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मंगलवार, 12 मई 2015

गुरुदेव के भजन-267(Gurudev Ke Bhajan267)




बाबा तेरे रूप की देख छटा मन मेरा बोले न नज़र हटा 

कैसी छवि लागे प्यारी है तीनों लोक भी बलिहारी है 
दिल न भरे फिर नज़र उठा 

सौ सौ चाँद भी लागे  फीके बाबा तेरे नैन है नीके 
रूप का अपने जलवा दिखा 

ये दिल तुझपे वार दिया है तूने इतना प्यार दिया है 
चरणों में अपने मुझको बिठा 

बाबा तुझपे बलि बलि जाऊँ हाथ जोड़के तुझे मनाऊँ 
मन के भरम दे आज मिटा 

ऐसा रूप है बाबा प्यारा फैला चारों दिशा उजारा 
झलक तू अपनी फिर दिखला 



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