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मंगलवार, 9 जून 2015

माता की भेंट - 143



मुझे मैया जी तेरी आस है , तेरे दर्श की मुझको प्यास है
तेरे दर पे मिटने आये है , तेरे बिन जी मेरा उदास है

तेरे दर्श की मुझको आरजू , तेरा दर्श ही मेरी जुस्तजू
तेरा द्वार मै कैसे छोड़ दूँ , तेरे नाम की मुझको आस है

तेरा नाम मै रटती रहूं , तेरा जाप मै करती रहूँ
तेरी कृपा हो तो मैया जी , मुझे डर क्या तू मेरे साथ है

तेरी सूरत मन में बसती है , तेरे दम से ही मेरी हस्ती है 
तेरे बिन मै तो  कुछ नही, तेरे बिन क्या मेरी बिसात है 

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