मुझे दर्श दिखादो बाबा जी, तेरे दर्श का दिल दीवाना है
रखना तू मेरी लाज सदा, तेरे बिन कहाँ ठिकाना है।
करना न बाबा अब देरी, अब विनती सुन लेना मेरी।
त्रिशूल उठा मेरे पाप मिटा, संसार से इक दिन जाना है।
मोहमाया के बंधन काटो, चौरासी का फन्दा काटो
इस जग के नाते झूठे है, तेरे नाम को अब पहचाना है।
तुम विनती सुनते हो सबकी, आशा पूर्ण करते सबकी
मेरी बारी मत देर लगा, दीदार को तेरे पाना है।
बेदर्द ये दुनिया सारी है, जो दीन दुःखी ठुकराती है
तेरा दरबार है ऐसा दर, जहाँ मिलता हमें ठिकाना है।
तूने दया की वर्षा बरसाई, मै झोली को भरने आई
ममता को आज लुटा दो तुम, तेरे प्यार को मैने पाना है।
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