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बुधवार, 13 मई 2015

गुरुदेव के भजन-272 (Gurudev Ke Bhajan 272)




चरणो में गंगा बहती है बाबा दिल की उमंग यह कहती है 
तेरे द्वारे से मिलती है ख़ुशी जो दिल में समाई रहती है 

बाबा नाम तेरे को जो जानते है वो तुमको अपना मानते है 
जो उलझे है जग झंझट में कब नाम की कीमत जानते है 
बाबा तुमने जो हमको अपनाया इक प्रीत यही जो रहती है 

जो आया है वो जायेगा हर मॉल पड़ा रह जायेगा 
उठ जायेगा संसार से जो खाली हाथों से जायेगा 
जिसने भी चखा है अमृत को उसमे ही अमरता रहती है


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