हे महानन्द बाबा हमको ज्ञान अब दे दीजिये
दुनिया के भवजाल से अब मुक्त हमको कीजिये
देके दिव्य दृष्टि हमको आत्मरूप दिखाइए
इस धरा के मोह सिंधु से पार हमको कीजिये
प्रेम की प्रगाढ़ता में चूर हम हो जाएंगे
ध्यान की तल्लीनता में मग्न इतना कीजिये
दुनिया विस्मृत हो जाये हमें प्रेम इतना दीजिये
कृपा अब करके ऐ बाबा मुक्त हमको कीजिये
________________________***_________________________
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें