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मंगलवार, 12 मई 2015

गुरुदेव के भजन-259 (Gurudev Ke Bhajan259)



मेरे सतगुरु आये आंगनिया 
नाचूँ मै बाँधके पायलिया 

कितने जन्मो के कर्म जगे है  मेरे 
आज दर्शन जो सतगुरु पाये है तेरे 
नाचे झूमे ये मन गाये मस्त पवन 
मेरे हृदय की खुल गई गांठलिया मेरे सतगुरु आये आंगनिया 


दिल में मूर्त बसाई है जबसे तेरी 
बस बदल गई है  दुनिया तबसे मेरी 
नही बस में जिया कैसा जादू किया 
नाचूँ छम छम होकर बावलिया मेरे सतगुरु आये आंगनिया 

इक तुझको ही अपना बनाया मैने 
सारी दुनिया को है ठुकराया मैने 
न भरता है जी मस्ती भर भर के पी 
तेरी नज़रो ने ऐसा घायल किया मेरे सतगुरु आये आंगनिया 


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