बीती है उमरिया भजन करले बाबा जी का थोड़ा तू ध्यान धरले
दिन डूबा अब साँझ ढली है रात भी आने वाली है
करे भजन तू गर बाबा का अमावस बने दीवाली है
थोड़ा थोड़ा ध्यान भी इधर करले
पल पल कटता जीवन तेरा यूं ही बीता जाये रे
खाली हाथ तू आया जग में रीता न चला जाये रे
सुमिरण से झोली तू आज भरले
बैठ अकेला निशदिन बन्दे कितने सपने बुनता है
हँस वही है जो इस जग में नाम के मोती चुगता है
खोलके किवड़िया तू ध्यान धरले
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