जय गुरुजान बाबा, स्वामी जय गुरुजान बाबा
दुःख हर्ता , सुख कर्ता , जग पालन कर्ता
स्वामी .......
घाटगेट महाकाली , मंदिर में विराजे
सिर पे पगड़ी सोहे , और दुशाला साजे
स्वामी .......
करुणा की मूरत है , छवि लगे अति प्यारी
जो कोई इनको ध्यावे , विपदा सारी
स्वामी .......
गले रुद्राक्ष की माला, भाल पे टीका साजे
पग में खड़ाऊ सोहे, घंटा ध्वनि बाजे
स्वामी .......
मुख तेजस्वी इनका, शोभा लगे प्यारी
सबके दिलो में विराजें, गुण गाये नर -नारी
स्वामी .......
प्रेम दया और भक्ति, भाव से ये रीझे
वरदाता करुणामय, मन चाहा दीजे
स्वामी .......
काम क्रोध विषयो को, बाबा दूर करे
प्रेम से जो जय बोले, तीनों ताप हरें
स्वामी .......
बाबा जी की आरती, प्रेम से जो गावे
मनवांछित इच्छा को, गुरुजान से पावे
स्वामी .......
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