है
माफ़ करके गुनाहों को सबके
प्यार से मुस्कुराना पड़ेगा
@मीना गुलियानी


रविवार, 20 जनवरी 2019

तेरा ही साथ रहे

तू मेरे साथ रहे दिन हो या रात रहे
हर पल सुख मिले हाथों में हाथ रहे

तू हमेशा था मेरा और रहेगा यूँ सदा
भूलेंगे हम न तुझे तुझको ही देंगे सदा
जिंदगी की हार जीत में तेरा हाथ रहे

तुझको पाया मैंने खुद को भी भूल गए
पाके तुझको अपना ये जहाँ भूल गए
धूप हो या छाया हो चाहे बरसात रहे

मुझसे दूर जाना ना तू मुझे भुलाना ना
हम तो तेरे ही हैं और अब जाना कहाँ
जीते जी मरके भी तेरा ही साथ रहे
@मीना गुलियानी 

जाति भेद को मिटाना

यह जीवन है दुःख सुख का ताना बाना
रखके हौंसला खुद पे आगे कदम बढ़ाना

दुःख है गहरा सागर हिम्मत न हार जाना
आशा की नाव पे चढ़के उस पार चले जाना

तुम भी वहाँ सपनों की दुनिया को बसाना
जब मीत  मिले मन का प्रीत को बढ़ाना

आशा की डोर लेकर फिर नया घर बसाना
फिर प्रेम की सुरभि से उसे तुम महकाना

प्रेम को पल्ल्वित कर जग को सुखी बनाना
इस जहाँ से नफरत जाति भेद को मिटाना
@मीना गुलियानी 

शुक्रवार, 18 जनवरी 2019

प्रमाद न कर

छू ले आसमान ज़मीन की तलाश न कर
जी ले अपनी जिंदगी ख़ुशी तलाश न कर

तेरी तकदीर यूँ  ही संवर जायेगी
ये बहारें फिर से लौट कर आयेंगी
 तेरे मुस्कुराने से तकरार न कर

ये उदासी भरे दिन भी गुज़र जायेंगे
चिराग जले शमा के परवाने आयेंगे
बहारें आयेंगी जीवन में ऐतबार तो कर

जीवन सुख दुःख से बना सबको छला है
जिसने कभी हारी न हिम्मत वो जीता है
ढूँढ ले अपनी खुशियों को  प्रमाद न कर
@मीना गुलियानी 

प्रेम से इसे बुना है

आज हमने रिश्तों का
ताना बाना बना है
एक एक रेशा चुनकर
मैंने आज इसे बुना है
पहले तो तकली से काता
फिर इसका गोला बनाया
जिसको खड्डे पे चढ़ाया
अंगुलियों से तिनके लगाए
एक अंगुली से फंदे बनाये
फिर उन्हें आगे पीछे से
जोड़ तोड़कर तिनके से
लाईन बनाकर उल्टी सीधी
दिशा में  अंगुली ले जाकर
तिनकों से लम्बा लटकाकर
सुंदर सा डिजाईन बनाया
देखो कहीं उलझा न देना
नहीं तो ये धागा टूटेगा
फंदा कहीं उलझा तो
ये रिश्ता भी फिर टूटेगा
इसको तुम बचाए रखना
एहसास ,प्रेम से इसे बुना है
@मीना गुलियानी 

बुधवार, 16 जनवरी 2019

बाँटना चाहती है

स्त्री क्या चाहती है
केवल पति का प्रेम
उसका साथ मीठे बोल
और कुछ भी नहीं
महंगे उपहार नहीं चाहती
साथ घूमना चाहती है
वो उसका हालचाल पूछे
पास बैठकर बातें करे
काम में हाथ बँटाये
हमेशा प्रेम से रहे
कभी रौब न दिखाए
बच्चों के साथ खेले
पिकनिक घुमाने ले जाए
उसका जन्मदिन याद रखे
मायके जाने पे रोके नहीं
उसकी आँखों में झाँके
पुराने लम्हे लौटा लाए
उसे आराम भी करने दे
कभी उसे अपने हाथों से
चाय बनाकर भी पिलाए
यही छोटी छोटी खुशियाँ
 पति संग बाँटना चाहती है
@मीना गुलियानी 

मंगलवार, 15 जनवरी 2019

यह जीवन बिताया है

इस जीवन की भाग दौड़ में
कड़ी धूप और घनी छाँव में
क्या खोया और क्या पाया है
क्या तुमको यह पता है कि
रात दिन हम इन बंजारों
की तरह घूमते ही रहते हैं
इन पर्वतों के साये तले
नदिया किनारे हाथ थामे
तुम्हारी यादों को साथ लिए
सुलगते बुझते चलते रुकते
घूमते न जाने क्या ढूँढ़ते
हमने यह जीवन बिताया है
@मीना गुलियानी

सोमवार, 14 जनवरी 2019

प्रवाह की खोज में

जब कभी मैं तन्हा होता हूँ
 मेरे मन में अचानक ही
सोया दर्द जाग उठता है
जो मन के भीतर ही
रिसकर बहने लगता है
धीरे धीरे वो नसों में
बहते बहते धड़कन में
समाने लगता है  फिर
वो शब्दों में ढलकर
निर्बाध गति से
प्रवाहित होने लगता है
भावना  का समुद्र
मन में लहराने लगता है
कभी कभी लगता है
मन के सेतुबंध टूट जायेंगे
कभी कभी भावना आँखों से
अश्रुधारा बन छलकने लगती है
मन महासागर बन जाता है
जो  अनन्त है और वह
भटकता है प्रवाह की खोज में
@मीना गुलियानी 

शनिवार, 5 जनवरी 2019

तुम चले जाना

सोई तकदीर जगा लूँ तो तुम चले जाना
प्यास आँखों की मिटा लूँ तो तुम चले जाना

अभी तो आये हो दो घड़ी ठहर जाओ
अपने नगमों को सजा लूँ तो तुम चले जाना

दिल टूटता है मेरा ऐसे तेरे जाने से
थोड़ा मैं दिल को सँभालू तो तुम चले जाना

तुझे फूलों से भरी जिंदगी मुबारक हो
फूल राहों में बिछा दूँ तो तुम चले जाना
@मीना गुलियानी 

प्यार की बजे सरगम

चलो उस पार चलें करलें बसेरा हम तुम
खुश रहें हिलमिलके जहाँ भी रहें हम तुम

ठंडी ठंडी हवा चले मौसम प्यारा प्यारा है
खुशनुमा  समा है हुआ रंगी ये नज़ारा है
दूरियाँ रहें न यहाँ फासले हो  जाएँ गुम

कल कल झरनों का बहता पानी है
फूलों की खुशबु है रुत मस्तानी है
चलो इस नज़ारे में खो जाएँ हम तुम

हर पल हँसते रहें और गुनगुनाते रहें
प्यार के ये नगमें सबको सुनाते रहें
भूल जाएँ गम प्यार की बजे सरगम
@मीना गुलियानी



गुरुवार, 3 जनवरी 2019

तेरे आने तक

मैं यह दुःख सहूँ कब तक
खलेगी तेरी कमी कब तक

सिर्फ तेरी याद पर ही जिन्दा हूँ
रहेगी याद भी मगर कब तक

पुकारते तुमको हम ही रहे
मगर पुकारते भी कब तक

तेरे बिना नहीँ है सुकूँ मुझको
जां चली जाए न तेरे आने तक
@मीना गुलियानी 

बुधवार, 2 जनवरी 2019

तू मत घबराना

ऐ राही तू कहीं पे रुक न जाना
हिम्मत से तू आगे बढ़ते जाना

चाहे चलना पड़े अकेला पर तू मत घबराना
लेके सहारा हिम्मत का आगे कदम बढ़ाना

हो चाहे तेरे आगे कितनी पर्वतों की श्रृंखलाएं
तू है रणबाँकुरा तेरी कितनी सशक्त हैं भुजाएँ

तू चाहे तो पर्वत को  चीरकर  रास्ता बना ले
हर मुसीबत को दूर करके खुद को भी बचा ले

तेरा मकसद हो हमेशा हर हाल में विजय पाना
चाहे कितने तूफां राहों में आएँ तू मत घबराना
@मीना गुलियानी 

मंगलवार, 1 जनवरी 2019

रूमानी हो जाएँ

आज फिर से हम बच्चे बन जाएँ
हर समय हम उन्हें देते हिदायतें
 चलो आज वो सब हम भूल जाएँ
आज जिन बातों पर उन्हेँ टोकते हैं
कल कहीं उस पल को न तरस जाएँ
आज उन्हें सब मस्ती करने दो
खूब उछलने ,कूदने ,खेलने दो
उनकी मस्ती में खुद को भूल जाएँ
यह बचपन कभी न आए दुबारा
समा सुहाना मौसम प्यारा प्यारा
इस रंगीन रुत में थोड़ा सा झूमें
चलो बच्चों के साथ खिलखिलाएं
करके  दूर उदासी रूमानी हो जाएँ
@मीना गुलियानी