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रविवार, 20 मार्च 2016

पिया घर आओ जी


पिया घर आओ जी  न यूँ तरसाओ जी
मै करूँ इन्तज़ार तेरा जिया बेकरार मेरा
कदर तू न जाने मेरी, पिया घर आओ जी

                  कबसे तेरी बाट निहारूँ जी मेरा घबराये
                  इत उत डोलूँ रास्ता देखूँ तू नज़र नहीं आये
                  रास्ता तेरा देखूँ पिया करूँ और क्या
                  तू कर ऐतबार मेरा है दिल बेकरार मेरा

जबसे तुम बिदेस गए हो लौटके क्यों नहीं आये
 लिख भेजी कितनी पत्तियां कुछ न मोहे भाये
कैसे पिया लागे जिया न तेरे बिन ओ पिया
तू कर ऐतबार मेरा है दिल बेकरार मेरा

                  तेरे बिन ये सावन सूखा कैसे झूला झूलें
                 बिन तेरे बैरन भई  रतियाँ अरमां सारे भूले
                 मोरे पिया सुन ले ज़रा मेरी तू सदा
                  तू कर ऐतबार मेरा है दिल बेकरार मेरा
@मीना गुलियानी 

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