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सोमवार, 1 जून 2015

माता की भेंट - 54



माँ जी दुखड़े दूर करो ,  भगत खड़ा फरियाद करे 
माँ जी दुखड़े दूर करो 

तुम मैया जगदाती हो , सबके कष्ट मिटाती हो 
दया दास पर करदो माँ ,  खाली झोली भरदो माँ 
मै सेवक हूँ चरणों का ,  चरणो में मिट जाऊँगा 
भूला भटका फिरता हूँ , सम्भल सम्भल के गिरता हूँ 
मेहर जो तेरी हो जाये , बिगड़ी मेरी बन जाये 
तार दे तारणहारी माँ, बक्श दे बक्शनहारी माँ 
कबसे अर्ज करे दुखियारा , अब तो मेरे कष्ट हरो माँ जी दुखड़े दूर करो 


दर ते खड़ा भिखारी है ,  आस दर्श की भारी है 
दूर से चलकर आया है ,  एक ही आशा लाया है 
सोना चांदी चाहूँ न , पाप बक्श दे मेरे माँ 
आ जाओ माँ आँखों में , मुझे बिठा लो चरणो में 
सब दुनिया को छोड़ दिया , तुमरे दर पे आन पड़ा 
तुमने करम कमाया न, अपने गले लगाया न 
देर करो न मेहर करो,दासी के सिर हाथ धरो माँ जी दुखड़े दूर करो 


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