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मंगलवार, 7 अप्रैल 2015

गुरुदेव के भजन-04 (Gurudev Ke Bhajan -04)





तेरे दर पे मै आना चाहताहूँ
तेरा  दर्शन मै पाना चाहता हूँ
मुझे चरणोंकी थोड़ी धूल दे दो
मै किस्मत  को जगाना चाहता हूँ

तुम्ही हो मेरी किस्मत के सहारे
मेरी नैया लगादो तुम किनारे
तुम्हारे पास आना चाहता हूँ

करलो मेरे दिल में  तुम बसेरा
बड़ा अहसान होगा बाबा तेरा
तेरे चरणों में रहना चाहता हूँ


है  किश्ती मेरी तूफां के हवाले
बचाले ओ मेरे मांझी बचाले
भंवर से मै निकलना चाहता  हूँ


बड़ा अंधकार छाया है  घनेरा
मुझे बस  आसरा है  बाबा तेरा
मै मुक्तिपथ  को पाना चाहता हूँ


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