बाबा जी का नाम है साँचा झूठी है हर बात जी
भज ले बन्दे निशदिन इनको बन जाये बिगड़ी बात जी
क्या जाने कब तुझको जाना इस दुनिया से होवेला
किया न भजन गर तूने बन्दे माथा पकड़कर रोवेला
गांठ बंधक तू अब बन्दे जो समझाई बात जी
समझ समझ का फेर है बन्दे कभी समझ न आवेला
समय के रहते जो न समझा तो पाछे पछ्तावेला
भरम मिटाले और जाणले चोखी संगत साध की
खाता पीता मौज उड़ाता उम्र बीतती जावेली
भजन सुमिर ले नाम को जपले फिर न घड़ी ये आवेली
कर ले कमाई चोखी अब तू गांठ बांध ले बात की
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