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बुधवार, 22 अप्रैल 2015

गुरुदेव के भजन-110 (Gurudev Ke Bhajan110)




मेरी नाव तुम्हारे हाथ में है ओ बाबा पार लगा देना 
पापी मन के अंधियारे में इक प्रेम का दीप जला देना 

जीवन तो दिया कुछ करने को पर भूल गया भव झंझट में 
मै एक अभागा राही हूँ तुम मुझको राह दिखा देना 

तुम भक्तों के हितकारी हो करते सबका कल्याण तुम्ही 
मुझ दीन की हालत देख ज़रा मेरे बिगड़े काज बना देना 

मेरे बाबा मै तेरे सहारे हूँ तुम भूल न जाना कहीं मुझको 
आकर तुम मनमंदिर में मेरे इक प्रेम का दीप जला देना 

तुम जगतारण जगदाता हो मै तेरा ही इक बालक हूँ 
इस दास के दिल के आँगन में इक दया का फूल खिला देना 


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