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बुधवार, 20 अप्रैल 2016

दिल हमारा टूट जाएगा

न ऐसे रूठो तुम जानम मेरा दिल टूट जाएगा
तुम्हारा कुछ न बिगड़ेगा जमाना छूट जाएगा

तेरे इक रूठने से दुनिया मेरी रूठ जायेगी
न फिर फूलों भरी बगिया मेरी ये महक पाएगी
न भँवरे झूमेंगे फूलों पर न तितली गीत गायेंगी
सुहाना मौसम बिन पानी के जैसे सूख जाएगा

तुम्हारी इक हँसी पे जान कुर्बा कर दूँ मै अपनी
तेरे रुखसार पर दुनिया फना कर दूँगा मै अपनी
ये सारी  कायनात भी तुझपे कुर्बा कर दूँ मै अपनी
 तेरे लब पर हँसी आने से झरना फूट जाएगा

ये धरती चाँद तारे आसमाँ भी तो गवाह होंगे
हमारे दरम्याँ जो है पता वो करते ही होंगे
जमाने के सितम झेले  तुम्हारी खुशियों की खातिर
अगर तुम माने न तो दिल हमारा टूट जाएगा
@मीना गुलियानी


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